आरकेडीएफ कॉलेज भोपाल पर एक करोड़ का जुर्माना, एनएमसी का एक्शन

Aman Vaishnav | Mar 15, 2026, 15:33 IST
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एनएमसी ने भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज पर बड़ी कार्रवाई की है। स्टाइपेंड नियमों के उल्लंघन पर एक करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। आरोप है कि संस्थान ने एमबीबीएस और पीजी छात्रों का हक मारा है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें और जानें क्या है पूरा मामला।

News In Short

  • एनएमसी ने आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज भोपाल पर भारी जुर्माना लगाया है।
  • यह जुर्माना स्टाइपेंड भुगतान की जानकारी छुपाने के कारण लगा है।
  • कॉलेज ने एमबीबीएस इंटर्न्स को स्टाइपेंड देने का विवरण नहीं दिया है।
  • पीजी रेजिडेंट्स के भुगतान की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है।
  • संस्थान ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और एनएमसी नियमों का उल्लंघन किया है।

News In Detail

भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। छात्रों के हक को दबाना अब इस संस्थान को महंगा पड़ गया है। एनएमसी ( National Medical Commission) ने इस लापरवाही पर कड़ा प्रहार करते हुए नोटिस दिया है। संस्थान पर छोटा- मोटा नहीं, पूरे एक करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। इस खबर ने पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है।



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क्यों लगा एक करोड़ का जुर्माना?

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) अब बहुत सख्त नजर आ रहा है। आयोग के अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 12 मार्च 2026 को सार्वजनिक किया गया था। आयोग ने सभी कॉलेजों को स्टाइपेंड की जानकारी देने को कहा था। यह जानकारी कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट भी पर डालना बेहद जरूरी था।



आयोग ने स्टाइपेंड भुगतान में पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए थे। आरकेडीएफ कॉलेज ने इस नियम का पालन करने में कोताही बरती। कई बार याद दिलाने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ था। कॉलेज ने छात्रों को दिए जाने वाले पैसे का विवरण भी छुपाया था। इसी कारण आयोग ने एक करोड़ रुपए का भारी दंड लगाया है।



बता दें कि यह जुर्माना कॉलेज के प्रबंधन के लिए आखिरी चेतावनी है। आयोग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। नोटिस में कहा गया है कि, एमबीबीएस इंटर्न्स और पीजी रेजिडेंट्स को उनका हक मिलना चाहिए। साथ ही जानकारी साझा न करना एक गंभीर प्रशासनिक अपराध माना गया है। इसके अलावा धारा 31 के तहत भी कॉलेज पर कार्रवाई की गई है।





सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी

बता दें कि स्टाइपेंड का भुगतान करना हर मेडिकल कॉलेज की कानूनी जिम्मेदारी है। यह छात्रों की मेहनत और उनके संवैधानिक अधिकारों का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पहले ही स्पष्ट आदेश दिए हैं। भावना तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में कोर्ट सख्त था। अभिषेक यादव बनाम आर्मी कॉलेज केस में भी यही निर्देश थे। इन सभी मामलों के आधार पर इंटर्न्स को स्टाइपेंड देना अनिवार्य है। आरकेडीएफ कॉलेज ने इन न्यायिक फैसलों का खुला उल्लंघन किया है।



इन 7 कॉलेजों पर हुआ एक्शन

एनएमसी ने केवल आरकेडीएफ कॉलेज (आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज भोपाल) पर ही कार्रवाई नहीं कीहै। इस सूची में देश के छह अन्य बड़े संस्थान भी शामिल हैं। आयोग ने प्रत्येक संस्थान पर एक-एक करोड़ का जुर्माना लगाया है। ये सभी कॉलेज स्टाइपेंड की जानकारी साझा करने में विफल रहे। आयोग ने गहन जांच के बाद इन सात कॉलेजों को चुना।



आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बैंगलोर, कर्नाटक



दुमका मेडिकल कॉलेज, दिघी, झारखंड



राजकीय मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर, राजस्थान



राजकीय मेडिकल कॉलेज, ओंगोल, आंध्र प्रदेश



आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज अस्पताल, भोपाल, मध्य प्रदेश



प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश



पंडित बी.डी. शर्मा पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, रोहतक, हरियाणा



इन सभी संस्थानों ने पारदर्शिता बरतने में बड़ी लापरवाही की है। आयोग ने इनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की है। इन कॉलेजों को अब अपनी वेबसाइट पर विवरण देना होगा।



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एडमिशन बंद होने का भी खतरा

भारी जुर्माने के बाद आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज पर बड़ी मुसीबत मंडरा रही है। यह संस्थान की शैक्षणिक साख के लिए बड़ा झटका होगा। छात्रों के भविष्य पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। एनएमसी ने साफ किया है कि वह आगे और कठोर होगा।



रिफरेंस:



एनएमसी पब्लिक नोटिस संख्या U-22370-Legal-UGMEB दिनांक 12-03-2026।



एनएमसी नोटिस दिनांक 13-03-2026, हस्ताक्षर डॉ. राघव लंगर।



एनएमसी एक्ट 2019 और पीजीएमईआर रेगुलेशन 2023।



FAQ

  1. 1. भोपाल के आरकेडीएफ कॉलेज पर जुर्माना क्यों लगा?
    आरकेडीएफ कॉलेज ने एमबीबीएस इंटर्न्स और पीजी रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड की जानकारी नहीं दी थी। कॉलेज ने वेबसाइट पर यह विवरण साझा करने के नियमों का उल्लंघन किया था। एनएमसी के बार-बार नोटिस भेजने पर भी कोई जवाब नहीं दिया गया था। इसी लापरवाही के कारण आयोग ने एक करोड़ का जुर्माना लगाया है।
  2. 2. क्या जुर्माने के बाद कॉलेज की मान्यता रद्द हो सकती है?
    हां, यदि कॉलेज ने नियमों में सुधार नहीं किया तो कार्रवाई होगी। एनएमसी नए एडमिशन पर पूरी तरह रोक लगा सकता है। साथ ही कॉलेज की मान्यता को पूरी तरह निलंबित किया जा सकता है। आयोग ने नोटिस में इस दंड का स्पष्ट जिक्र किया है।

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