पुलिस बैंड आरक्षक भर्ती मामला पहुंचा हाईकोर्ट, DGP और ADGP को नोटिस, रिकॉर्ड तलब

Neel Tiwari | Aug 25, 2026, 16:57 IST
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मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्ती के 679 पदों पर विवाद बढ़ गया है। याचिका में साक्षात्कार में कम अभ्यर्थी बुलाने के आरोप है। नियम के तहत पद के तीन गुना अभ्यर्थियों को ई एडमिट कार्ड जारी होना था। हाईकोर्ट ने इस भर्ती का पूरा रिकार्ड तलब कर लिया है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • पुलिस बैंड भर्ती में 679 पदों के लिए परीक्षा हुई थी।
  • नियम अनुसार इंटरव्यू के लिए 2037 उम्मीदवार बुलने थे।
  • पुलिस विभाग ने 1271 उम्मीदवार ही बुलाए।
  • कटऑफ और वर्गवार जानकारी सार्वजनिक नहीं करने पर भी सवाल हैं।
  • हाईकोर्ट ने तलब किया भर्ती का पूरा रिकॉर्ड।

मध्य प्रदेश पुलिस बैंड आरक्षक भर्ती का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई 25 अगस्त को जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच में हुई। याचिका रंजीत सिंह ठाकुर और पवन पुट्टा ने दायर की। दोनों अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने उनका पक्ष रखा।



हाईकोर्ट ने तीनों प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए भर्ती से जुड़ा हुआ पूरा रिकार्ड तलब कर लिया है। जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया। अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।



679 पदों की भर्ती से शुरू हुआ विवाद

पुलिस विभाग ने बैंड आरक्षक के 679 पद निकाले थे।।भर्ती अलग-अलग वर्गों और रिक्तियों के आधार पर होनी थी। इस सीधी भर्ती में कौशल परीक्षा यानी स्किल टेस्ट के आधार पर अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करना था। और उसके बाद इंटरव्यू होने थे। याचिकाकर्ताओं ने स्किल टेस्ट भी पास किया है। यह परीक्षा लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में आयोजित हुई थी। विभाग द्वारा परीक्षा मूल्यांकन की वीडियोग्राफी भी की गई है।



2037 उम्मीदवार बुलाने थे और बुलवाए 1271

इस भर्ती के नियम 8(B)(स) के अनुसार पदों से तीन गुना उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने थे। 679 पदों का तीन गुना आंकड़ा 2037 होता है। लेकिन 12 अगस्त को परीक्षा परिणाम घोषित हुआ और इंटरव्यू के लिए 1271 अभ्यर्थियों को ही बुलाया गया। जबकि इसके पहले पांच अगस्त के विभागीय पत्र में करीब 2037 उम्मीदवार बुलाने की बात की गई थी। इस तरह 766 उम्मीदवार कम बुलवाए गए।



याचिकाकर्ताओं ने इसी अंतर को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनके अनुसार यदि नियम अनुसार इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया जाता तो उसमें याचिकाकर्ताओं का भी नाम होता।



इसके साथ ही याचिका में आरोप है कि चयन का आधार साफ नहीं किया गया। ट्रेडवार कटऑफ सार्वजनिक नहीं की गई। वर्गवार कटऑफ भी जारी नहीं किया गया। पात्र और अपात्र उम्मीदवारों की सूची भी नहीं दिए जाने के आरोप पुलिस विभाग पर लगाए गए हैं।



18 अगस्त को पुलिस मुख्यालय में दिया आवेदन

याचिकाकर्ताओं ने 18 अगस्त को पुलिस मुख्यालय में आवेदन दिया। उन्होंने अपनी आपत्तियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। लेकिन आवेदन पर कोई समाधान नहीं हुआ। इसी दौरान 20 से 23 अगस्त तक साक्षात्कार हुए। याचिका में इस स्थिति को लेकर चिंता जताई गई। अभ्यर्थियों ने अंतिम चयन रोकने की मांग भी रखी।



भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का हवाला दिया। चयन प्रक्रिया को मनमाना बताया और सरकारी नौकरी में पारदर्शिता जरूरी बताई है। याचिका में नियम बीच में बदलने पर भी सवाल है। अभ्यर्थियों का दावा है कि भर्ती नियम नहीं बदले जा सकते। उन्होंने पूरा भर्ती रिकॉर्ड कोर्ट में रखने की मांग की। कटऑफ और चयन का आधार बताने की मांग भी है।



भर्ती से जुड़ा रिकॉर्ड तलब, DGP, ADGP को नोटिस

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान के तर्कों से सहमत होने के बाद कोर्ट ने डीजीपी और इस भर्ती की सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन एडीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने भर्ती से जुड़ा पूरा रिकार्ड तलब किया है। अब DGP और ADGP को भर्ती से जुड़ा हुआ पूरा रिकॉर्ड और अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखना होगा।



कोर्ट इस रिकॉर्ड के जरिए यह जांचेगा की किस आधार पर कट ऑफ जारी किया गया है और किस आधार पर साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को बुलवाया गया।इसके बाद अदालत मामले की आगे की दिशा तय करेगी। फिलहाल चयन रद्द करने यह साक्षात्कार रोकने का आदेश नहीं आया है। लेकिन भर्ती से जुड़ा हुआ पूरा रिकार्ड तलब करने के कारण अपने आप यह भर्ती प्रक्रिया थम गई है। अगली सुनवाई में मामले की तस्वीर साफ हो सकती है।



इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस भर्ती की सभी नियुक्तियां कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी



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