PDS की दुकान में एक करोड़ का घोटाला, 300 परिवारों का राशन डकार गई बाप-बेटे की जोड़ी!
ई-पॉस मशीन में 14 हजार किलो गेहूं
पीडीएस (PDS – Public Distribution System) यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली। इसी प्रणाली से गरीब परिवारों को सरकारी राशन मिलता है। 29 अक्टूबर 2025 को संयुक्त आपूर्ति अधिकारी ने भौतिक सत्यापन किया। भौतिक सत्यापन यानी मौके पर जाकर स्टॉक की गिनती।
ई-पॉस मशीन (e-POS – electronic Point of Sale) में राशन की बिक्री दर्ज होती है। इस रिकॉर्ड और असली स्टॉक में बड़ा अंतर निकला। दुकान कोड 2601055 में ई-पॉस पर 14,070 किलो गेहूं दर्ज था। मौके पर सिर्फ 300 किलो मिला। चावल का रिकॉर्ड 3,406 किलो था, लेकिन 100 किलो ही मिला।
दुकान कोड 2601065 में रिकॉर्ड के मुताबिक 20,757 किलो गेहूं होना था। मौके पर 400 किलो मिला। चावल 4,919 किलो दर्ज था, जबकि 200 किलो ही मिला। फर्क हजारों किलो का था।
एक करोड़ का घोटाला: कितना किस दुकान में
दुकान कोड 2601055 में 33 लाख 17 हजार 161 रुपए की अनियमितता मिली। यह विक्रेता हर्ष तिवारी के स्तर पर पाई गई। दुकान कोड 2601065 में 70 लाख 82 हजार 690 रुपए की अनियमितता सामने आई। यह प्रकाश तिवारी के स्तर पर बताई गई है।
दोनों का कुल योग 1 करोड़ 3 लाख 99 हजार 851 रुपए है। यह रकम एक करोड़ रुपए से करीब चार लाख ज्यादा है। यह एक करोड़ का घोटाला दो दुकानों के आंकड़ों से बना है।
राशन घोटाला: रिकॉर्ड में पहले ही बंटा राशन
जांच में एक और अंतर सामने आया। अगस्त 2025 में अतिरिक्त खाद्यान्न आवंटन की मांग की गई थी। उसमें मई 2025 में ही जून से अगस्त तक का राशन बंटना दर्ज था। खाद्यान्न यानी गेहूं-चावल जैसा अनाज।
लेकिन जांच के दौरान करीब 300 परिवारों ने राशन नहीं मिलने की बात बताई। यानी रिकॉर्ड का वितरण और असली वितरण अलग निकला। रिकॉर्ड में राशन बंट चुका हो, तो परिवार किससे हक मांगें? आखिर यह राशन किसके लिए था?
एक साल बाद कार्रवाई के निर्देश
मामला उजागर होने के करीब एक साल बाद कार्रवाई के निर्देश आए। आदेश 28 सितंबर 2026 को जारी हुआ। इसे डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी सरोज सिंह परिहार ने जारी किया।
एफआईआर (FIR – First Information Report) पुलिस में दर्ज होने वाली पहली शिकायत होती है। आदेश में प्रबंधक और विक्रेता के खिलाफ एफआईआर कराने को कहा गया। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अमित साहू ने कोतवाली थाने में शिकायत दी है। फिलहाल एफआईआर दर्ज होना बाकी है। अब सवाल है कि एफआईआर कब दर्ज होगी?
पीडीएस दुकान निलंबित, अब कहां राशन?
प्रशासन ने दोनों पीडीएस दुकान को निलंबित कर दिया है। प्रभावित हितग्राहियों को अब दूसरी दुकानों से राशन मिलेगा। हितग्राही यानी राशन पाने वाले परिवार।
दुकान कोड 2601055 का नया ठिकाना
दुकान कोड 2601055 को जय भोले प्राथमिक उपभोक्ता भंडार से अटैच किया गया है। यह व्यवस्था वार्ड 4, 10 और 11 के लिए है।
दुकान कोड 2601065 का नया ठिकाना
दुकान कोड 2601065 को बालागंज प्राथमिक उपभोक्ता भंडार से जोड़ा गया है। यह व्यवस्था वार्ड 7, 8 और 9 के लिए है।
मध्य प्रदेश राशन घोटाला: आगे क्या?
मध्य प्रदेश राशन घोटाला के इस मामले में दो कदम बाकी हैं। पहला, पुलिस में एफआईआर दर्ज होना। दूसरा, रकम की वसूली। राशन की ऐसी अनियमितता को अंग्रेजी में ration scam कहते हैं।
भू-राजस्व की तरह होगी 1.04 करोड़ की वसूली
प्रशासन के मुताबिक दोनों आरोपियों से 1 करोड़ 3 लाख 99 हजार 851 रुपए की राशि वसूली जाएगी। यह वसूली भू-राजस्व की तरह होगी। भू-राजस्व यानी बकाया सरकारी रकम वसूलने का तरीका।
किन कानूनों में कार्रवाई प्रस्तावित
कार्रवाई लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश, 2015 के तहत प्रस्तावित है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत भी कार्रवाई प्रस्तावित है। आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय होगी।