पुलिस ड्राइवर फिरोज खान की कंपनियों का यह नेटवर्क, इन्हीं से खड़ी की 68 करोड़ की संपत्तियां
ड्राइवर फिरोज खान पर छापा
बता दें कि इंदौर व उज्जैन लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को पुलिस विभाग में ड्राइवर फिरोज खान (Firoz Khan) पर छापा मारा था। यह जांच अभी तक चल रही है और लगातार उसकी संपत्तियां मिल रही हैं। ड्राइवर के पास अभी तक 50 से अधिक अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिसकी कीमत 68 करोड़ के पार हो चुकी है।
इन संपत्तियों की खरीदी में अब इस बात की आशंका तेज है कि इसमें कई बड़े लोगों का पैसा लगा है। इस राशि को खपाने के लिए फिरोज खान ने अपने परिजनों के साथ ही करीबियों के नाम से विविध फर्में बनाईं। इसमें महिला मित्र रोशनी वर्मा, फिरोज खान के मित्र युवराज पंवार, मोहम्मद शाकिर, फिरोज की पत्नी हिना खान व अन्य शामिल हैं।
केवल दो फर्म ही रजिस्टर्ड
फिरोज खान ने एक और चालाकी की है। अभी तक सात फर्मों की जानकारी सामने आई है जो इस नेटवर्क में शामिल हैं। फिरोज ने इन कंपनियों को छिपाने के लिए प्राइवेट फर्म का स्वरूप रखा है जिससे इनकी जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत न हो। साथ ही इनका हिसाब सभी के सामने न आ सके। इन सात में से केवल दो ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड हैं। बाकी कंपनियां केवल कागजों पर संपत्ति खरीदी के लिए ही काम आ रही हैं। इनका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं है।
ये दो कंपनियां ही आरओसी में रजिस्टर्ड
आरओसी में रजिस्टर्ड दो ही कंपनियां हैं। इसमें स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया है और दूसरी ब्लैक हॉर्नेट कंपनी है। इसमें ब्लैक हॉर्नेट कंपनी का संपत्ति में लिंक नहीं है और यह आउटसोर्स देने वाली कंपनी है। स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया में डायरेक्टर फिरोज खान की पत्नी हिना खान, दोस्त युवराज पंवार (पिता रविकांत पंवार) व मोहम्मद शाकिर हैं। इसका ऑफिस इंदौर में अरण्य नगर स्कीम 78 में है। वहीं ब्लैक हॉर्नेट कंपनी में डायरेक्टर हिना खान के साथ ही जुबेर अहमद हैं।
इसके साथ ही ये पांच कंपनियां और हैं...
इसके साथ ही लोकायुक्त जांच में पांच और कंपनियां मिली हैं जो संपत्ति खरीदी-बिक्री से जुड़ी हैं। इसमें साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विसेज, महाराजा रियल एस्टेट और श्याम इन्फ्रा हैं।
90 करोड़ के सौदे में लिंक है श्याम इन्फ्रा
इसमें श्याम इन्फ्रा सबसे विवादित सौदे में लिप्त है। इसमें डायरेक्टर सुमित जिंदल हैं। इसी कंपनी ने मगरखेड़ा (इंदौर मल्हारगंज तहसील) की विवादित 45 बीघा जमीन ली है, जिसकी बाजार कीमत 90 करोड़ है। यह जमीन लोकायुक्त जांच में आ गई है। इस जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी कस्तूरीबाई (जमीन मालकिन, जिनका निधन हो चुका है) ने रविकांत पंवार के नाम पर की।
यह रविकांत पंवार और कोई नहीं बल्कि फिरोज खान की पत्नी हिना खान के साथ स्पार्कवेव कंपनी में डायरेक्टर युवराज के पिता हैं। वहीं खुद इस जमीन सौदे में हुई रजिस्ट्री पर फिरोज खान और युवराज पंवार गवाह के तौर पर मौजूद हैं। यानी यह सौदा भी फिरोज खान के नेटवर्क कंपनी से ही लिंक है।
इन कंपनियों ने इस तरह खरीदी जमीनें
देवास में राधागंज एरिया में दो प्लॉट मिले, यह साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर खरीदे गए। बैंक से प्राप्त जानकारी अनुसार, महाराजा रियल एस्टेट कंपनी के बैंक खाते में राशि मिली। महिला मित्र रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम से भी करोड़ों की जमीन मिली। इसमें साहिल ट्रेडिंग कंपनी जुड़ी।
इंदौर के लसुडिया मोरी, वार्ड नंबर 35 की जमीन स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्रा.लि. के नाम से क्रय किया जाना पाया गया है।
महिला मित्र के नाम पर भी कंपनियां
वहीं महिला मित्र रोशनी वर्मा के नाम पर भी कई संपत्तियां मिली हैं। कई जमीन के सौदे भी कराए गए हैं जो वर्मा के नाम से हैं। रोशनी वर्मा द्वारा भी रोशनी सेल्स एंड सर्विसेज नामक फर्म का संचालन किया जाना पाया गया है। रोशनी और फिरोज ने मिलकर जमीनों के सौदे किए हैं। आरोपी फिरोज खान द्वारा रियल एस्टेट में भी रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नामक फर्म के माध्यम से इन्वेस्टमेंट किया जाना पाया गया है।
इन कंपनियों में आखिर पैसा किनका लगा
लोकायुक्त की जांच में यह बड़ा एंगल है कि आखिर एक ड्राइवर के पास 68 करोड़ की संपत्ति खरीदने के लिए राशि कहां से आई। इन कंपनियों में पर्दे के पीछे आखिर किसकी ब्लैक मनी चल रही है। इसी के जरिए फिरोज खान ने विवादित प्लाट लिए, बैंक नीलामी में बोली लगवाई और जमीन खरीदी।
श्याम इन्फ्रा से जो नौ करोड़ का सौदा किया, इसमें तो दो माह में डेढ़-डेढ़ करोड़ के छह चेक देकर नौ करोड़ का भुगतान आनन-फानन में कर दिया। इस तरह तेजी से ये संपत्तियां खरीदी गईं। ये कंपनियां भी मुख्य तौर पर कोविड काल के दौरान और उसके बाद ही बनी हैं। यानी फिरोज कोविड के बाद ही जमीन के धंधे में आया है।
इसमें पूरी आशंका है कि फिरोज खान के पास दूसरों की ब्लैक मनी आई और फिर यह संपत्ति खरीदने में लगाई गई। इसके लिए तरीका निकाला गया, यह फर्म, कंपनी बनाने का। इसी में लंबी कमाई के कारण 17 महीने से फिरोज ने नौकरी पर जाना भी छोड़ दिया। आरा मशीन भी मां के नाम ले ली और पूरी तरह से धंधे में लग गया।