मंत्री प्रतिमा बागरी विवाद: अफसर पर कार्रवाई के लिए सीएम से मिले 6 मंत्री
समझें क्या है पूरा मामला...
- प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद चल रहा है।
- जांच पूरी होने से पहले ही मुनादी करा दी गई।
- इससे नाराज छह मंत्री मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे।
- मंत्रियों ने संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की।
- जांच समिति का फैसला अगले दो हफ्ते में आ सकता है।
नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। जांच समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले ही एक मुनादी कराई गई। इस फैसले पर सरकार के अंदर भी नाराजगी दिख रही है। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।
मंत्रियों की आपत्ति
बुधवार, 08 जुलाई को कैबिनेट बैठक हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक के बाद छह मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे। इनमें उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी शामिल थे। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह भी बैठक में मौजूद रहे। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल भी साथ गए। मंत्री गौतम टेटवाल और लखन पटेल भी शामिल हुए। राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार भी इस मुलाकात का हिस्सा बने।
सभी मंत्रियों ने एक सुर में आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सुनवाई पूरी हुए बिना मुनादी क्यों कराई गई। मंत्रियों ने मुनादी का आदेश देने वाले अधिकारी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी। यह मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने मंत्रियों की बात ध्यान से सुनी।
दो हफ्ते में फैसला संभव
जाति प्रमाण पत्र मामले की जांच छानबीन समिति कर रही है। समिति ने 06 जुलाई को सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली। सूत्रों के अनुसार अब अगले दो हफ्ते में फैसला आ सकता है। समिति की रिपोर्ट से पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट के बाद ही आगे का फैसला होगा। प्रशासनिक कार्रवाई पर भी उसी आधार पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
बागरी बोलीं मैं SC वर्ग से
मंत्री प्रतिमा बागरी ने खुद इस मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वे बागरी समाज से आती हैं। मध्य प्रदेश में बागरी समाज अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) में शामिल है। उनका कहना है कि उनके पास 110 साल पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। यह दस्तावेज उनके परिवार की पुरानी पहचान साबित करते हैं।
समाज से पांच विधायक
प्रतिमा बागरी ने अपने समाज के राजनीतिक इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गुन्नौर और रैगांव सीट से पहले भी पांच विधायक रह चुके हैं। सबसे पहले काशी प्रसाद बागरी विधायक बने थे। इसके बाद उनके छोटे दादाजी स्वर्गीय जुगल किशोर बागरी विधायक रहे। गुन्नौर सीट से शिवदयाल बागरी भी विधायक चुने गए थे। महेंद्र बागरी ने भी इसी सीट का प्रतिनिधित्व किया। इनमें कांग्रेस पार्टी के भी बागरी विधायक शामिल रहे हैं। प्रतिमा बागरी का कहना है कि उनके दादाजी ने पांच बार रैगांव सीट संभाली। इतना लंबा राजनीतिक इतिहास होने के बावजूद सवाल उठाना उन्हें अजीब लगता है।
आरोप को बताया गलत
मंत्री ने सीधे तौर पर विरोधियों पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सिर्फ उनके प्रमाणपत्र पर सवाल उठाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक सोची समझी रणनीति बताया। प्रतिमा बागरी ने कहा कि वे प्रदेश की सबसे युवा मंत्री हैं। उनका मानना है कि यही बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही।
उन्होंने कहा कि एक अनुसूचित जाति की महिला का आगे बढ़ना कुछ लोगों को स्वीकार नहीं है। उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आरोप को पूरी तरह गलत बताया। मंत्री ने भरोसा जताया कि जांच में सच्चाई सामने आएगी।
इस पूरे विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ दल के अंदर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आगे क्या कार्रवाई होती है।
जानें कौन हैं मंत्री प्रतिमा बागरी
37 वर्षीय प्रतिमा बागरी की राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। ग्रेजुएट शिक्षित प्रतिमा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में सतना जिले की रैगांव सीट से 36 हजार 060 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
उन्होंने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को शिकस्त दी थी। हालांकि, इससे पहले 2021 के उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फिलहाल वे नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने उनके राजनीतिक भविष्य पर एक सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
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