PACL ठगी केस में एजेंट को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, रकम दोगुना करने का लालच देकर हुई थी ठगी

Sanjay Dhiman | May 21, 2026, 18:39 IST
Photograph: (the sootr)
ग्वालियर में PACL चिटफंड ठगी के आरोपी एजेंट मुकेश अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस को जांच में सहयोग न मिलने या जरूरत पड़ने पर आरोपी को गिरफ्तार करने की पूरी छूट दी है।

News In Short

  • PACL एजेंट मुकेश अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की।
  • महिला से पैसा दोगुना करने का लालच देकर 2 लाख रुपए निवेश कराए गए थे।
  • मैच्योरिटी के बाद भी पीड़ित दंपती को रकम वापस नहीं मिली।
  • कोर्ट ने कहा- जांच में सहयोग करें, तभी गिरफ्तारी टल सकती है।
  • मुरार थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।

Intro

Ratan Mishra@Gwalior. ग्वालियर में PACL चिटफंड ठगी मामले में आरोपी एजेंट मुकेश अग्रवाल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली। कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जांच में सहयोग करने पर गिरफ्तारी से बचा जा सकता है, लेकिन पुलिस जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकती है।



News in detail

PACL ठगी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने पीएसीएल चिटफंड मामले में आरोपी एजेंट मुकेश अग्रवाल को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस आशीष श्रोती की एकलपीठ ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी कर सकती है, हालांकि जांच में सहयोग करने पर गिरफ्तारी से बचा जा सकता है। यह मामला ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में दर्ज करोड़ों की चिटफंड ठगी से जुड़ा है।





महिला को दोगुना मुनाफे का दिया गया था लालच

शिकायत के अनुसार वर्ष 2014 में मुरार निवासी रेखा शर्मा और उनके पति रामकिशन शर्मा की मुलाकात मुकेश अग्रवाल से हुई थी। आरोपी ने खुद को PACL Limited का एजेंट बताते हुए दावा किया कि कंपनी में निवेश करने पर बैंक एफडी से कहीं अधिक फायदा मिलेगा। एजेंट के भरोसे में आकर दंपती ने 31 जनवरी 2014 को एक-एक लाख रुपए, कुल 2 लाख रुपए कंपनी में जमा कर दिए। इसके बदले उन्हें रसीदें भी दी गईं और भरोसा दिलाया गया कि वर्ष 2020 में मैच्योरिटी के बाद रकम बढ़कर लगभग 4 लाख 5400 रुपए हो जाएगी।



मैच्योरिटी पूरी हुई, लेकिन पैसा नहीं लौटा

पीड़िता का आरोप है कि तय अवधि पूरी होने के बाद जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो एजेंट लगातार टालमटोल करता रहा। कभी कंपनी बंद होने का हवाला दिया गया तो कभी ऊपर से पैसा न आने की बात कही गई। कई बार संपर्क करने के बावजूद दंपती को उनकी जमा पूंजी वापस नहीं मिली। आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी के बाद पीड़ित परिवार ने पहले पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।



कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

जब पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित दंपती ने अदालत का रुख किया। इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर मुरार थाना पुलिस ने PACL एजेंट मुकेश अग्रवाल और कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2), मध्य प्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम तथा चिटफंड एक्ट और RBI एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।



हाईकोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और मामले में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित Arnesh Kumar v. State of Bihar फैसले का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण मांगा। वहीं राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया।



मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी का कठोर कदम तभी उठाए जब उसकी वास्तविक आवश्यकता हो और आरोपी जांच में सहयोग न करे। अदालत ने निर्देश दिया कि पहले आरोपी को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाए। यदि वह सहयोग करता है तो गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होनी चाहिए।



PACL पर पहले भी लग चुके हैं बड़े आरोप

गौरतलब है कि PACL Limited पर देशभर में हजारों करोड़ रुपए की निवेश ठगी के आरोप पहले से लगते रहे हैं। Securities and Exchange Board of India ने वर्ष 2014 में कंपनी की निवेश योजनाओं पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद कई एजेंट लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर निवेश कराते रहे। ग्वालियर का यह मामला भी उसी कथित निवेश घोटाले की एक कड़ी माना जा रहा है।



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