पन्ना चिता आंदोलन के बीच बुजुर्ग महिला की मौत, मचा हड़कंप
समझें क्या है पूरा मामला
- पन्ना चिता आंदोलन के बीच बुजुर्ग महिला की मौत हुई।
- करीब 400 विस्थापित जल सत्याग्रह में शामिल हुए हैं।
- प्रदर्शनकारियों ने अधूरा मुआवजा मिलने का आरोप लगाया है।
- प्रशासन ने 1,889 परिवारों को मुआवजा भुगतान बताया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत चल रहे पन्ना चिता आंदोलन के पांचवें दिन बुजुर्ग महिला की मौत हुई। मृतका की पहचान टपरिया निवासी रमिया आदिवासी के रूप में हुई। आंदोलनकारी करीब 400 लोगों के शामिल होने का दावा कर रहे हैं। विस्थापित परिवार मुआवजा और सही पुनर्वास पैकेज मांग रहे हैं। प्रशासन ने 1889 पात्र परिवारों को भुगतान करने की बात कही है।
पन्ना में चिता आंदोलन
पन्ना चिता आंदोलन (Panna Chita Movement) फिर तेज हो गया। विस्थापित परिवार नदी में उतरकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी लकड़ियों से बनी सांकेतिक चिताओं पर लेटे हैं। वे प्रशासन से पुनर्वास और पूरा मुआवजा मांग रहे हैं।
आंदोलन में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई बच्चों के भी प्रदर्शन में होने का दावा है। कुछ लोगों ने गले में सांकेतिक फंदे डाले हैं। प्रदर्शनकारी “न्याय दो या मार दो” नारा लगा रहे हैं।
करीब 400 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। यह संख्या आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों ने बताई। प्रशासन ने स्वतंत्र रूप से संख्या की पुष्टि नहीं की। आंदोलन पांच दिनों से लगातार जारी बताया गया है।
महिला की मौत कैसे हुई
प्रदर्शन के पांचवें दिन बुजुर्ग रमिया आदिवासी की मौत हुई। वह पन्ना जिले के टपरिया गांव की निवासी थीं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने मौत की जानकारी दी। रमिया 12 सितंबर को आंदोलन में शामिल हुई थीं।
भटनागर के अनुसार रमिया का घर टूट चुका था। उन्हें कथित रूप से मुआवजा भी नहीं मिला था। इसी कारण वह लंबे समय से तनाव में थीं। हालांकि मौत का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
रमिया की मौत प्रदर्शनस्थल पर हुई या बाद में हुई। इस संबंध में विस्तृत प्रशासनिक बयान उपलब्ध नहीं है। तनाव से मौत होने का दावा आंदोलन पक्ष का है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
मामले पर अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को से सवाल हुआ। उन्होंने ग्रामसभा में मौजूद होने की जानकारी दी। एसडीएम ने जानकारी जुटाकर जवाब देने की बात कही। मुआवजा नहीं मिलने की पुष्टि तत्काल नहीं हुई।
घरों में घुसा पानी
पन्ना विस्थापित आंदोलन (Panna Displaced Protest) कई परियोजनाओं से जुड़ा है। इनमें मझगाय और रुंझ बांध परियोजनाएं शामिल हैं। सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से भी परिवार प्रभावित हैं। प्रदर्शनकारी इसे व्यापक केन-बेतवा परियोजना प्रभाव से जोड़ते हैं।
परियोजनाओं के कारण जलस्तर बढ़ने का आरोप लगाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक कई घरों में पानी घुस चुका है। कुछ मकान क्षतिग्रस्त होकर गिरने लगे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद हुई हैं।
कुंवरपुर और बालूपुर गांव प्रभावित बताए गए हैं। बनेहरी और विश्रामगंज में भी नुकसान का दावा है। ग्रामीणों के मुताबिक कई रास्ते पानी में डूब गए। सामान्य जीवन और आजीविका दोनों प्रभावित हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बिजली काटने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बंद है। उन्होंने इसे आंदोलन दबाने का प्रयास बताया है। प्रशासन ने इस आरोप की पुष्टि नहीं की है।
भूमि रिकॉर्ड पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनके मुताबिक सिंचित जमीन को असिंचित बताया गया। इससे जमीन का मूल्यांकन कथित रूप से कम हुआ। कम मूल्यांकन के कारण मुआवजा भी कम मिला।
सिंचित और असिंचित जमीन की दरें अलग होती हैं। इसलिए रिकॉर्ड का वर्गीकरण मुआवजे को प्रभावित करता है। ग्रामीण अब जमीन का दोबारा सर्वेक्षण मांग रहे हैं। वे संशोधित रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान चाहते हैं।
आंदोलनकारियों ने पारदर्शी जांच की मांग भी रखी। उनके अनुसार प्रत्येक प्रभावित परिवार का सत्यापन होना चाहिए। जमीन और मकान की वास्तविक स्थिति जांची जाए। इसके बाद उचित पुनर्वास राशि निर्धारित की जानी चाहिए।
पैकेज पर क्यों विवाद
पुनर्वास पैकेज (Rehabilitation Package) इस आंदोलन का मुख्य मुद्दा है। विस्थापितों को पहले पांच लाख रुपए मिलने थे। बाद में पैकेज बढ़ाकर ₹12.50 लाख किया गया। यह बढ़ोतरी जुलाई के विरोध के बाद घोषित हुई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बढ़ा पैकेज नहीं मिला। कई परिवारों को केवल पांच लाख रुपए मिले। कुछ लोगों ने कोई राशि नहीं मिलने का दावा किया। पात्रता निर्धारण पर भी लगातार सवाल उठाए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार अंतर भुगतान की प्रक्रिया जारी है। पहले पांच लाख पाने वालों को अतिरिक्त राशि मिलेगी। प्रत्येक पात्र परिवार को ₹7.50 लाख और मिलेंगे। इसके बाद कुल पैकेज ₹12.50 लाख होगा।
प्रशासन का भुगतान दावा
अजयगढ़ प्रशासन ने अपने आंकड़े भी जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार पात्र परिवारों को भुगतान किया गया। रुंझ सिंचाई परियोजना से 670 परिवार प्रभावित हैं। उन्हें पांच लाख रुपए प्रति परिवार दिए गए।
मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना में तीन गांव शामिल हैं। इनमें बालूपुर और कुंवरपुर गांव शामिल हैं। बनेहरी गांव के परिवार भी परियोजना से प्रभावित हैं। प्रशासन ने 1219 परिवारों को पात्र बताया है।
प्रशासन के मुताबिक कुल 1889 परिवारों को राशि मिली। भुगतान सीधे पात्र परिवारों के खातों में भेजा गया। हालांकि आंदोलनकारी इन आंकड़ों को अधूरा बताते हैं। उनके मुताबिक कई प्रभावित परिवार सूची से बाहर हैं।
दावों और हालात में अंतर
विस्थापित मुआवजा विवाद (Displacement Compensation Dispute) लगातार गहरा रहा है। प्रशासन भुगतान पूरा होने का दावा कर रहा है। दूसरी तरफ परिवार नदी में प्रदर्शन कर रहे हैं। यही अंतर व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाता है।
रमिया आदिवासी की मौत से आक्रोश और बढ़ा है। आंदोलनकारी तत्काल सर्वेक्षण और भुगतान की मांग कर रहे हैं। वे मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठा रहे हैं। बिजली बहाल करने की मांग भी आंदोलन में शामिल है।
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