कौन हैं नर्मदापुरम की शिवानी शर्मा? जिनकी प्रेरणादायक कहानी का पीएम मोदी ने मन की बात में किया जिक्र
कौन हैं नर्मदापुरम की शिवानी शर्मा?
दरअसल शिवानी शर्मा (बिलाश टांटी शर्मा) मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी ब्लॉक स्थित खापा खुर्द गांव की रहने वाली थीं। वे एक आम परिवार की बेटी थीं, लेकिन आज उनके नाम की गूंज पूरे देश में है। हाल ही में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में वे बहुत बुरी तरह घायल हो गई थीं। उनके सिर में काफी गहरी चोट आई थी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए भोपाल स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सिर की चोट बहुत ज्यादा गंभीर थी। आखिर में डॉक्टरों को उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा।
गम के बीच परिवार का वो फैसला
जब किसी हंसते-खेलते घर का सदस्य अचानक इस दुनिया को छोड़ जाए, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। शिवानी के परिवार के साथ भी यही हुआ। इस मुश्किल घड़ी में भी परिजनों ने आंसू पोंछते हुए ऐसा फैसला किया, जिसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए।
परिवार ने तय किया कि वे शिवानी के अंग दान (Organ Donation) करेंगे। इस एक फैसले से तीन जरूरतमंद और गंभीर रूप से बीमार लोगों को नई जिंदगी का तोहफा मिल गया। शिवानी भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन वे तीन लोगों की सांसों में आज भी जिंदा हैं।
पुलिस ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब शिवानी की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव खापाखुर्द पहुंची, तो पूरा गांव अपनी इस लाडली के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। वहां हर आंख नम थी, लेकिन साथ ही हर किसी के चेहरे पर इस महादान को लेकर एक गर्व का भाव भी था।
मध्य प्रदेश पुलिस ने गांव में शिवानी को बाकायदा गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honor) देकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी की सराहना
शिवानी के परिवार की इस मानवीय सोच पर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह बेहद भावुक और दुर्लभ पल है, जब एम्स भोपाल में अपने किसी प्रियजन के अंगदान से कई परिवारों को नई उम्मीद मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंगदान सिर्फ अंगों का दान नहीं होता, बल्कि यह किसी के बुझते हुए घर में उम्मीद का दीया जलाने जैसा है। यह कदम उस सोच को नमन करता है, जो अपने खुद के भारी दुख को दूसरे परिवारों की खुशियों में बदल देती है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के लोगों से अपील की कि वे भी अंगदान के इस अभियान से जुड़ें ताकि और भी जिंदगियां बचाई जा सकें।
पीएम मोदी ने की वोकल फॉर लोकल की अपील
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात (मन की बात का 139 वां कार्यक्रम) में लोगों से अपील की कि त्योहारों पर खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर हम अपने परिवार और करीबियों के लिए कई चीजें खरीदते हैं। इस बार खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के उत्पाद जरूर खरीदें। इससे उनका हौसला बढ़ेगा और उन्हें अपने काम के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि वोकल फॉर लोकल अभियान जितना आगे बढ़ेगा, आत्मनिर्भर भारत का सपना उतनी ही तेजी से पूरा होगा।
एक दिन में 28 करोड़ रुपए से ज्यादा के खादी उत्पाद बिके
मन की बात के 139वें कार्यक्रम (Mann Ki Baat 139th episode) में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बात हो और खादी का जिक्र न हो, ऐसा नहीं हो सकता। इस बार गांधी जयंती पर एक ही दिन में खादी ग्रामोद्योग के 28 करोड़ रुपए से ज्यादा के उत्पाद बिके। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ करोड़ रुपए ज्यादा है। उन्होंने कहा कि खादी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इसका फायदा उन लोगों को भी मिल रहा है, जो अपनी मेहनत और हुनर से खादी, हैंडीक्राफ्ट और दूसरी चीजें बनाते हैं।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को मिला जापान का अवॉर्ड
पीएम मोदी ने Mann Ki Baat में महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यहां आदिवासी समुदाय अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर खास ध्यान दे रहे हैं। 'शबरी नेचुरल्स' के जरिए शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में बेचे जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की झलक देखने को मिलती है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित 'गुड डिजाइन अवॉर्ड' मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि युवा इस क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं। कर्नाटक का 'बैंबू' स्टार्टअप बांस और खेती से निकलने वाले अवशेषों से पैकेजिंग का सामान बना रहा है।
FAQ
1. पीएम मोदी ने मन की बात में शिवानी शर्मा का जिक्र क्यों किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर को अपने मन की बात के 139वें कार्यक्रम में शिवानी शर्मा और उनके परिवार की सोच की तारीफ की। उन्होंने बताया कि कैसे सड़क हादसे में ब्रेन डेड होने के बाद परिवार ने अंगदान का फैसला लेकर मानवता की अनोखी मिसाल पेश की।