बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी पर जारी किया स्थायी गिरफ्तारी वारंट, जानें क्या है पूरा मामला
ग्वालियर कोर्ट का आदेश क्या कहता है?
ग्वालियर जिला कोर्ट (Gwalior court) ने आरोपी की लगातार गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया। आदेश में कहा गया कि गिरफ्तारी तक मामले के सारे दस्तावेज सुरक्षित रहें। पुलिस की जब्त की हुई संपत्ति भी सुरक्षित रखी जाएगी।
लाल स्याही से दर्ज होगी फरारी की स्थिति
केस के टाइटल पेज (मुख्य पृष्ठ) पर लाल स्याही से नोट लिखा जाएगा। नोट में दिनेश लोधी (Dinesh Lodhi) के फरार होने की स्थिति साफ दर्ज होगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि रिकॉर्ड और जब्त सामग्री नष्ट न की जाए।
दिनेश लोधी कब-कब गैरहाजिर रहे?
रिकॉर्ड के मुताबिक दिनेश लोधी 22 जुलाई 2024 के बाद खुद कोर्ट नहीं पहुंचे। 23 अगस्त 2024 से 16 मार्च 2026 तक वे लगातार गैरहाजिर रहे। यह अवधि करीब 19 महीने की बनती है। इस दौरान सिर्फ हाजिरी माफी (पेशी से छूट) के आवेदन दिए गए। यानी आरोपी खुद नहीं आया, सिर्फ कागज पहुंचे।
17 अप्रैल 2026 को रद्द हुई जमानत
17 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने जमानत और बंधपत्र (बॉन्ड) निरस्त कर दिए। बंधपत्र यानी वह वादा, जिसमें आरोपी पेशी पर आने की बात मानता है। उसी दिन आरोपी के नाम वारंट भी निकला।
अब स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। यानी स्थायी गिरफ्तारी वारंट (permanent arrest warrant) जो आरोपी के गिरफ्तार होने तक लागू रहता है। ऐसे वारंट के बाद पुलिस को आरोपी की तलाश जारी रखनी होती है।
पुलिस ने कोर्ट को क्या बताया?
अदालत के सामने रघुवीर सिंह का बयान था। वे पुरानी छावनी थाने में प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) हैं। साथ में पुलिस की जांच रिपोर्ट भी थी। दोनों के आधार पर कोर्ट ने माना कि आरोपी पेशी से बच रहा है।
ज्यादातर पिछोर में रहता है आरोपी
पुलिस ने कोर्ट को यह भी बताया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ज्यादातर शिवपुरी के पिछोर क्षेत्र में रहता है। वह कभी-कभार ही ग्वालियर आता है। पुलिस ने उसे आवारा किस्म का भी बताया। लेकिन यह पहला वारंट नहीं है।
पांच महीने में दूसरा स्थायी वारंट
जानकारी के मुताबिक एट्रोसिटी कोर्ट भी स्थायी वारंट जारी कर चुकी है। एट्रोसिटी कोर्ट अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े अत्याचार के मामले सुनती है। यानी पांच महीने के भीतर यह दूसरी ऐसी कार्रवाई बताई जा रही है। ऐसे में दिनेश लोधी की कानूनी मुश्किलें दोहरी हो गई हैं।
करैरा में थार से टक्कर का आरोप
अब जरा पीछे चलते हैं। अप्रैल 2026 में करैरा में विधायक Pritam Lodhi के बेटे पर आरोप लगे थे। करैरा शिवपुरी जिले का क्षेत्र है। आरोप है कि दिनेश ने थार से पांच लोगों को टक्कर मारकर घायल किया। घटना के बाद सामने आए वीडियो और पुलिस कार्रवाई पर विवाद भी हुआ था।
पिछोर विधायक के बेटे पर तीन मोर्चे
अब तक की कार्रवाई को साथ रखकर देखिए। एट्रोसिटी कोर्ट से स्थायी वारंट की जानकारी सामने आई है। करैरा में थार से टक्कर के आरोप लगे हैं। और अब ग्वालियर की अदालत का यह आदेश आया है। तीनों घटनाक्रम के केंद्र में दिनेश लोधी हैं। यहां एक बात साफ रखनी जरूरी है। दिनेश लोधी पर अभी आरोप हैं। इस मामले में अदालत का फैसला आना बाकी है।
गिरफ्तारी के बाद क्या होगा केस?
अपर लोक अभियोजक (सरकारी वकील) आरपी पालीवाल के मुताबिक गवाहों के बयान नहीं होंगे। वजह यह है कि आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया गिरफ्तारी और पेशी के बाद ही होगी। यानी गवाही का काम तब तक रुका रहेगा। सवाल है कि क्या अब पुलिस दिनेश लोधी को गिरफ्तार कर पाएगी?
पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर
अब सबकी निगाह पुरानी छावनी थाना पुलिस पर है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही केस आगे चलेगा। तब तक रिकॉर्ड और जब्त सामग्री अदालत की हिफाजत में रहेगी।
विधायक प्रीतम लोधी भी दे चुके हैं विवादित बयान
इतना ही नहीं बेटे के अलावा पिता विधायक प्रीतम लोधी कई बार खुद विवादित बयान देकर सुर्खियों में रह चुके हैं। बेटे दिनेश लोधी के थार मामले में पूछताछ के बाद प्रीतम लोधी ने करैरा एसडीओपी पर आपत्तिजनक बयान दिए। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अधिकारी का घर गोबर से भरने की धमकी भी दी। हालांकि इस मामले में भाजपा ने 22 अप्रैल को नोटिस देकर तीन दिनों में स्पष्टीकरण मांगा था।
विरोधियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
20 अगस्त 2026 को खनियांधाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि विरोधी महिलाओं को भेजकर उन्हें दुष्कर्म के मामले में फंसाना चाहते हैं।
ब्राह्मणों और कथावाचकों पर विवादित टिप्पणी
17 अगस्त 2022 को एक कार्यक्रम में लोधी ने ब्राह्मणों और कथावाचकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विरोध के बाद उन्होंने लिखित माफी मांगी थी। भाजपा ने माफी को पर्याप्त नहीं माना और 19 अगस्त को छह साल के लिए निष्कासित किया। हालांकि मार्च 2023 में उनकी पार्टी में वापसी हो गई थी।