ड्राइवर की सलाह से मालिक मालामाल, पन्ना की खदान से मिला नायाब हीरा
समझें क्या है पूरा मामला...
- पन्ना हीरा खदान से 6.54 कैरेट का बेहद चमकदार कच्चा हीरा मिला है।
- इस रत्न की कीमत लगभग 20 लाख से 25 लाख रुपए के बीच आंकी गई है।
- यह खदान नोएडा के राणा सिंह की पत्नी मीना सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है।
- इस हीरे को नीलामी में बेचने के बाद टैक्स हटाकर सारा पैसा मालिक को मिलेगा।
मध्य प्रदेश का पन्ना जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां की रत्नगर्भा धरती ने एक बार फिर किसी की किस्मत चमका दी है। बता दें कि जरुआपुर गांव में 18 जून को रोज की तरह ही खुदाई चल रही थी।
इसी दौरान एक नायाब और बेहद चमकदार कच्चा हीरा मिला है। इस हीरे का वजन 6.54 कैरेट है। हीरा अधिकारियों ने इसे ब्राइट वैरायटी यानी बहुत ज्यादा चमकदार केटेगरी का पत्थर बताया है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी कीमत 20 लाख से लेकर 25 लाख रुपए के बीच हो सकती है। चमक ज्यादा होने की वजह से सरकारी नीलामी में इसकी और भी ऊंची बोली लग सकती है।
ड्राइवर की एक सलाह और बदल गई किस्मत
इस कामयाबी की कहानी आज की नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत लगभग छह साल पहले हुई थी। बता दें कि राणा सिंह नोएडा में कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की सप्लाई का काम करते हैं। इनके पास सतना के रहने वाले गौतम मिस्त्री ड्राइवर और मैनेजर के रूप में काम करते थे।
गौतम ने ही राणा सिंह को पन्ना के हीरा खनन सिस्टम के बारे में बताया था। साथ ही वहां किस्मत आजमाने की सलाह दी।
ड्राइवर की बात मानकर राणा सिंह ने पन्ना में संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं। काफी कोशिशों के बाद आखिरकार जुलाई 2020 में उन्हें अपनी पहली लीज मिल गई।
यह खदान (उथली हीरा खदान पन्ना) राणा सिंह की पत्नी मीना सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है। सारा काम उनके सबसे साथी गौतम मिस्त्री ही संभालते हैं।
खदान से अब तक कब-कब क्या मिला?
जानकारी के अनुसार राणा सिंह की इस खदान से अब तक कुल 15 हीरे निकल चुके हैं।
| साल | हीरे का वजन (कैरेट में) | स्थिति |
| जनवरी 2021 | 4.57 कैरेट | पहला हीरा मिला |
| साल 2022 | 9.64 कैरेट | दूसरा बड़ा हीरा मिला |
| साल 2023 | 8.1 कैरेट | तीसरा बड़ा पत्थर मिला |
| साल 2024 और 2025 | कोई बड़ा हीरा नहीं मिला | सूखा रहा |
| 18 जून 2026 | 6.54 कैरेट | ताजा और बेहद चमकदार हीरा मिला |
विरोध के बीच लगाया 1 करोड़ का दांव
राणा सिंह के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था। जब उन्होंने इस काम में हाथ डालने का सोचा, तो पूरा परिवार उनके इस फैसले के खिलाफ खड़ा हो गया। बिना किसी गारंटी के माइनिंग में पैसा लगाने की वजह से उनकी पत्नी भी बहुत नाराज थीं।
वहीं राणा ने हिम्मत नहीं हारी। वह अब तक लीज फीस, मजदूरों की मजदूरी और खुदाई के खर्च को मिलाकर एक करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश कर चुके हैं।
आमतौर पर लोग माइनिंग के काम में नुकसान उठाते हैं, लेकिन राणा सिंह के साथ ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि पिछले 6 सालों में उन्होंने जितना पैसा लगाया है, यहां से मिले हीरों की वजह से उन्हें उससे कहीं ज्यादा का रिटर्न मिल चुका है।
इस हीरे का आगे क्या होगा ?
डायमंड इंस्पेक्टर नूतन जैन ने बताया कि इस हीरे को पन्ना डायमंड ऑफिस में सुरक्षित जमा कर लिया गया है। अब सरकार की तरफ से जब भी अगली खुली नीलामी होगी, तो इस हीरे को उसमें रखा जाएगा।
नीलामी में जो भी सबसे ऊंची बोली लगेगी, वही इसकी आखिरी कीमत होगी। बिक्री से मिलने वाले पैसों में से सरकार अपनी रॉयल्टी और टैक्स काट लेगी।
बाकी की बची पूरी रकम सीधे लीजधारक मीना सिंह के बैंक खाते में भेज देगी। राणा सिंह ने फैसला किया है कि इस मुनाफे को वो वापस इसी माइनिंग के काम में लगाएंगे।
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