भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने 13 लोगों के कातिल डकैत को बताया हमदर्द
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल की सियासत में एक बार फिर बयानों के बीहड़ से ऐसी चिंगारी निकली है, जिसकी तपिश दूर तक महसूस की जा रही है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं।
इस बार उन्होंने किसी राजनीतिक विरोधी पर निशाना नहीं साधा, बल्कि कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना पुराना दोस्त और हमदर्द बता दिया है। बता दें कि रामबाबू वही है जिसने 13 बेगुनाह लोगों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था। विधायक का साफ तौर पर कहना है कि रामबाबू को हालात ने डकैत बनाया था।
जानें क्या है पूरा मामला...
यह पूरा वाकया शिवपुरी जिले के पिछोर में आयोजित पाल-बघेल समाज के एक कार्यक्रम का है। अवसर था लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती का। इस दौरान मंच पर लगे कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर भाजपा विधायक ने न केवल पुष्प अर्पित किए, बल्कि उसे अपना सुख-दुख का साथी भी करार दिया।
इस दौरान मंच पर प्रसिद्ध लोकगायक मनोज बघेल भी उपस्थित थे और सामने हजारों की संख्या में सामाजिक लोग मौजूद थे।
जेल से लेकर जंगल तक का याराना
मंच से जनता को संबोधित करते हुए विधायक प्रीतम लोधी ने अपनी और डकैत रामबाबू गड़रिया की नजदीकियों को खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि-
लोधी ने आगे कहा कि उन्हें रामबाबू के जीवन से जुड़ी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक घटना आज भी याद है। उन्होंने गर्व से कहा कि हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं आज खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण करने का यह पावन अवसर मिला।
क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते?- विधायक
भाषण के दौरान जब भीड़ ने तालियां बजाईं, तो विधायक का तेवर और कड़ा हो गया। उन्होंने अपने पुराने दिनों का एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि एक दौर में जब एक पीड़ित बहन पर बहुत अत्याचार हुआ था, तब उन्होंने उसकी आवाज उठाई थी। उस समय उन्होंने पांच हजार लोगों को साथ लेकर कमिश्नरी का घेराव किया था।
लोधी ने अपनी बात को सही ठहराते हुए जनता से सवाल किया। लोधी ने कहा कि उस दौर में लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते? वह भी परिस्थितियों के शिकार थे।
ढाई किलो से ढाई सौ किलो के हाथ का सफर
विधायक ने इस मंच का उपयोग अपने राजनैतिक प्रभाव और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए भी किया। उन्होंने पाल-बघेल समाज के सामने प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि जिस तरह मैंने हर मुश्किल घड़ी में रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, ठीक उसी तरह आज मैं यह शपथ लेता हूं कि इस पाल-बघेल समाज का भी हमेशा साथ दूंगा और संकट आने पर कभी पीछे नहीं हटूंगा।
अपनी चिरपरिचित शैली में संवाद करते हुए उन्होंने फिल्मी अंदाज में कहा कि जब मैंने पुराने समय में रामबाबू का साथ दिया था, तब मेरा हाथ महज ढाई किलो का था। वहीं, अब आप लोगों ने मुझे विधायक बनाकर उस हाथ की ताकत को बढ़ाकर ढाई सौ किलो का कर दिया है।
आपकी रक्षा और सुरक्षा के लिए प्रीतम लोधी का यह ढाई सौ किलो का हाथ हमेशा तैयार रहेगा। दीप से दीप जलाते चलो, पिछोर में प्रेम की गंगा बहाते चलो। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी संस्कृति न तो अत्याचार करने की है और न ही अन्याय सहने की।
कौन था खौफ का दूसरा नाम रामबाबू गड़रिया?
यदि इतिहास के पन्नों को पलटें, तो रामबाबू गड़रिया का नाम सुनते ही कभी ग्वालियर-चंबल अंचल के लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। 1990 के दशक के अंत से लेकर साल 2007 तक मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीहड़ों में इस गैंग का समानांतर खौफ चलता था।
- गैंग की शुरुआत (1998): रघुवर गड़रिया, रामबाबू गड़रिया, दयाराम, गोपाल और प्रताप आपस में रिश्तेदार थे। साल 1998 में रघुवर की पत्नी को लेकर उपजे एक घरेलू विवाद के बाद रघुवर, रामबाबू और दयाराम ने मिलकर अपने ही एक रिश्तेदार की हत्या कर दी और बीहड़ का रुख किया था।
- सुरक्षा में चूक: इस घटना के बाद तत्कालीन ग्वालियर एसपी प्रदीप रुनवाल ने गांव का दौरा किया और सुरक्षा के लिए चार पुलिस जवानों की तैनाती की थी। वहीं, डकैतों के हौसले इतने बुलंद थे कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद वे परिवार के एक और सदस्य की हत्या करने में कामयाब रहे थे। इसके बाद पीड़ित परिवार को गांव छोड़ना पड़ा था।
- भंवरपुरा नरसंहार (साल 2004): रामबाबू और उसका भाई दयाराम गड़रिया मिलकर इस गैंग को चलाते थे। यह गैंग मुख्य रूप से अपहरण और फिरौती के लिए कुख्यात था। साल 2004 में इस गैंग ने भंवरपुरा में एक भयानक नरसंहार को अंजाम दिया था। जहां 13 गुर्जर समाज के लोगों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया गया था। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
- खौफ का अंत (अप्रैल 2007): सालों तक पुलिस को चकमा देने और कई बार घेराबंदी तोड़ने वाले रामबाबू गड़रिया के खौफ का अंत अप्रैल 2007 में हुआ था। जब पुलिस मुठभेड़ में कानेरखो के जंगलों में उसे ढेर कर दिया गया था।
प्रीतम लोधी का विवादों से पुराना नाता
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का विवादों और तीखे बयानों से चोली-दामन का साथ रहा है। यदि उनके राजनीतिक सफरनामे पर नजर डालें, तो वे पहले भी कई बार अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर चुके हैं:
- अगस्त 2023 (ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी): उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि कथावाचक और पंडित भोली जनता को पागल बनाते हैं। वे सुंदर महिलाओं के घर जाकर कहते हैं कि आज शाम का भोजन आपके यहां ही करेंगे, लेकिन उनकी नजर कहीं और होती है।
इस बयान के बाद भारी जन-आक्रोश फैला था। बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। चुनावी साल होने के कारण नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित (Expelled) कर दिया था और उन पर 20 से ज्यादा प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई थीं। - चुनाव से ठीक पहले वापसी: लोधी ने भाजपा से अलग होकर ओबीसी महासभा जॉइन कर ली थी। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के हस्तक्षेप के बाद चुनाव से ठीक पहले उनकी भाजपा में वापसी हुई। उन्हें टिकट मिला और उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता केपी सिंह को हराकर पिछोर सीट पर जीत दर्ज की।
- दिसंबर 2024 (महिला पर आपत्तिजनक टिप्पणी): ट्रांसपोर्ट कांस्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर हुई छापेमारी में मिली बेहिसाब संपत्ति के बाद, लोधी ने कांस्टेबल की मां उमा शर्मा के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था। इससे फिर विवाद खड़ा हुआ था।
- हालिया विवाद (एसडीओपी को धमकी): अभी हाल ही में उन्होंने करैरा के एसडीओपी आईपीएस आयुष जाखड़ को खुले मंच से चुनौती देते हुए कहा था कि करैरा तेरे डैडी का नहीं है एसडीओपी... यदि तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना।
अब एक बार फिर, 13 लोगों के हत्यारे डकैत के प्रति हमदर्दी दिखाकर प्रीतम लोधी ने राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक सुचिता पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। वहीं भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है।
ये खबरें भी पढ़िए...
MP News. प्रीतम लोधी का बड़ा बयान : मैं नशे का ज्ञानी हूं, लोधी समाज से मुख्यमंत्री बनाने की मांग
पिछले दो मामलों में निष्कासित हुए थे बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी, तीसरी बार सॉरी से बनी बात
सख्त एक्शन के नाम पर क्या प्रीतम लोधी का सफाई देना काफी है? विधायक का अब क्या होगा?
बागी तेवरों वाले विधायक प्रीतम लोधी संगठन के आगे पड़े फीके, हाईकमान की क्लास के बाद बदले सुर