पासपोर्ट बनवाने से पहले जान लें नए नियम! अब 4 बार होगी आपके दस्तावेजों की जांच, आवेदन में लगेगा ज्यादा समय
फर्जी पासपोर्ट रोकने का नया सिस्टम
बांग्लादेशी फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आया है। इसके बाद पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया बदली गई है। मामला यह था कि बांग्लादेशियों के भारतीय दस्तावेज बनवाकर फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए थे। अब मध्यप्रदेश की फर्जी पासपोर्ट (fake passport MP) जैसी घटनाएं रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
मध्यप्रदेश के हर पासपोर्ट केंद्र (Madhya Pradesh Passport Centre) पर यह नई व्यवस्था लागू है। निगरानी कर्मचारी के लॉगिन से शुरू होती है। यह आवेदक के दस्तावेजों की जांच तक जाती है।
पासपोर्ट केंद्र बायोमेट्रिक लॉगिन
पहले कर्मचारी यूजर आईडी (User ID - लॉगिन पहचान) और पासवर्ड से सिस्टम खोलते थे। अब यह काफी नहीं है। पासपोर्ट केंद्र बायोमेट्रिक लॉगिन जरूरी कर दिया गया है।
कर्मचारी को यूजर आईडी और पासवर्ड के साथ थंब इंप्रेशन देना होगा। इसके बिना सिस्टम नहीं खुलेगा। अंगूठे का निशान हर व्यक्ति का अलग होता है। इसलिए कर्मचारी की जगह कोई और लॉगिन नहीं कर पाएगा। Passport biometric login की यही शर्त अब हर कर्मचारी पर लागू है।
तीन मिनट में सिस्टम खुद बंद
पहले एक और कमी थी। कर्मचारी काम न करे, तब भी सिस्टम खुला रह सकता था। कोई दूसरा व्यक्ति उसका फायदा उठा सकता था।
अब ऐसा नहीं होगा। तीन मिनट तक काम न होने पर सिस्टम अपने आप लॉगआउट हो जाएगा।
पासपोर्ट दस्तावेजों की 4 बार जांच
सबसे बड़ा बदलाव दस्तावेजों की जांच में है। पहले आवेदक की जानकारी और दस्तावेज दो बार जांचे जाते थे। अब पासपोर्ट दस्तावेजों की 4 बार जांच होगी। यानी जांच दोगुनी कर दी गई है।
इस जांच में आवेदक और केंद्र के अधिकारी भी शामिल होंगे। यानी हर कागज पर अब कई नजरें रहेंगी। यह passport verification system का सबसे अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
संदिग्ध पासपोर्ट की सूचना कैसे
अब देखिए चौथा बदलाव। पहले संदिग्ध पासपोर्ट पर विशेष अधिकारी को सूचना देने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अब वह व्यवस्था बनाई गई है।
संदिग्ध पासपोर्ट की पहचान होने पर हेल्पलाइन और थाना प्रभारियों के नंबर जारी हुए हैं। ये नंबर विशेष अधिकारियों और थानों के प्रभारियों के हैं। संदेह होने पर कर्मचारी इन्हीं नंबरों पर सूचना देंगे।
महाराज बाड़ा मुख्य डाकघर के पोस्ट मास्टर और इंचार्ज मलखान सिंह लोधी ने जानकारी दी। उनके मुताबिक लॉगिन के लिए यूजर आईडी, पासवर्ड और बायोमेट्रिक जरूरी है। तीन मिनट काम न होने पर सिस्टम अपने आप लॉगआउट हो जाता है। संदिग्ध पासपोर्ट मिलने पर स्टाफ विशेष अधिकारी को सूचना दे सकेगा।
पासपोर्ट सेवा केंद्र नए नियम का असर
पासपोर्ट सेवा केंद्र पर नए नियम लागू होने से काम की रफ्तार थोड़ी घटी है। इन बदलावों की वजह से हर आवेदन में करीब 10 मिनट ज्यादा लग रहे हैं। यानी 6 आवेदन निपटाने में करीब एक घंटा ज्यादा लगेगा।
आवेदकों को इसका सीधा असर दिखेगा। चार बार जांच के कारण केंद्र पर रुकने का समय बढ़ेगा। क्या 10 मिनट की देरी सुरक्षा के लिए बड़ी कीमत है? सख्ती का मकसद फर्जीवाड़े को रोकना बताया गया है।
पासपोर्ट के लिए जाने वाले लोग पूरे और सही दस्तावेज साथ रखें। इससे जांच में अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
चार बदलाव एक नजर में
पहला बदलाव लॉगिन का है। अब अंगूठे का बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी है। दूसरा बदलाव यह है कि तीन मिनट निष्क्रिय रहने पर सिस्टम खुद लॉगआउट होगा।
तीसरा बदलाव जांच का है। दो की जगह अब चार बार जांच होगी। चौथा बदलाव सूचना का है। विशेष अधिकारियों और थाना प्रभारियों के नंबर अब केंद्रों को दिए गए हैं।
FAQs
- फर्जी पासपोर्ट रोकने के लिए नए सिस्टम में क्या बदलाव किए गए हैं?
फर्जी पासपोर्ट रोकने के लिए नए सिस्टम में पासपोर्ट केंद्रों पर लॉगिन को बायोमेट्रिक सत्यापन से जोड़ा गया है, सिस्टम तीन मिनट तक निष्क्रिय रहने पर अपने आप लॉगआउट होता है, और दस्तावेजों की जांच अब चार बार की जाने लगी है। - नए पासपोर्ट सिस्टम के तहत किस प्रकार की सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं?
नए पासपोर्ट सिस्टम के तहत कर्मचारियों को लॉगिन करने के लिए यूजर आईडी, पासवर्ड और बायोमेट्रिक अंगूठे का निशान प्रदान करना होगा, और संदिग्ध पासपोर्ट की पहचान होने पर विशेष अधिकारियों और थाना प्रभारियों को सूचित करने की व्यवस्था भी बनाई गई है। - इन नए नियमों का पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर आवेदन प्रक्रिया पर क्या असर पड़ा है?
नए नियमों के लागू होने के कारण पासपोर्ट सेवा केंद्रों में काम की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, जिससे हर आवेदन में करीब 10 मिनट ज्यादा का समय लग रहा है।