ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई 13 मई तक टली: जानें अब तक क्या-क्या हुआ
News in Short
- जबलपुर हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई अब 13 मई तक टल गई है।
- सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुई चार याचिकाओं की लिस्टिंग बाकी थी।
- दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने सुनवाई शुरू करने के लिए सहमति दी थी।
- कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया।
- 13 मई को याचिकाओं की लिस्टिंग और दस्तावेज़ ट्रांसफर के बाद सुनवाई होगी।
News in Detail
ओबीसी आरक्षण मामले में सुनवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई अब 13 मई तक टल गई है। यह मामला काफी समय से चर्चा में है। इसके फैसले का असर लाखों लोगों की जिंदगी पर होगा।
सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुई चार लंबित याचिकाओं को अब तक लिस्ट नहीं किया गया था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं को ट्रांसफर किया था, लेकिन अब तक इनका दस्तावेजीकरण और लिस्टिंग बाकी था।
क्या हैं ये याचिकाएं?
सुप्रीम कोर्ट ने कुल 52 याचिकाओं को ट्रांसफर किया था, जिनमें से चार याचिकाओं की लिस्टिंग बाकी थी। इन याचिकाओं में प्रमुख हैं:
OBC Welfare Advocate Association (496/2026)
PSC Students (WP606/2025)
WP735/2025 और WP866/2025
इन याचिकाओं का संबंध ओबीसी (ओल्ड बैकवर्ड क्लास) के आरक्षण से है, और इससे जुड़े अधिकारों की व्याख्या की जा रही है।
कोर्ट का आदेश और स्थिति
अधिवक्ताओं ने इस मामले की सुनवाई को शुरू करने के लिए सहमति दी थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर एक सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
सभी दस्तावेजों की लिस्टिंग और ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सुनवाई शुरू की जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला सिर्फ ओबीसी के आरक्षण से संबंधित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
लगातार तीन दिन होगी सुनवाई
अब मामले की सुनवाई 13 14 और 15 मई को लगातार होगी। कोर्ट ने पहले भी आदेश दिया था कि मामले की सुनवाई लगातार 27, 28 और 29 अप्रैल को की जाएगी पर तकनीकी कमी के चलते यह सुनवाई टल गई है। कोर्ट ने फिर लगातार तीन दिन मामले की सुनवाई के लिए तय किए है।
अब आगे क्या होगा?
अब इन चार याचिकाओं की लिस्टिंग और दस्तावेज़ों का ट्रांसफर होने के बाद, इस मामले की सुनवाई 13 मई को होगी। इस तारीख तक, सभी संबंधित दस्तावेज़ हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। यह फैसला कई राज्यों में चल रहे ओबीसी आरक्षण मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
क्यों है यह मामला अहम?
ओबीसी आरक्षण के मामले में अब तक कई अहम फैसले हो चुके हैं, लेकिन यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सीधे तौर पर लाखों ओबीसी वर्ग के लोगों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण की नीति को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर लोग चिंतित हैं। इस मामले का परिणाम भविष्य में ओबीसी वर्ग के आरक्षण को लेकर कई नीतिगत फैसलों की दिशा तय कर सकता है।
ओबीसी आरक्षण मामला: पिछले 2 महीनों की पूरी टाइमलाइन
मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट की एंट्री और फाइलों का ट्रांसफर
10 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से जुड़ी ओबीसी आरक्षण की करीब 52 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन्हें वापस जबलपुर हाई कोर्ट भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ही इस पर फैसला ले।
22 मार्च 2026: हाई कोर्ट में इन सभी फाइलों के पहुंचने की प्रक्रिया शुरू हुई। राज्य सरकार ने अपनी ओर से हलफनामा पेश कर पुराने 87-13% वाले फॉर्मूले को जारी रखने की बात कही।
28 मार्च 2026: पीएससी के छात्रों ने एक नई याचिका (WP606/2025) के जरिए कोर्ट से मांग की कि भर्तियों को आरक्षण की वजह से और ज्यादा न रोका जाए।
अप्रैल 2026: तकनीकी पेंच और नई तारीखों का दौर-
5 अप्रैल 2026: जबलपुर हाई कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर (Clubbing) सुनने का फैसला किया। इस दिन कोर्ट रूम में वकीलों और छात्रों की भारी भीड़ रही।
12 अप्रैल 2026: ओबीसी वेलफेयर एडवोकेट एसोसिएशन ने नई दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि 27% आरक्षण देना संवैधानिक रूप से सही है और सरकार को इसे तुरंत लागू करना चाहिए।
20 अप्रैल 2026: कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट से भेजी गई 52 याचिकाओं के अलावा 4 और याचिकाएं हैं, जिनका डिजिटल डेटा (Document Upload) अभी सर्वर पर नहीं आया है।
25 अप्रैल 2026: सरकार की तरफ से महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वे डेटा ट्रांसफर के लिए दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री) से संपर्क में हैं।
28 अप्रैल 2026: कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई अब 13 मई तक टाल दी है। मई में लगातार तीन दिन 13,14 व 15 मई को सुनवाई की जाएगी।
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