देश के 50 स्वच्छता मॉडल शहरों में भोपाल का नाम, इंदौर और उज्जैन भी प्रगति-50 में शामिल
भोपाल शहर को अब पूरे भारत में स्वच्छता और वेस्ट मैनेजमेंट के एक शानदार मॉडल के रूप में डेवलप किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने देश के 50 शहरों में स्वच्छता को मॉडल बनाने की पहल शुरू की है।
इस पहल का नाम प्रगति-50 है और इसमें भोपाल को चुना गया है। मध्यप्रदेश से इंदौर और उज्जैन भी इस लिस्ट में शामिल हैं। भोपाल में जीआईएस 2027 को देखते हुए स्वच्छता व्यवस्था सुधारने पर फोकस रहेगा।
भोपाल अब देश के 50 चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है। इन शहरों की सफाई व्यवस्था को मॉडल बनाया जाएगा। यह काम केंद्र सरकार की प्रगति-50 पहल के तहत होगा। मध्यप्रदेश से कुल तीन शहर इस पहल में चुने गए हैं।
क्या है प्रगति-50 पहल
प्रगति-50 केंद्र सरकार की नई पहल है। इसका मकसद 50 शहरों में स्वच्छता और सेनिटेशन की व्यवस्था को मॉडल बनाना है। सेनिटेशन का मतलब साफ-सफाई और गंदे पानी जैसी व्यवस्थाओं का सही इंतजाम है।
शहरों का चयन कई क्राइटेरिया के बेस पर किया गया है। इनमें मौजूदा कचरा प्रबंधन और आबादी शामिल है। ज्योग्राफिकल लोकेशन को भी देखा गया है। गार्बेज फ्री सिटी स्टार रेटिंग भी एक आधार रही।
सिर्फ शहर की हालत नहीं, सरकार की तैयारी भी देखी गई। आज 29 सितंबर से इसकी शुरुआत होगी। कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री इसकी अध्यक्षता करेंगे।
कचरा प्रबंधन में क्या बदलेगा
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत सबसे पहले कचरा प्रबंधन मजबूत होगा। पूरी व्यवस्था पर एक साथ काम किया जाएगा। घरों से अलग-अलग कचरा लिया जाएगा। फिर उसके परिवहन में सुधार होगा।
प्रोसेसिंग और अंतिम निपटान की व्यवस्था भी बेहतर की जाएगी। कचरे से उपयोगी सामग्री अलग करने पर भी जोर रहेगा। कंपोस्टिंग और बायोगैस जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा। कंपोस्टिंग में गीले कचरे से खाद बनाई जाती है।
बायोगैस में जैविक कचरे से ईंधन तैयार होता है। शहर में कई जगह बार-बार कचरा जमा होता है। ऐसे संवेदनशील स्थानों को खत्म किया जाएगा। इसके बाद सार्वजनिक जगहों को बेहतर बनाया जाएगा।
जीआईएस की तैयारी से जुड़ाव
भोपाल में 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS - Global Investors Summit) योजना है। शहर की स्वच्छता व्यवस्था इसी को ध्यान में रखकर सुधारी जाएगी। इंदौर और उज्जैन भी प्रगति-50 की सूची में हैं। यानी मध्यप्रदेश के तीन शहर अब केंद्र की खास निगरानी में रहेंगे।
आज से शुरू होगी निगरानी
प्रगति-50 में चयनित शहरों के कामों की विशेष निगरानी की जाएगी। इसमें भोपाल, इंदौर और उज्जैन तीनों शहर चुने गए हैं। जिन व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है, उन पर खास नजर रहेगी।
ऐसे काम तय समय में पूरे कराने पर जोर रहेगा। अब देखना होगा कि भोपाल में यह योजना जमीन पर कैसे उतरती है। कचरा उठाने, प्रोसेसिंग और निपटान में सुधार पर आम लोगों की नजर रहेगी। भोपाल में 2027 की योजना जीआईएस को देखते हुए स्वच्छता पर खास फोकस रहेगा।
- प्रगति-50 पहल क्या है?
प्रगति-50 एक केंद्र सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के 50 शहरों में स्वच्छता और सेनिटेशन की व्यवस्था को मॉडल बनाना है। इसमें भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहर शामिल हैं। - भोपाल में कचरा प्रबंधन में क्या परिवर्तन होंगे?
भोपाल में कचरा प्रबंधन में सुधार के तहत घरों से अलग-अलग कचरा लिया जाएगा, उसके परिवहन में सुधार होगा, और प्रोसेसिंग तथा अंतिम निपटान की व्यवस्था बेहतर बनाई जाएगी। कंपोस्टिंग और बायोगैस जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। - प्रगति-50 पहल का लक्ष्य क्या है?
प्रगति-50 पहल का लक्ष्य नगर निगमों की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करना है, विशेषकर कचरा उठाने, प्रोसेसिंग और निपटान में सुधार लाना है, ताकि शहरों को गार्बेज फ्री सिटी स्टार रेटिंग प्राप्त हो सके।