एमपी सरकार ने लिया 3600 करोड़ का लोन, 2056 तक चुकाना होगा कर्ज
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है।
- यह रकम सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से जुटाई गई है।
- कर्ज को दो अलग-अलग किश्तों में बांटा गया है।
- पहली किश्त 1600 करोड़ और दूसरी 2000 करोड़ रुपए की है।
- दोनों किश्तों की ब्याज दर और अवधि अलग-अलग तय की गई है।
पहली किश्त की जानकारी
बता दें कि सरकार ने पहली किश्त में 1600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह राशि 18 साल की अवधि के लिए ली गई है। इस पर 7.61% की वार्षिक ब्याज दर तय हुई है। यानी हर साल सरकार को इस दर से ब्याज चुकाना होगा।
इस कर्ज की पूरी अदायगी साल 2044 में होगी। तब तक सरकार को समय-समय पर ब्याज की किश्तें देनी होंगी। यह एक लंबी अवधि का कर्ज है, जो सरकार के बजट पर सालों तक असर डालेगा।
दूसरी किश्त की जानकारी
दूसरी किश्त में सरकार ने दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह कर्ज 30 साल की और भी लंबी अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज दर 7.90% तय की गई है, जो पहली किश्त से थोड़ी ज्यादा है।
लंबी अवधि होने की वजह से इस कर्ज पर ब्याज दर भी अधिक रखी गई है। यह राशि साल 2056 में पूरी तरह चुकानी होगी। यानी अगले तीन दशक तक यह कर्ज सरकार के खाते में दर्ज रहेगा।
कहां खर्च होगी यह राशि
सरकार का कहना है कि यह पूरी रकम प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर खर्च होगी। इसमें उत्पादक और विकासात्मक परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यह पैसा सीधे जनहित से जुड़े कामों में लगाया जाएगा।
हालांकि किन-किन परियोजनाओं पर यह राशि खर्च होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। आमतौर पर ऐसे कर्ज सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में लगाए जाते हैं।
सरकारी प्रतिभूतियां क्या होती हैं
सरकारी प्रतिभूतियां (Government Securities – सरकार द्वारा जारी किए गए ऋण पत्र) एक तरह के बॉन्ड होते हैं। सरकार इन्हें बाजार में बेचकर पैसा जुटाती है। निवेशक इन्हें खरीदते हैं और बदले में तय ब्याज दर पर रिटर्न पाते हैं। यह प्रक्रिया नीलामी के जरिए होती है।
राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता
इसके अलावा बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश हुई थी। इसमें राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई गई थी।
इसमें बताया गया था कि एमपी सरकार नया उधार लेकर पुराना कर्ज चुका रही है। साल 2024-25 में कुल उधार का 29.43 फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज में गया था। इससे विकास कार्यों के लिए पैसा कम बचा है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, यानी कैग ने यह रिपोर्ट राज्य वित्त पर तैयार की थी। इसमें साल 2024-25 के आंकड़े शामिल हैं।
कैग रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने उधार का बड़ा हिस्सा पुराना कर्ज चुकाने में लगाया। यह हिस्सा 29.43 फीसदी रहा। पिछले 10 साल का औसत भी करीब इतना ही है, यानी 29.30 फीसदी। इससे साफ है कि यह कोई एक साल की बात नहीं है।
लगातार यही रफ्तार बनी हुई है। नए उधार से पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है। इससे पूंजीगत यानी विकास कार्यों वाले खर्च के लिए पैसा कम बचता है। सड़क, बिजली और अन्य जरूरी काम इससे प्रभावित हो सकते हैं। MP सरकार पर कर्ज
आर्थिक संतुलन बिगड़ने का पूरा खतरा
कैग रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। पिछले तीन वर्षों में राज्य का कर्ज अर्थव्यवस्था से ज्यादा तेजी से बढ़ा है। अगर आर्थिक विकास दर तेजी से नहीं बढ़ी तो संकट और बढ़ेगा।
10 साल में 298 फीसदी तक बढ़ा राज्य का ऋण
पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति डराने वाली लगती है। वर्ष 2015-16 में राज्य का आंतरिक ऋण केवल 83 हजार 718 करोड़ रुपए ही था। अब यह बढ़कर 3 लाख 33 हजार 216 करोड़ रुपए से भी ज्यादा पहुंच गया है।
वर्ष 2024-25 में केवल ब्याज के भुगतान पर 21 हजार 466 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। राज्य की कुल बकाया देयता में लगातार तेज बढ़ोतरी देखी गई है।
वर्ष 2023-24 में यह 12.28 फीसदी थी जो अब 14.60 फीसदी हो गई। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की तुलना में कर्ज का बोझ काफी अधिक बढ़ा है।
पिछले 5 वर्षों में कर्ज चुकाने का ब्योरा
2020-21: 65 हजार 170 करोड़ रुपए (19.58% उधारी)
2021-22: 4 हजार 684 करोड़ रुपए (32.76% उधारी)
2022-23: 58 हजार 867 करोड़ रुपए (37.38% उधारी)
2023-24: 65 हजार 180 करोड़ रुपए (33.19% उधारी)
2024-25: 89 हजार 797 करोड़ रुपए (29.43% उधारी)
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