बिजली कटौती का नया नियम, चार घंटे से ज्यादा रही गुल तो मिलेगा मुआवजा
समझें क्या है पूरा मामला...
- लंबे समय तक बिजली कटने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने का अधिकार है।
- नए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के आने से मुआवजा आपके बिल में जुड़ जाएगा।
- बिना किसी पूर्व सूचना के 4 घंटे से ज्यादा बिजली कटने पर शिकायत कर सकते हैं।
- ट्रांसफार्मर जलने पर बिजली कंपनी को 12 घंटे में सप्लाई शुरू करनी होगी।
- स्मार्ट मीटर से बिजली कटने और आने का बिल्कुल सही समय पता चल सकेगा।
मध्यप्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है।
अब खुद मिलेगा मुआवजा
सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है।
अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल
अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।
इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा।
बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम?
विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा।
| खराबी का प्रकार | शहर के लिए समय सीमा | ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा |
| सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) | 1 से 3 घंटे | 4 घंटे |
| ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना | 12 घंटे | 12 घंटे |
| बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना | 2 घंटे | 4 घंटे |
बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान
- बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
- शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें।
- बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें।
- अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता,उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा।
नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।
FAQ
- अगर बिजली कंपनी तय समय में बिजली ठीक नहीं करती, तो मुझे कितने रुपए का मुआवजा मिलेगा?
मौजूदा नियमों के अनुसार अगर बिजली कंपनियां तय सीमा के बाद भी बिजली सप्लाई शुरू नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें उपभोक्ता को प्रति घंटा 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा।
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