ब्राह्मण-ठाकुर आज भी करते हैं भेदभाव- जाति विवाद पर प्रतिमा बागरी

Sourabh Bhatnagar | Jul 17, 2026, 10:47 IST
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मध्य प्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के एससी जाति प्रमाण पत्र को जांच समिति ने वैध माना है। मंत्री ने दावा किया कि ब्राह्मण और ठाकुर जाति के लोग बागरी समाज से आज भी भेदभाव करते हैं। शिकायतकर्ता ने फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मंत्री प्रतिमा बागरी का एससी (Scheduled Caste) जाति प्रमाण पत्र जांच समिति ने वैध माना है।
  • मंत्री ने दावा किया कि ब्राह्मण और ठाकुर जाति के लोग बागरी समाज से भेदभाव करते हैं।
  • समिति ने प्रयागराज के पंडों से मिली वंशावली और पुराने दस्तावेज जांचे हैं।
  • समिति ने माना कि बागरी जाति का राजपूत जाति से रोटी-बेटी का रिश्ता नहीं है।
  • शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने कहा, वे इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे।

कुर्सी बचाने की कोशिश

भोपाल में मध्य प्रदेश के कुछ मंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर हद तक जाने को तैयार दिखते हैं। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का मामला भी कुछ ऐसा ही है। खुद को अनुसूचित जाति यानी एससी (Scheduled Caste) का बताने के लिए उन्होंने छुआछूत जैसी कुप्रथा का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि आज भी ब्राह्मण, ठाकुर और राजपूत जैसी जातियों के कई लोग बागरी जाति से भेदभाव रखते हैं। उनका कहना है कि ये लोग बागरी जाति के घरों में भोजन तक नहीं करते।



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मंत्री का तर्क क्या था

मंत्री बागरी ने कहा, यह बात साबित करती है कि बागरी न तो ठाकुर हैं और न राजपूत उप-जाति की। वे एससी वर्ग से ही आती हैं। उन्होंने यह दावा जाति प्रमाण पत्र की जांच करने वाली उच्च स्तरीय समिति के सामने रखा। इस समिति का नाम अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति है। मंत्री ने अपने पक्ष में 110 साल पुराने दस्तावेज पेश किए। इसके अलावा उन्होंने 20 से ज्यादा कारण भी गिनाए। इन सबके आधार पर समिति ने मंत्री को क्लीन चिट दे दी।



समिति का फैसला

समिति ने साफ कहा कि नागौद के अनुविभागीय अधिकारी यानी एसडीओ (Sub Divisional Officer) से 7 फरवरी 2004 को जारी एससी जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध है। इस फैसले के साथ ही समिति ने शिकायतकर्ता के दावे को खारिज कर दिया। शिकायत कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने की थी। अहिरवार ने अब कहा है कि वे समिति के फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे। यानी यह विवाद अभी थमने वाला नहीं है।



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सवालों के घेरे में दावा

प्रयागराज के पंडों से मिली वंशावली

समिति के सामने राज्य मंत्री प्रतिमा बागरीने कई अहम दस्तावेज पेश किए। इनमें साल 2004 में जारी मूल हस्तलिखित और डिजिटल जाति प्रमाण पत्र शामिल था। साथ ही उन्होंने अपनी वंशावली और पूर्वजों से जुड़े राजस्व अभिलेख भी दिखाए। उन्होंने अपने परदादा रामगोपाल बागरी के समय के साल 1916 के राजस्व दस्तावेज भी सौंपे। इसके अलावा प्रयागराज के पंडों के पास मौजूद वंशावली का अभिलेख भी पेश किया गया। समिति ने इन दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की।



कई स्तर पर हुई जांच

समिति ने यह मामला हल्के में नहीं लिया। सबसे पहले सतना कलेक्टर और एसपी यानी पुलिस अधीक्षक समेत कई स्तर पर जांच कराई गई। इसके बाद साल 1916 और उसके बाद के सभी दस्तावेजों की जांच हुई। समिति ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी अध्ययन किया। इसके साथ ही आदिम जाति अनुसंधान संस्थान मध्य प्रदेश के अध्ययन का हवाला भी दिया गया। इसी आधार पर समिति ने माना कि बागरी जाति का राजपूत जाति के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता नहीं है। यानी दोनों जातियों में शादी-ब्याह और साथ भोजन जैसा कोई पुराना रिश्ता नहीं मिला।



मंत्री और शिकायतकर्ता का पक्ष

मध्यप्रदेश की मंत्री प्रतिमा बागरीने कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें फंसाने की कोशिश की थी। उनका कहना है कि सतना जिले में बागरी समाज कभी राजपूत वर्ग में नहीं रहा। उन्होंने कहा, समिति ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। वहीं शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार का कहना कुछ और है। उन्होंने कहा कि उन्होंने समिति को सारे दस्तावेजों की प्रति सौंपी थी। इनमें सरकार के जारी आदेशों की कॉपी भी शामिल थी। अहिरवार का आरोप है कि सरकार ने मंत्री बागरी को बचा लिया है। इस तरह मामला अभी भी विवादों में घिरा हुआ है।



FAQ

  1. प्रश्न 1: मंत्री प्रतिमा बागरी के एससी जाति प्रमाण पत्र पर विवाद क्यों हुआ?
    उत्तर: कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उनके एससी प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उच्च स्तरीय समिति ने जांच की और प्रमाण पत्र को वैध माना।
  2. प्रश्न 2: समिति ने प्रतिमा बागरी जाति को एससी वर्ग का मानने का आधार क्या बताया?
    उत्तर: समिति ने 1916 से जुड़े राजस्व दस्तावेज, वंशावली अभिलेख और हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अध्ययन किया। इसी आधार पर बागरी जाति को एससी वर्ग का माना गया।

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