आदिवासी ताले में फंसी सत्ता की चाबी, गोंडवाना-जयस का पेंच, 2018 में एकतरफा जीतने वाली कांग्रेस की 20 तो BJP की 11 सीटें उलझी
अरुण तिवारी, BHOPAL. प्रदेश की आदिवासी सीटें सत्ता की चाबी मानी जाती हैं। पिछले दो दशकों में जिस राजनीतिक दल ने ये सीटें जीती हैं वही सत्ता पर काबिज हुआ है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यहां पर एकतरफा जीत हासिल की थी और सत्ता पर कांग्रेस काबिज भी हुई। ये अलग बात है कि वो सरकार सिर्फ 15 महीने ही चल सकी। लेकिन इस बार कांग्रेस और बीजेपी मुश्किल में हैं। खासतौर पर कांग्रेस को ज्यादा दिक्कत है। इस बार आदिवासी ताले में सत्ता की चाबी फंस गई है। ये पेंच लगाया है गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस ने। यदि चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ तो आदिवासियों की सरपरस्ती का दावा कर रहे ये दोनों दल किंग मेकर की भूमिका में आ सकते हैं। आइए आपको बताते हैं चुनाव में फंसी आदिवासी राजनीति की पूरी पड़ताल क्या कहती है।
चुनाव में फंसी 31 आदिवासी सीटें
प्रदेश में 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इन 47 में से 31 सीटों पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस ने सीधी नजर डाल दी है। इस बार गोंगपा और बीएसपी का गठबंधन हुआ है। जिन आदिवासी सीटों पर गोंगपा ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं वहां पर बीएसपी प्रत्याशी नहीं है। इन 31 सीटों में साल 2018 के चुनाव में 19 कांग्रेस ने और 11 बीजेपी ने जीती थीं। एक पर निर्दलीय का कब्जा हुआ था। अब निर्दलीय विधायक कांग्रेस के साथ हैं। इस तरह कांग्रेस की 20 सीटें और बीजेपी की 19 सीटों पर संकट गहरा रहा है।
ये है प्रदेश का आदिवासी गणित
आदिवासियों को साधने में बीजेपी और कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। प्रदेश की शिवराज सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार तक ने आदिवासियों को लुभाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पिछले पांच सालों में कई बार आदिवासी इलाकों में आ चुके हैं। उनके साथ खाना भी खा चुके हैं। वहीं कांग्रेस में राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी तक आदिवासी इलाकों की खाक छान चुकी हैं। लेकिन इस बार जयस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आदिवासी चौंसर पर अपने मोहरे बैठा कर बीजेपी-कांग्रेस के दांव को नाकाम करने की तैयारी की है।
दो दशक का आदिवासी समीकरण
साल 2003 : कुल सीट 41, बीजेपी - 38, कांग्रेस - 01
साल 2008 : कुल सीट 47, बीजेपी - 29, कांग्रेस - 17
साल 2013 : कुल सीट 47, बीजेपी - 31, कांग्रेस - 15
साल 2018 : कुल सीट 47, बीजेपी - 16, कांग्रेस - 30
इन आदिवासी सीटों पर जयस और गोंडवाना ने उतारे उम्मीदवार
चितरंगीः बीजेपी- राधा सिंह, कांग्रेस- माणिक सिंह, गोंगपा- शैलेंद्र सिंह- जीती बीजेपी
धौहनीः बीजेपी- कुंवर सिंह टेकाम, कांग्रेस- कमलेश सिंह, गोंगपा- लाल देव सिंह कुशराम- जीती बीजेपी
ब्यौहारीः बीजेपी- शरद कोल, कांग्रेस- रामलखन सिंह, गोंगपा- पुरुषोत्तम सिंह- जीती बीजेपी
जैतपुरः बीजेपी- जयसिंह मरावी, कांग्रेस- उमा धुर्वे, गोंगपा- सुंदर सिंह मरावी- जीती बीजेपी
पुष्पराजगढ़ः बीजेपी- हीरा सिंह, कांग्रेस- फुंदेलाल मार्को, गोंगपा- लल्लन सिंह परस्ते,जयस- अनमोल परते- जीती कांग्रेस
मानपुरः बीजेपी- मीना सिंह, कांग्रेस- तिलकराज सिंह, गोंगपा- राधेश्याम काकोडिया- जीती बीजेपी
बड़वाहः बीजेपी- सचिन बिरला, कांग्रेस- नरेंद्र पटेल, गोंगपा- अरविंद टेकाम, जयस- लखन आरवे- जीती कांग्रेस
डिंडोरीः बीजेपी- पंकज टेकाम, कांग्रेस- ओमकार सिंह मरकाम, गोंगपा- हरेंद्र सिंह मार्को- जीती कांग्रेस
बिछियाः बीजेपी- विजय आनंद मरावी, कांग्रेस- नारायण सिंह पट्टा, गोंगपा- कमलेश टेकाम, जयस- सुनील उइके- जीती कांग्रेस
निवासः बीजेपी- फग्गन सिंह कुलस्ते, कांग्रेस- चैन सिंह, गोंगपा- देवेंद्र मरावी- जीती कांग्रेस
बैहरः बीजेपी- भगत सिंह नेताम, कांग्रेस- संजय उइके, गोंगपा- एफएस कमलेश- जीती कांग्रेस
लखनादौनः बीजेपी- विजय उइके, कांग्रेस- योगेंद्र सिंह, गोंगपा- संतर वलारी- जीती कांग्रेस
अमरवाड़ाः बीजेपी- मोनिका बट्टी, कांग्रेस- कमलेश प्रताप शाह, गोंगपा- देवरावेन भलावी- जीती कांग्रेस
घोड़ाडोंगरीः बीजेपी- गंगाबाई उइके, कांग्रेस- राहुल उइके, जयस- स्मिता राजा- जीती कांग्रेस
भैंसदेहीः बीजेपी- महेंद्र चौहान, कांग्रेस- धरमू सिंह सिरसाम, जयस- संदीप धुर्वे- जीती कांग्रेस
शहपुराः बीजेपी- ओमप्रकाश धुर्वे, कांग्रेस- भूपेंद्र मरावी, गोंगपा- अमान सिंह पोर्ते, जयस- संजीव मरावी- जीती कांग्रेस
टिमरनीः बीजेपी- संजय शाह, कांग्रेस- अभिजीत शाह, गोंगपा- नंदकिशोर बैठे, जयस- जयकुमार उइके, जयस दूसरा गुट- रमेश मस्कोले- जीती बीजेपी
बागलीः बीजेपी- मुरली भंवरा, कांग्रेस- गोपाल भोसले, जयस- सूरज डावर- जीती बीजेपी
हरसूदः बीजेपी- विजय शाह, कांग्रेस- सुखराम साल्वे, जयस- महेंद्र बढ़ाई- जीती बीजेपी
नेपानगरः बीजेपी- मंजू दादू, कांग्रेस- गेंदूबाई चौहान, जयस- नंदकिशोर डोंडी, जयस 2- बिलोर सिंह जमरा- जीती बीजेपी
भीकनगांवः बीजेपी- नंदा ब्राह्मने, कांग्रेस- झूमा सोलंकी, जयस- सुरेश मुजाल्दे, जयस 2- मोहन पटेल- जीती कांग्रेस
भगवानपुराः बीजेपी- चंद्र सिंह बामकले, कांग्रेस- केदार डाबर, जयस- मोहन किराड़े, जयस 2- कालू खेड़े- जीता निर्दलीय
राजपुरः बीजेपी- अंतर सिंह पटेल, कांग्रेस- बाला बच्चन,जयस- सुनील सोलंकी- जीती कांग्रेस
अलीराजपुरः बीजेपी- नागर सिंह चौहान, कांग्रेस- मुकेश रावत, जयस- नवल मंडलोई- जीती कांग्रेस
जोबटः बीजेपी- विशाल रावत, कांग्रेस- सेना पटेल, जयस- रिंकू बाला, डावर- जीती बीजेपी
झाबुआः बीजेपी- भानू भूरिया, कांग्रेस- विक्रांत भूरिया, जयस- अमर सिंह- जीती कांग्रेस
थांदलाः बीजेपी- कलसिंह भाबर, कांग्रेस- वीर सिंह भूरिया, जयस- माजू सिंह डामोर- जीती कांग्रेस
पेटलावदः बीजेपी- निर्मला भूरिया, कांग्रेस- वाल सिंह मेड़ा, जयस- बालू सिंह, जयस 2- प्रेम भूरिया- जीती कांग्रेस
सरदारपुरः बीजेपी- वेलसिंह भूरिया, कांग्रेस- प्रताप ग्रेवाल, जयस- राजेंद्र गामड़- जीती कांग्रेस
धरमपुरीः बीजेपी- कालू सिंह ठाकुर, कांग्रेस- पांचीलाल मेड़ा, जयस- भानु गिरवाल- जीती कांग्रेस
रतलाम ग्रामीणः बीजेपी- मथुरालाल डाबर, कांग्रेस- लक्ष्मण डिंडोरे, जयस- अभय ओहरी- जीती बीजेपी
बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार
इस खतरे को भांपते हुए आदिवासी सीटों को लेकर बीजेपी सरकार ने जमीनी तौर पर बहुत काम किया है। आदिवासी बेल्ट को साधने के लिए बीजेपी के दो रणनीतिकार पर्दे के पीछे से महीनों से काम कर रहे हैं। युवा आयोग के अध्यक्ष निशांत खरे और सीएम के उपसचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम ने आदिवासियों के अंदर तक पैठ जमाई है। निशांत खरे महीनों से इस काम में लगे हुए हैं। युवा आयोग के अध्यक्ष तौर पर युवाओं से लगातार संपर्क और संवाद का सिलसिला लगातार जारी रहा है। आयोग के जरिए इन युवाओं को फायदा पहुंचाने की स्कीम भी तैयार की गईं। निशांत खरे और लक्ष्मण सिंह मरकाम ने आदिवासियों के कोर ईश्यु पर काम किया और उनकी समस्याओं को समझकर सरकारी स्तर पर उनको दूर करने की भी कोशिश की। माना ये भी जाता है कि पेसा एक्ट लागू कराने में इनकी प्रमुख भूमिका रही है।