पॉलीहाउस बनाने के लिए बैंकों से लिया 7.80 करोड़ का लोन, कागजों पर बनाए, EOW में FIR
Indore. ईओडब्ल्यू इंदौर ने पॉलीहाउस बनाने के नाम पर बैंक से लिए गए 7.80 करोड़ के लोन घोटाले में केस दर्ज किया है। इसमें कंपनियों के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा खरगोन के तीन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
इन सभी को बनाया गया आरोपी
- मे. राज इको फार्म्स एवं मे. राज इको फार्म्स के भागीदार, राजेन्द्रसिंह पिता स्व. भरतसिंह तंवर, नितिन पिता सुभाषचन्द्र गांवशिंदे।
- सिरांश टेक्नो इंडिया प्रा.लि. के डायरेक्टर, सौरभ दुबे।
- मे. किसान एग्रो के भागीदार नरेन्द्र पिता शेरसिंह पंवार।
- ए.वी.आई. एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्रा.लि. एवं उसके डायरेक्टर, बृजपालसिंह चौधरी एवं डायरेक्टर, अविनाश पाटीदार।
- नारायणसिंह पिता मानसिंह तंवर ग्राम भिलगांव, खरगोन।
- के. के. सरवटे पिता नारायणलाल तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा खरगोन।
- शुभम सोहनी पिता यज्ञदत्त तत्कालीन ऋण प्रबंधक बैंक ऑफ बड़ौदा खरगोन।
- चन्द्रशेखर राठौड़ पिता सुरेशचन्द्र राठौड़ तत्कालीन बैंक अधिकारी व अन्य।
यह है मामला
ईओडब्ल्यू जांच में आया कि 33 किसानों के नाम से पॉलीहाउस निर्माण हेतु बैंक ऋण स्वीकृत कराया गया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत पॉलीहाउस निर्माण करने हेतु बैंक ऑफ बड़ौदा, खरगोन में ऋण स्वीकृति हेतु कुल 33 प्रकरण (राशि 7 करोड़ 80 लाख 85 हजार 000/-) प्रस्तुत किए गए थे। बैंक द्वारा प्राइवेट फर्मों एवं उनके भागीदारों को पॉलीहाउस का निर्माण किए बिना ही उक्त स्वीकृत लोन की राशि का भुगतान कर दिया गया।
फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराए
जांच में आया कि जैसे एवीआई एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को 05 पॉलीहाउस का निर्माण करना था, लेकिन दो पॉलीहाउस का निर्माण नहीं किया गया।
उनका कूटरचित कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर कुल 05 लोन प्रकरण में भुगतान प्राप्त किया गया। मेसर्स किसान एग्रो को 20 पॉलीहाउस का निर्माण करना था, उसने सभी के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर लोन ले लिया।
सिरांश टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड इंदौर को 08 पॉलीहाउस के निर्माण हेतु एजेंसी के रूप में तय किया गया था। इसने भी फर्जीवाड़ा किया। जांच में सभी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र प्रथम दृष्ट्या कूटरचित पाए गए हैं।
जिस दिन राशि मिली, उसी दिन एनओसी
जांच में पाया गया कि, कुल 33 पॉलीहाउस के लोन प्रकरणों में से 03 प्रकरणों में जिस दिनांक को लोन राशि का भुगतान हुआ है, उसी दिनांक का कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है।
वहीं 12 लोन प्रकरणों में जिस दिनांक को लोन राशि का भुगतान हुआ है, उस दिनांक से पहले का कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसी तरह 16 लोन प्रकरणों में लोन सैंक्शन के दिनांक से पहले का कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र पाया गया है।
इन 33 किसानों को विश्वास में लेकर उनसे भूमि के दस्तावेज प्राप्त करके, उनके नाम पर ऋण स्वीकृत कराकर प्राइवेट फर्म को भुगतान किया गया। इस प्रकार किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत
इस पूरे कांड में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत रही है। कुछ की जमीन तो बैंक में बंधक थी, फिर भी बैंक की सहमति और एनओसी के बिना फिर से बंधक रख कैश क्रेडिट ली गई। तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के. के. सरवटे द्वारा 1.9 करोड़ की कैश क्रेडिट ऋण स्वीकृत किया गया। नारायणसिंह, राजेन्द्रसिंह तंवर, नितिन गांवशिंदे, मुख्य शाखा प्रबंधक के. के. सरवटे द्वारा आपस में संगनमत होकर फर्जीवाड़ा किया गया।
लोकायुक्त इंदौर ने एनवीडीए उपयंत्री को किया ट्रैप
उधर लोकायुक्त इंदौर ने बुधवार को ट्रैप की कार्रवाई करते हुए उप यंत्री को रंगे हाथ पकड़ा। फरियादी लखन राठौर निवासी ग्राम धूलवाडा तहसील सनावद जिला खरगोन की शिकायत पर कार्रवाई हुई।
टीम ने अशोक गौतम उम्र 61 वर्ष पद उपयंत्री, नर्मदा घाटी पुनासा जिला खण्डवा कार्यालय-कार्यपालन यंत्री को पकड़ा गया। रिश्वत की 14 हजार राशि जब्त की गई। शिकायतकर्ता राठौर ने बताया कि आवेदक ठेकेदार है और उन्हें एनवीडीए पुनासा में चौकीदार व जनरेटर कक्ष बनाने का ठेका 2024 में लिया था।
काम का भुगतान 13 लाख मिल गया था। बाकी राशि व जमा सिक्योरिटी डिपाजिट वापस करने के लिए अशोक गौतम ने 55 हजार की रिश्वत मांगी। शिकायत के बाद लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने टीम बनाई और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा।
टीम में निरीक्षक सचिन पटेरिया, प्रधान आरक्षक विजय कुमार, प्रधान आरक्षक विवेक मिश्रा, आरक्षक कमलेश परिहार आरक्षक शैलेन्द्र सिंह बघेल, आरक्षक कृष्णा अहिरवार शामिल थे।
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