कारोबार संभालने में पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं, 9 साल में 26 गुना बढ़े महिला स्टार्टअप्स

Anjali Dwivedi | May 20, 2026, 15:31 IST
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मध्य प्रदेश के बिजनेस में पिंक रिवॉल्यूशन की गूंज है। पिछले 5 सालों में महिलाओं के स्टार्टअप्स पुरुषों के मुकाबले 15% ज्यादा टिके रहे। निवेश की कमी के बाद भी 9 सालों में महिला स्टार्टअप्स 26 गुना बढ़ गए हैं। जानिए महिला उद्यमिता की यह सफलता।

समझें क्या है पूरा मामला

  • प्रदेश के बिजनेस बाजार में महिलाओं की भागीदारी अब बहुत तेजी से बढ़ रही है।
  • बिजनेस संभालने और उसे लंबे समय तक चलाने में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं।
  • पिछले पांच सालों में महिला स्टार्टअप्स का सर्वाइवल रेट पुरुषों से बेहतर रहा है।
  • फंड और निवेश की कमी के बावजूद महिलाओं ने यह शानदार मुकाम हासिल किया।
  • साल 2017 के मुकाबले अब महिला स्टार्टअप्स की संख्या 26 गुना बढ़ चुकी है।

मध्य प्रदेश के बिजनेस ईकोसिस्टम में अब बदलाव की एक नई बयार बह रही है। इसे लोग पिंक रिवॉल्यूशन यानी गुलाबी क्रांति का नाम दे रहे हैं। यह बदलाव अब सिर्फ सरकारी आंकड़ों और कागजों तक सीमित नहीं है।



पुरुष प्रधान बाजार में महिलाओं ने अपनी एक बेहद मजबूत पकड़ बना ली है। पिछले पांच सालों का रिपोर्ट कार्ड इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। महिलाएं नए और अनोखे आइडिया के साथ मैदान में उतर रही हैं। वे अपने बिजनेस को बहुत ही शानदार तरीके से चला रही हैं।



पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का सर्वाइवल रेट बेहतर

आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं बिजनेस को बचाने में पुरुषों से आगे हैं। साल 2021 से 2025 के बीच दो हजार 769 महिला स्टार्टअप्स शुरू हुए थे। इनमें से केवल 2.93 फीसदी यानी 81 स्टार्टअप्स ही बंद हुए।



दूसरी तरफ इसी दौरान दो हजार 876 पुरुष स्टार्टअप्स भी शुरू हुए थे। पुरुषों के स्टार्टअप्स बंद होने की दर 3.48 फीसदी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि पुरुषों की 100 इकाइयां बंद हो गईं। यह अंतर साफ बताता है कि महिलाओं का सर्वाइवल रेट बेहतर है।



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बिना बड़े सपोर्ट के महिला उद्यमियों ने किया कमाल

महिला उद्यमियों की यह सफलता वाकई में तारीफ के काबिल मानी जाएगी। महिलाओं को बाजार में पैर जमाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। उन्हें पुरुषों की तुलना में बहुत कम निवेश और फंड मिल पाता है। इसके साथ ही उन्हें बिजनेस नेटवर्किंग में भी मुश्किलें आती हैं।



बाजार तक सीधी पहुंच बनाना भी उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण काम होता है। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी महिलाओं का प्रदर्शन बेमिसाल रहा है। उन्होंने हर बाधा को पार कर खुद को साबित किया है।



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नौ साल में 26 गुना बड़ा हुआ महिलाओं का कारवां

प्रदेश में महिला उद्यमिता का ग्राफ पिछले नौ साल में तेजी से बदला है। साल 2017 में महिला निदेशकों वाले सिर्फ 32 स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड थे। साल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 846 तक पहुंच गई। इस तरह नौ साल में महिला स्टार्टअप्स 26 गुना से ज्यादा बढ़े।



जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 3 हजार 368 महिला स्टार्टअप्स दर्ज हुए। इनमें कम से कम एक महिला डायरेक्टर का होना जरूरी है। साल 2026 के पहले महीने में ही 121 नए स्टार्टअप्स (महिला सशक्तिकरण) खुले हैं।



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निवेश के मोर्चे पर अब भी है बड़ा फासला

महिलाओं के स्टार्टअप्स भले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत निवेश के मामले में वे अभी भी काफी पीछे हैं। वैकल्पिक निवेश निधियों से पांच साल में सिर्फ चार स्टार्टअप्स को मदद मिली। इन चार स्टार्टअप्स को करीब 17.23 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल सकी।



साल 2024 में एक स्टार्टअप को अकेले 9.99 करोड़ रुपए मिले। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम ने भी थोड़ी बहुत मदद की है। इसके तहत 66 महिला स्टार्टअप्स को फंड दिया गया है।



चुनिंदा हाथों तक ही सीमित है बिजनेस का फंड

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड से महिलाओं को 10.32 करोड़ रुपए मिले। यह राशि साल 2021 से 2025 के बीच मंजूर की गई थी। सबसे ज्यादा फायदा साल 2022 में कुल 20 स्टार्टअप्स को मिला था। इसके बाद फंड की संख्या और राशि में उतार-चढ़ाव आता रहा।



यह साफ दिखाता है कि महिलाओं की सफलता का ग्राफ ऊपर गया है। इसके बावजूद बिजनेस फंड आज भी कुछ चुनिंदा हाथों तक सीमित है। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और बड़े सपोर्ट की जरूरत है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में चल रहे पिंक रिवॉल्यूशन का मुख्य कारण क्या है?
    प्रदेश के बिजनेस सेक्टर में पिंक रिवॉल्यूशन का मुख्य कारण महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता, इनोवेटिव बिजनेस आइडिया और मजबूत मैनेजमेंट स्किल्स हैं। पिछले नौ सालों में महिला डायरेक्टर वाले स्टार्टअप्स की संख्या में 26 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  2. महिला स्टार्टअप्स का सर्वाइवल रेट पुरुषों से बेहतर क्यों है?
    साल 2021 से 2025 के बीच शुरू हुए महिला स्टार्टअप्स के बंद होने की दर सिर्फ 2.93% रही है, जबकि पुरुषों के स्टार्टअप्स के बंद होने की दर 3.48% दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण यह है कि महिला उद्यमी वित्तीय अनुशासन, जोखिम प्रबंधन और संसाधनों के सही इस्तेमाल में अधिक सतर्क रहती हैं।

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