ओबीसी केस में आज फैसला संभावित, हाईकोर्ट की डबल बैंच में केस लिस्ट, लाखों अभ्यर्थियों की टिकी निगाहें

Sanjay Gupta | Oct 09, 2026, 12:30 IST
27% ओबीसी आरक्षण पर आज फैसला संभव, हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर आज बड़ा फैसला आ सकता है। शुक्रवार को यह मामला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच में सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि लंच के बाद कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है।

मध्य प्रदेश की राजनीति और युवाओं के लिए शुक्रवार सबसे अहम साबित हो सकता है। इस केस को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने 501 नंबर पर लिस्ट किया है, जो शुक्रवार की सूची में पहले नंबर पर है। ओबीसी वेलफेयर कमेटी के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने भी कहा कि फैसला लंच के बाद संभव है।



5 अगस्त से लंबित है फैसला

यह फैसला 5 अगस्त को लंबी सुनवाई के बाद ही रिजर्व में रखा गया था। इस बात को 65 दिन करीब हो चुके हैं। इसके बाद से ही फैसले का इंतजार बढ़ गया था। इस फैसले पर सभी की निगाहें। इसी से मप्र में साल 2019 से होल्ड हो रहे 13 फीसदी पदों को लेकर भी स्थिति साफ हो सकेगी।



राहुल गांधी के पत्र के बाद और चर्चा में

मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का मामला साल 2019 से चर्चा में है। ओबीसी वर्ग का दावा है कि प्रदेश में उनकी आबादी 52 फीसदी है। इसी आधार पर वे 27 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वहीं, सामान्य वर्ग के कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।



यह मामला तब और सुर्खियों में आ गया, जब राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखा। दरअसल, इंदौर में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने पत्र में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग की थी। साथ ही भर्ती में होल्ड किए गए 13 फीसदी पदों को भी अनहोल्ड करने को कहा था।



क्या है पूरा विवाद

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने साल 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया था। इस पर मामला कोर्ट में चला गया और वहां से अंतरिम आदेश में रोक लग गई। रिजल्ट रूकते देख मध्य प्रदेश सरकार ने सितंबर 2022 में एक फार्मूला निकाला और 87-13 फीसदी रिजल्ट कैटेगरी बनाई।



इसमें तय किया गया कि ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण देते हुए कुल 87 फीसदी पदों का मूल रिजल्ट जारी होगा। वहीं 13 फीसदी को होल्ड रखा जाएगा। जब आरक्षण पर फैसला हो जाएगा तब यदि ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी मान्य किया तो यह 13 फीसदी होल्ड पद उन्हें दे देंगे, नहीं तो यह फिर अनारक्षित कोटे में चले जाएंगे।



पांच अगस्त से रूका है आदेश

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह सुनवाई करके इसमें फैसला दें। इसके बाद लंबी सुनवाई चली और फिर 5 अगस्त को फैसला सुनकर सुरक्षित रख लिया गया। इस बात को 49 दिन हो चुके हैं और फैसले का इंतजार है। इसी आधार पर आरक्षण तय होगा।



ओबीसी आरक्षण में मूल प्रश्न यह है

इस मामले में कुल 92 याचिकाएं जुड़ी हुई हैं। पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को पार किया जा सकता है? साथ ही यह भी तय होना है कि क्या ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात में 27 फीसदी आरक्षण दिया जा सकता है।



जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट भेजा था, तब उसने कहा था कि किसी राज्य की भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या से जुड़े हालात का आकलन वहीं किया जा सकता है। इसलिए इस मामले की सुनवाई (MP में ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण) हाईकोर्ट में होना उचित है।



अब सबसे अहम बात यह होगी कि सरकार और ओबीसी पक्ष क्या ऐसे आंकड़े पेश कर पाए हैं, जिनके आधार पर 27 फीसदी आरक्षण को सही ठहराया जा सके और 50 फीसदी की सीमा को पार करने का आधार मिल सके। हालांकि ईडब्ल्यूएस के 10 फीसदी आरक्षण के कारण आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ऊपर गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है।

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