पुलिस कांस्टेबल बैंड भर्ती विवाद में हाईकोर्ट इंदौर ने कहा गड़बड़ी के सबूत नहीं, याचिका खारिज
INDORE. मध्य प्रदेश में लंबे समय बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना की प्रक्रिया की गई। अप्रैल 2026 में इसके लिए 679 पदों की भर्ती निकाली गई। इसमें तीन स्टेज होते हैं। अगस्त में दूसरी स्टेज का रिजल्ट जारी कर इंटरव्यू की प्रकिया शुरू करने की घोषणा हुई। लेकिन भर्ती में गड़बड़ी के आरोप के साथ इंदौर और जबलपुर हाईकोर्ट में याचिकाएं लगी।
इसके बाद इंटरव्यू पर रोक लग गई। वहीं इसमें से अब इंदौर हाईकोर्ट में लगी तीन याचिकाएं खारिज हो गई है। इसके बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया की एक बाधा दूर हो गई है। हालांकि अभी जबलपुर में भी याचिका चल रही है। इसके निराकरण के बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने यह कहा था
हाईकोर्ट इंदौर में तीन याचिकाएं लगी थी। इसमें दो उम्मीदवार इंटरव्यू तीसरे चरण में चयनित नहीं हुए थे और एक उम्मीदवार पहले चरण में बाहर हो गए थे। इनके आरोप था कि चयन में भेदभाव हुआ है। पद के अनुपात में तीन गुना उम्मीदवार को इंटरव्यू में बुलाना था लेकिन नहीं बुलाया गया। परीक्षा में पारदर्शिता नहीं रखी गई और मनमानी और गड़बड़ी की गई।
इस पर पुलिस मुख्यालय ने यह तर्क रखे
इस पर पुलिस मुख्यालय और शासन की ओर से तर्क दिए गए। इसमें बताया गया कि कुल 679 पद में से अनारक्षित के 184, ओबीसी के 95, ईडब्ल्यूएस के 68, एसटी के 36 और एससी के 106 पद थे। इसमें तीन गुना उम्मीदवार को इंटरव्यू में बुलाने का नियम है। इसमें अनारक्षित के 184 पदों पर तीन गुना 552 उम्मीदवार और एससी के 106 पदों पर तीन गुना 325 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।
ओबीसी में 95 पदों के लिए केवल 207, एसटी कैटेगरी में 137 और ईडब्ल्यूएस में 68 पद पर केवल 26 को बुलाया गया। इसका कारण है कि योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। ओबीसी, अनारक्षित और ईडब्ल्यूएस को वादन टेस्ट यानी दूसरे चरण में 75 में से 50 फीसदी और एसटी व एससी पद के लिए पासिंग क्राइटेरिया 40 फीसदी अंक का था। यह उम्मीदवार नहीं मिले। इसलिए उम्मदीवार तीन गुना नहीं बुलाए।
बाडी वार्न कैमरे थे, आईपीएस कमेटी प्रमुख
यह भी तर्क दिए गए कि टेस्ट के दौरान कमेटी के सदस्यों के पास बाडी वार्न कैमरे थे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई। साथ ही कुल 6 कमेटी थी जिसमें सभी के अध्यक्ष आईपीएस अधिकारी थे। वहीं दूसरे नंबर पर एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी थे और बाकी एक्सपर्ट थे।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं
यह तर्क सुनने के बाद जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की बैंच ने तीनों लिंकड याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता गड़बड़ी के कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। इस तरह के सबूत पेश करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता की होती है। मुख्य आधार था इंटरव्य् में तीन गुना उम्मीदवार बुलाने का। इसमें तीन याचिकाकर्ता जिस कैटेगरी में थे वहां तीन गुना बुलाए गए हैं। ऐसे में उनका मुख्य आधार ही गलत साबित होता है। इसलिए याचिकाएं खारिज की जाती है।
चयन की यह प्रक्रिया तय की गई
चयन के लिए भर्ती विज्ञापन में था कि तीन स्तर से होगी। पहले स्किल टेस्ट- यह केवल स्क्रीनिंग के लिए होगा। इसमें उम्मीदवार का उनके पसंद के वाद्य यंत्र का टेस्ट लिया जाएगा। यह केवल स्क्रूटनी के लिए होगा। इसके अंक नहीं होंगे।
बैंड वादन टेस्ट- यह दूसरा चरण था। यह 60 अंक का था। साथ ही 15 अंक बोनस के थे, यदि वह तीन अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाकर बताता है तो हर एक के 5-5 अंक मिलेंगे। इस तरह यह कुल 75 अंक का था।
अनारक्षित, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस को 50 फीसदी और एसटी व एससी वर्ग को 40 फीसदी न्यूनतम अंक की जरूरत होगी। तीसरा चरण इंटरव्य- इस चरण में 25 अंक होंगे। इसमें पद के तीन गुना उम्मीदवार को बुलाया जाएगा। इसके बाद मेरिट सूची कुल 100 अंक (वादन टेस्ट और इंटरव्यू) से जारी होगी।
कहां से उठा था विवाद
विवाद की शुरूआत अगस्त माह में वादन टेस्ट (दूसरे चरण) के रिजल्ट के बाद शुरू हुई। इसमें किसी के भी अंक नहीं बताए गए और केवल इंटरव्यू के लिए पात्र उम्मीदवारों की सूची जारी हुई। वह भी केवल 1271 उम्मीदवारों की, जो पद के करीब दो गुना भर थे। जबकि नियम था कि पद के तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाना है, यानी दो हजार से ज्यादा को बुलाना था, लेकिन करीब 700 उम्मीदवार कम बुलाए गए।
हाईकोर्ट की याचिका में क्या कहा गया
हाईकोर्ट इंदौर में दायर याचिका में याचिकाकर्ता नीलेश सिंह और विपिन बैरवा व योगेंद्र पंवार ने मप्र शासन और पुलिस मुख्यालय को पक्षकार बनाया। इसमें आरोप लगाए कि इस पूरी भर्ती से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और मनमानी की बू आ रही है। किसी भी चरण में परादर्शिता नहीं रखी गई, चाहे वह स्किल टेस्ट हो या वादन टेस्ट। पुलिस मुख्यालय भर्ती अधिकारियों ने मनमर्जी चलाई और अपने हिसाब से नियमों को तोड़ा-मरोड़ा और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बैकडोर इंट्री के दरवाजे खोले।
ये भी पढ़े...
एमपी पुलिस भर्ती: 7500 कॉन्स्टेबल पदों के लिए आज से आवेदन शुरू, जानें पूरी डिटेल
एमपी पुलिस भर्ती, ESB जल्द शुरू करेगा 9662 पदों पर आवेदन की प्रक्रिया
MP पुलिस के 7 अफसरों को मिला IPS कैडर, मिला 2016 बैच
एमपी पुलिस के स्टार अफसर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर? DGP की गाइडलाइन से पड़ेगा फर्क?