No Fly Day में विमान रोकने के लिए बढ़ता जा रहा है समर्थन
नील तिवारी, JABALPUR. 6 जून के दिन जबलपुर में होने वाले अनूठे विमान रोको आंदोलन ( No Fly Day ) के समर्थन में अब जिला अधिवक्ता संघ भी आ चुका है। इसके साथ ही नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडोरी, सतना, सिवनी,कटनी,रीवा,मंडला, शहडोल जैसे शहरों के नागरिक और संगठन भी इस आंदोलन में वायु सेवा संघर्ष समिति का साथ दे रहे। इसी समर्थन के साथ इस आंदोलन की तैयारी पर चर्चा करने महासम्मेलन का आयोजन किया गया।
भव्य नया टर्मिनल तरस रहा उड़ानों को
जबलपुर मे लगभग 450 करोड़ कि लागत से नई टर्मिनल बिल्डिंग के साथ ही अन्य विकास कार्य किए गए हैं। जिनका लोकार्पण 10 मार्च को हो चुका है । नई टर्मिनल बिल्डिंग के उद्घाटन के बीच जबलपुर में जनमानस के ज़हन मे यह सवाल है कि विकसित होते एयरपोर्ट मे फ्लाइटस् लगातार कम क्यों हो रहीं हैं। जबलपुर के डुमना विमानतल से उड़ानों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इंडिगो एयरलाइन्स लगातार अपनी उड़ानें जबलपुर से समेटता हुआ नजर या रहा है। इसी कड़ी मे इंडिगो ने जबलपुर से मुंबई के बीच फ्लाइट को बंद किया था। हालांकि एयरलाइन्स इसे कुछ दिनों मे शुरू करने की बात की थी पर यह फ्लाइट आज तक शुरू नहीं हो सकी । एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार अभी उड़ानें 100 प्रतिशत occupancy पर चल रही थीं फिर भी फ्लाइट्स जबलपुर एयरपोर्ट से नदारत ही होती गईं।
कभी इसी एयरपोर्ट से बड़े शहरों को जाती थी 12 फ्लाइट
वायु सेवा संघर्ष समिति के हिंमांशु खरे ने वताया कि वर्ष 2023 मे जबलपुर से 12 उड़ानें संचालित होती थी। जो बढ़ने कि बजाए कम ही होती जा रही हैं। वहीं उद्योगपतियों को बेहतर कनेक्टिविटी और विकास के साथ भविष्य में बढ़ने वाली उड़ानों का स्वप्न दिखाया गया। जिसके कारण महाकौशल के निवेशकों ने जबलपुर मे सेकड़ों करोड़ का निवेश भी किया। पर अब कम होती फ्लाइटस के कारण निवेशक भी परेशान है जिसका सीधा असर शहर और महकौशल के विकास पर पड़ेगा।
दो साल पहले तक थी 12 फ्लाइट
अगर साल 2021 से 2023 के बीच की ही बात करें तो जबलपुर एयरपोर्ट से कुल 12 विमान उड़ान भरते थे जिनका ये रूट था।
स्पाइस जेट 7 फ्लाइट
- दिल्ली-जबलपुर-दिल्ली (रोजाना) मुम्बई-जबलपुर-मुम्बई (रोजाना)
- सूरत-जबलपुर-सूरत (हफ्ते में 3 दिन)
- बैंगलोर-जबलपुर-बैंगलोर (शनिवार)
- हैदराबाद-जबलपुर-हैदराबाद (रोजाना)
- पुणे-जबलपुर-बैंगलोर (6 दिन)
- दिल्ली-जबलपुर-दिल्ली (5 दिन)
अलायन्स एयर 2 फ्लाइट्स
- दिल्ली-जबलपुर-बिलासपुर (4 दिन)
- दिल्ली-जबलपुर-दिल्ली (3 दिन)
इंडिगो एयर 3 फ्लाइट
- जबलपुर-दिल्ली-जबलपुर
- जबलपुर-हैदराबाद-जबलपुर
- जबलपुर-इंदौर-जबलपुर
वहीं अब स्पाइस जेट ने जबलपुर से अपना लगभग सारा बिज़नेस समेट लिया है और सात में से मात्र एक जबलपुर से दिल्ली की फ्लाइट बाकी है जो सिर्फ हफ्ते में 2 दिन चलती है। इस तरह से अब मुंबई,बेंगलुरु,पुणे,सूरत जैसे बड़े शहरों से जबलपुर की कनेक्टिविटी अब दयनीय हो रही है।
शहर में नहीं होती बड़ी कॉन्फ्रेंस
महासम्मेलन में शामिल हुए डॉक्टरों और प्रोफेसरोंने भी यह बताया कि जबलपुर में मेडिकल से लेकर आयुर्विज्ञान और कृषि यूनिवर्सिटी तक मौजूद है उसके बाद भी इससे जुड़ी बड़ी कॉन्फ्रेंस जबलपुर में आयोजित नहीं की जाती जिसका सीधा कारण है कि देश-विदेश से आने वाले वक्ताओं के मध्य नजर या कॉन्फ्रेंस ऐसे शहर में शिफ्ट कर दी जाती है जहां से डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा उपलब्ध हो। यह जबलपुर के विकास और छात्रों के शैक्षणिक स्तर के लिए भी बहुत हानिकारक है। इसके विरोध स्वरूप ही यह तय किया गया है कि 6 जून को जबलपुर से फ्लाइट ना उड़ने देकर विमान मंत्रालय सहित प्राइवेट कंपनियों और जिम्मेदारों को जबलपुर की फ्लाइट्स को यथावत करने के लिए साफ संदेश दिया जाएगा।
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