पद्मश्री से सम्मानित जनक पलटा के साथ ऐसे हुई 23 लाख की धोखाधड़ी, CBI का खुलासा
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- पद्मश्री जनक पलटा के साथ 23.47 लाख की बैंक धोखाधड़ी हुई थी।
- बैंक कर्मचारी ने मोबाइल नंबर बदलकर धोखाधड़ी की थी।
- राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई थी और विड्रॉल की गई थी।
- सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
- आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है, जांच जारी।
Indore. इंदौर की प्रसिद्ध समाजसेवी और पद्मश्री से सम्मानित जनक पलटा मगलिगिन के साथ साल 2020 में 23 लाख 47 हजार की बैंक धोखाधड़ी हुई थी। इस मामले में सीबीआई ने मार्च 2025 में केस दर्ज किया था।
सीबीआई ने इस मामले में दो आरोपियों, दिनेश डोंगरे और चंदन जीनवाल को गिरफ्तार किया है। डोंगरे पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बिचोली मर्दाना ब्रांच, इंदौर में सीनियर असिस्टेंट के पद पर काम कर चुके थे।
इस तरह की गई थी पलटा के साथ धोखाधड़ी
सीबीआई की जांच में पता चला कि पद्मश्री जनक पलटा के बैंक खाते में 23.47 लाख की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में थी। इस राशि को पहले पलटा के खाते में ट्रांसफर किया गया था, और ये सब एक जून 2020 को हुआ।
डोंगरे ने अपनी बैंक आईडी और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए पलटा के बैंक खाते में मोबाइल नंबर बदल दिया, ताकि पलटा को बैंक से कोई मैसेज न मिले।
इसके बाद, इस राशि को जनक पलटा के खाते से पंकज जीनवाल के खाते में शिफ्ट कर दिया गया। साथ ही, पंकज के खाते में भी डोंगरे ने अपना मोबाइल नंबर लिंक कर दिया। फिर ट्रांजेक्शन के बाद ये राशि पंकज जीनवाल के खातों से निकलकर चंदन जीनवाल के खाते में चली गई और वहां से राशि निकाल ली गई।
गोल्ड लोन सेटल करने में उपयोग किया
सीबीआई ने अपनी जांच में यह भी बताया कि डोंगरे ने इस रकम का इस्तेमाल अपने गोल्ड लोन को चुकाने में किया। वहीं, जीनवाल ने इस पैसे का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग में किया। बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने इन दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया।
आरोपियों को मिल गई जमानत
इस केस में आरोपियों को 29 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन एक दिन में ही उनकी जमानत हो गई। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने कहीं भी यह नहीं कहा कि आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं किया। साथ ही, यह भी नहीं बताया गया कि आरोपियों की जरूरत जांच में है। समन जारी होने पर आरोपी खुद ही सीबीआई के सामने पेश हो गए थे। ट्रायल में अभी समय लगेगा, इसलिए कोर्ट ने आरोपियों को 25-25 हजार की जमानत राशि पर शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।
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