शादी से पहले प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का नया ट्रेंड, आखिर क्यों हो रही ये सीक्रेट जांच
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में शादी से पहले बैकग्राउंड चेक कराने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
- पहले रिश्तेदार और पंडित रिश्ते लेकर आते थे।
- अब ज्यादातर रिश्ते मैट्रिमोनियल साइट्स पर बन रहे हैं।
- इसलिए परिवार डिटेक्टिव हायर कर रहे हैं।
- पिछले एक दशक में ऐसे मामलों में 4-5 गुना बढ़ोतरी हुई है।
डिटेक्टिव केस में उछाल
बता दें कि रिसर्च फर्म मार्केट एन टेल के अनुसार निजी जासूसी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पहले एजेंसियों के पास महीने में सिर्फ 10-12 मामले आते थे। अब यह आंकड़ा 100 से ज्यादा हो चुका है।
यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि शादी से पहले भरोसे का तरीका बदल गया है। अब लोग सिर्फ बातों पर यकीन नहीं करते।
दिल्ली के केस ने खोला सच
जानकारी के अनुसार दिल्ली की एक लड़की एक साल से एक युवक के साथ रिलेशन में थी। दोनों परिवार रिश्ते से खुश थे। शादी तय होने से पहले लड़की के माता-पिता ने एहतियातन डिटेक्टिव एजेंसी से जांच कराई।
एजेंसी ने युवक के पुराने पते पर पड़ताल की। पता चला कि वह पहले से शादीशुदा था। उसकी पहली पत्नी ने कथित घरेलू प्रताड़ना के बाद आत्महत्या कर ली थी। यह जानकारी सामने आते ही परिवार ने रिश्ता तोड़ दिया।
अरेंज-लव दोनों में जांच
डिटेक्टिव एजेंसी स्लूथ्स इंडिया के एमडी नमन जैन बताते हैं कि 30 साल पहले उनके पास महीने में सिर्फ 6-7 मामले आते थे। अब हर महीने 200 से ज्यादा केस आ रहे हैं। रोजाना 50-60 कॉल आते हैं।
अब सिर्फ अरेंज मैरिज नहीं, लव मैरिज करने वाले भी एक-दूसरे की पृष्ठभूमि जांच करा रहे हैं। मार्केट एन टेल के अनुसार यह बाजार 2032 तक हर साल 31.64% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मैट्रिमोनियल जांच का ही है।
पेरेंट्स कराते ज्यादा जांच
प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी हिंदुस्तान डिटेक्टिव के फाउंडर नरेंद्र तिवारी के मुताबिक करीब 75-80% डिमांड पेरेंट्स की तरफ से आती है। सिर्फ 20-25% मामलों में लड़का या लड़की खुद अनुरोध करते हैं।
ज्यादातर जांच लड़कियों के चरित्र और पुराने रिलेशन को लेकर होती है। लड़कों के मामले में आमदनी, आदतें और नौकरी की जांच ज्यादा होती है।
टियर-2 शहरों में मांग
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में जांच पहले से ज्यादा होती रही है। वहीं अब भोपाल, इंदौर, जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद जैसे टियर-2 शहरों से भी बड़े पैमाने पर पूछताछ हो रही है।
डिटेक्टिव विपिन कुमार कहते हैं कि ज्यादातर परिवार शक की वजह से नहीं आते। वे सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि प्रोफाइल में लिखी बातें सच हैं या नहीं।
केतन केस के बाद असर
हाल के वर्षों में सामने आए सोनम रघुवंशी, सिया गोयलऔर अन्य चर्चित मामलों ने भी परिवारों को सतर्क किया है। नमन जैन बताते हैं कि पुणे में हुई केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के बाद पूछताछ कई गुना बढ़ गई है।
लोग फोन पर खासतौर पर इस मामले का जिक्र करते हुए प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का अनुरोध करते हैं।
फीस और जांच में समय
प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक की फीस शहर के हिसाब से अलग-अलग होती है। छोटे और मझोले शहरों में यह 20-25 हजार रुपए है। बड़े शहरों में फीस 1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक जाती है।
वहीं अगर जांच कई शहरों में या विदेश में करनी हो तो फीस और बढ़ सकती है। एक मामले की जांच में आमतौर पर 15-20 दिन लगते हैं। इसमें सोशल मीडिया, बैंक खाते और फील्ड जांच शामिल होती है।
कानूनी मान्यता नहीं
बता दें कि भारत में निजी जासूसी एजेंसियों के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है। हालांकि इनका काम लीगल माना जाता है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून में निजी जांच एजेंसियों को मान्यता नहीं दी गई है।
कोई भी व्यक्ति अपने जोखिम पर निजी एजेंसी को नियुक्त कर सकता है, लेकिन ऐसी जांच को कानूनी जांच नहीं माना जाएगा। लोक अभियोजक ऐसे साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं कर सकता। हालांकि बचाव पक्ष इसे पेश कर सकता है।
किन रेड फ्लैग्स पर सबसे ज्यादा फोकस?
- पहले से शादीशुदा होना
- फर्जी नौकरी या सैलरी
- झूठी शैक्षणिक योग्यता
- आपराधिक मामले
- घरेलू हिंसा का इतिहास
- भारी कर्ज
- नशे की लत
ये खबरें भी पढ़िए।
दूसरी शादी के लिए तलाक का दबाव, पत्नी ने किया केस तो खाप पंचायत ने किया जात बाहर
देश दुनिया न्यूज: एमपी में पतियों के लिए काल बनी पत्नियां, 7 महीनों में 15 को उतारा मौत के घाट
क्राइम न्यूज: प्रेमी के चक्कर में की पतियों की हत्या, अब भोग रहीं कर्मों की सजा
सुहागरात की रात स्पाइडर-वुमन बनी दुल्हन, छत से लगाई छलांग, गहने लेकर फरार