कौन हैं नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, जो एक बार फिर BJP के लिए बने संकट मोचक
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। जोशी पहले से उपभोक्ता मामले और खाद्य मंत्रालय संभाल रहे हैं। कर्नाटक बीजेपी में उन्हें संगठन और संकट प्रबंधन का माहिर नेता माना जाता है। प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने संकट टालने के लिए एकबार फिर उन पर भरोसा जताया। प्रह्लाद जोशी ने भी नई जिम्मेदारी मिलते ही NTA अधिकारियों से मुलाकात कर अपने इरादे साफ कर दिए।
धारवाड़ से दिल्ली तक का सफर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की गूंज जब सरकार तक पहुंची, तब प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ में थे। सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद ही उन्हें सूचना मिल गई थी। सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी की जानकारी दी।
इसके बाद जोशी हुबली से शाम साढ़े सात बजे की फ्लाइट पकड़कर दिल्ली पहुंचे। रविवार को उन्होंने विधिवत कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करने की बात कही।
हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम बताई जा रही है। फिर भी इससे बीजेपी नेतृत्व में जोशी के कद का अंदाजा लगता है। कार्यभार संभालते ही उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA (National Testing Agency) के अधिकारियों से बैठक की। NTA इन दिनों पेपर लीक विवाद के कारण सवालों में घिरी है।
आरएसएस से शुरू हुआ सफर
63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी कर्नाटक बीजेपी के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी राजनीति की शुरुआत कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) से जुड़ने के साथ हुई थी। साल 1994 में हुबली के ईदगाह मैदान आंदोलन के बाद वह राज्य की राजनीति में अचानक चर्चा में आए। उस समय बीजेपी नेता उमा भारती के नेतृत्व में एक समूह ने कर्फ्यू के बावजूद तिरंगा फहराने की कोशिश की थी। पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत हो गई थी।
इसके अगले साल यानी 1995 में उन्हें धारवाड़ उत्तर विधानसभा सीट से टिकट मिला। इसके बाद उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा। 2008 के परिसीमन में यह सीट खत्म हो गई। इसके बाद वह धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद बन गए।
कर्नाटक बीजेपी में बढ़ता प्रभाव
प्रह्लाद जोशी पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के करीबी माने जाते थे। अनंत कुमार कर्नाटक में पार्टी विस्तार के प्रमुख रणनीतिकार थे। साल 2013 में जब बीएस येदियुरप्पा पार्टी से अलग हुए, तब बीजेपी को झटका लगा था। उसी दौर में जोशी को कर्नाटक बीजेपी की कमान सौंपी गई। वह 2016 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे।
2018 में अनंत कुमार के निधन के बाद जोशी दिल्ली में कर्नाटक बीजेपी का प्रमुख चेहरा बन गए। 2019 में उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। उनकी राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इस बात से भी लगता है कि 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने उनकी बेटी की शादी के कार्यक्रमों में हुबली, बेंगलुरु और दिल्ली में हिस्सा लिया था। जोशी कर्नाटक के प्राथमिक स्कूलों की मिड-डे मील परियोजना से भी जुड़े रहे हैं।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भूमिका
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय दिया गया। खाद्य मंत्री के तौर पर वह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से जुड़े हैं। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत बड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों में शामिल है। इसके अलावा वह नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से भी जुड़े रहे हैं, जहां पीएम सूर्य घर योजना जैसी योजना पर काम हुआ।
संकट सुलझाने की क्षमता
उपभोक्ता मामलों के मंत्री के तौर पर जोशी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखने वाली समितियों का हिस्सा हैं। वह गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह के भी सदस्य हैं। यह समूह जरूरी वस्तुओं की कीमतों की समीक्षा कर नीतिगत सुझाव देता है।
शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने से पहले चर्चा थी कि उन्हें दोबारा कर्नाटक भेजा जा सकता है। माना जा रहा था कि वह राज्य बीजेपी में चल रही गुटबाजी संभाल सकते हैं। हाल के राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग और नेताओं के बीच मतभेदों ने पार्टी की चिंता बढ़ाई थी।
किसान आंदोलन में निभाई भूमिका
प्रह्लाद जोशी की संकट सुलझाने की क्षमता 2024 में भी सामने आई थी। हरियाणा-दिल्ली के शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की समस्याओं के समाधान में उनकी अहम भूमिका रही। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व उन्हें ऐसा नेता मानता है जो मुश्किल हालात में बातचीत से रास्ता निकाल सकता है।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की चर्चा
2023 के विधानसभा चुनावों से पहले भी प्रह्लाद जोशी का नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल था। उस समय जनता दल सेक्युलर के नेता एचडी कुमारस्वामी ने उन पर तीखी टिप्पणी की थी। बाद में जेडीएस और बीजेपी के बीच गठबंधन हुआ। इसके बाद कुमारस्वामी केंद्र सरकार में जोशी के साथ मंत्री बन गए।
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर बताता है कि बीजेपी उन्हें सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नेता नहीं मानती। पार्टी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन और संकट प्रबंधन का भरोसेमंद चेहरा मानती है।
FAQ
- प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी क्यों मिली?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। बीजेपी उन्हें संकट प्रबंधन में माहिर मानती है। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम बताई जा रही है। - प्रह्लाद जोशी पहले कौन-सा मंत्रालय संभाल रहे थे?
वह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय संभाल रहे थे। वह नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से भी जुड़े रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी है। - प्रह्लाद जोशी की राजनीतिक शुरुआत कैसे हुई?
उनकी राजनीति की शुरुआत RSS से जुड़ने के साथ हुई। 1994 के हुबली ईदगाह मैदान आंदोलन के बाद वह चर्चा में आए। 1995 में उन्हें पहली बार विधानसभा का टिकट मिला।
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