पन्ना टाइगर रिजर्व में अवैध प्रवेश: जीतू पटवारी पर FIR, वन विभाग की कार्रवाई
News in Short
- 12 मई को पन्ना टाइगर रिजर्व में केन-बेतवा परियोजना को लेकर प्रदर्शन हुआ था।
- कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और समर्थक टाइगर रिजर्व में बिना अनुमति घुसे।
- वन विभाग ने बताया कि गेट पर रोकने के बावजूद पटवारी जंगल में चले गए थे।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत FIR दर्ज की गई है।
- जुर्माना ₹50,000 से ₹2 लाख तक और सजा 2 से 5 साल हो सकती है।
News in Detail
Neeraj Soni@CHATARPUR. 12 मई 2026 को पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अभिषेक परमार ने समर्थकों के साथ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में प्रवेश किया था। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने बिना अनुमति कोर एरिया में प्रवेश किया था। अब इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन
वन संरक्षक(आईएफएस) विजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27, 38 और 51 के तहत FIR दर्ज की है। इन धाराओं के तहत ₹50 हजार से ₹2 लाख तक जुर्माना और 2 से 5 साल तक की सजा हो सकती है। वन विभाग का कहना है कि इन नेताओं ने जानबूझकर जंगल की सुरक्षा को नजरअंदाज किया और नियमों का उल्लंघन किया।
वन विभाग की चेतावनी को किया नजरअंदाज
जमीनी सूत्रों और वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने नेताओं को गेट पर ही रोक लिया था। उन्हें समझाया गया था कि टाइगर रिजर्व का कोर एरिया बेहद संवेदनशील होता है। वहां बिना लिखित परमिशन के जाना कानूनन अपराध है। लेकिन चेतावनी के बावजूद जीतू पटवारी और उनके समर्थक जंगल के रास्ते अंदर दाखिल हो गए थे।
कौन सी धाराओं में फंसे है जीतू पटवारी?
वन विभाग ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। जीतू पटवारी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (Wildlife Protection Act) की सख्त धाराएं लगाई गई हैं:
धारा 27: यह धारा किसी भी व्यक्ति को अभ्यारण्य में बिना अनुमति घुसने से रोकती है।
धारा 38: यह नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
धारा 51: इस धारा के तहत सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
अगर ये आरोप कोर्ट में साबित होते हैं, तो इसमें 50 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना और 2 से 5 साल तक की जेल भी हो सकती है।
क्या कहता है सरकारी प्रोटोकॉल?
टाइगर रिजर्व के नियम बहुत सख्त होते हैं। सूर्यास्त के बाद या बिना गाइड और परमिट के अंदर जाना पूरी तरह वर्जित है। पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कोर एरिया में जाने से मना किया था। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस कानूनी कार्रवाई का मुकाबला कैसे करती है।
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