बोनस अंक पर 13 हजार 89 प्राथमिक शिक्षक अभ्यार्थियों को HC से झटका
समझें क्या है पूरा मामला
- प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में बोनस अंक विवाद सामने आया।
- हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पूर्व चयनितों को राहत नहीं दी।
- कोर्ट ने सिंगल बेंच का फैसला बरकरार रखा।
- अब संशोधित मेरिट सूची के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
- कोर्ट ने गलत जानकारी देकर लाभ लेने को गंभीर माना।
RCI बोनस अंक विवाद ने बदली भर्ती की तस्वीर
मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती फिर चर्चा में है। यह मामला चयन परीक्षा 2025 में मिले बोनस अंकों से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सभी रिट अपीलें खारिज कर दीं। इससे पहले सिंगल बेंच ने भी इसी मुद्दे पर फैसला दिया था। अब संशोधित मेरिट सूची के आधार पर चयन आगे बढ़ेगा।
इस फैसले से पहले चयनित 13089 शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में दायर अपील के विरोध में अधिवक्ता आलोक वागरेचा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने तथ्य रखे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि RCI सर्टिफिकेट की गलत जानकारी देने वाले अभ्यर्थियों को पहले भी मौका मिल चुका है। अब उन्हें राहत देना अन्य अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव होता।
विवाद की शुरुआत बोनस अंकों से कैसे हुई
नरसिंहपुर की सोनम अगरैया और अन्य ने याचिका लगाई थी। याचिका में RCI के बोनस अंक देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। यह मामला रिट याचिका क्रमांक 12970/2026 से जुड़ा था।
भर्ती नियमों की कंडिका 7.7 इसमें अहम थी। इसके तहत पात्र अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत बोनस मिलना था। बोनस के लिए RCI मान्यता प्राप्त डिप्लोमा जरूरी था। याचिका में चयन सूची के आंकड़ों पर भी सवाल उठे।
बताया गया कि 14964 अभ्यर्थियों ने बोनस का दावा किया। RCI आंकड़ों के अनुसार करीब 5271 अभ्यर्थी पात्र बताए गए। यही अंतर पूरे विवाद की बड़ी वजह बना।
सिर्फ ऑनलाइन जानकारी पर बोनस देने पर उठे सवाल
सिंगल बेंच ने 6 मई 2026 को आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले को गंभीर माना। कोर्ट ने बोनस देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बोर्ड ने ऑनलाइन आवेदन की जानकारी के आधार पर अंक दिए थे। इस दौरान दस्तावेजों की जांच नहीं हुई थी। कोर्ट ने माना कि इससे असली मेरिट प्रभावित हुई। ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकार भी इससे प्रभावित हो सकते थे। इसी आधार पर चयन सूची वापस भेजने का आदेश हुआ।
अभ्यर्थियों को सुधार के लिए तीन मौके मिले थे
सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों को सुधार का अवसर देने को कहा। बोर्ड को 15 दिन की अतिरिक्त विंडो खोलनी थी। इस दौरान RCI मान्यता वाला डिप्लोमा अपलोड करना था। दस्तावेज नहीं देने वालों का आवेदन निरस्त होना था। इसके बाद नई मेरिट सूची तैयार करने का आदेश था। नियुक्ति प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने को कहा गया था।
इसी आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी गई।
अपील में अभ्यर्थियों ने क्या कहा
अपील करने वालों ने अपनी गलती को भूल बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास RCI डिप्लोमा नहीं है। उनका दावा था कि बोनस अंक की मांग नहीं थी। वे वास्तविक अंकों से चयन प्रक्रिया में शामिल होना चाहते थे। कुछ अपीलार्थियों ने दिव्यांग श्रेणी का भी हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट से सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की मांग की।
डबल बेंच ने तीन सुधार अवसरों का जिक्र किया
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने पाया कि सुधार के तीन अवसर दिए गए थे। पहला अवसर 25 और 26 अगस्त 2025 को मिला था। दूसरा अवसर 26 दिसंबर से 10 जनवरी तक मिला। यह अवसर दीपक परमार मामले के आदेश से जुड़ा था। तीसरा अवसर 4 से 11 फरवरी 2026 तक मिला। यह अवसर DPI के निर्देश पर दिया गया था। इसके बावजूद कई अभ्यर्थियों ने जानकारी नहीं सुधारी।
नतीजे के बाद गलती सुधारने की मांग क्यों नहीं मानी
बेंच ने अभ्यर्थियों के बाद में किए दावे को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के अनुसार उन्हें पहले ही पर्याप्त अवसर मिले थे। परिणाम आने के बाद गलती बताना सही नहीं था। बेंच ने इस कदम को गंभीरता से देखा। कोर्ट ने कहा कि इससे भर्ती की पूरी मेरिट बदल सकती है। हजारों अभ्यर्थियों की स्थिति इससे प्रभावित हो सकती है। सही जानकारी देने वालों के अधिकार भी प्रभावित होते।
फर्जी जानकारी पर कोर्ट ने दिया सख्त संदेश
डबल बेंच ने गलत जानकारी देने को धोखाधड़ी माना। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का जिक्र हुआ। महेश कुमार बाथम मामले का भी इसमें उल्लेख हुआ। कोर्ट ने धोखाधड़ी से मिले लाभ को स्वीकार नहीं किया। ऐसे लाभ के आधार पर समानता की मांग नहीं हो सकती। बेंच ने इसी सिद्धांत पर अपीलों को खारिज किया। कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश में गलती नहीं पाई।
चयनित शिक्षकों के सामने क्या स्थिति है
इस फैसले के बाद संशोधित मेरिट सूची महत्वपूर्ण होगी। पहले बनी चयन सूची अब अंतिम आधार नहीं रहेगी। RCI योग्यता की जांच के बाद नई सूची तैयार होगी। अपात्र अभ्यर्थियों के बोनस अंक हटाए जाएंगे।।इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों की स्थिति बदल सकती है। चयन और नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया नई मेरिट पर होगी। इस फैसले का असर हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।
भर्ती प्रक्रिया के लिए क्यों अहम है
इस फैसले ने भर्ती में सही जानकारी का महत्व बताया। कोर्ट ने गलती सुधारने के तय अवसरों को अहम माना। बाद में मिली राहत से पूरी मेरिट प्रभावित हो सकती है। इसी कारण बेंच ने प्रक्रिया दोबारा खोलने से इनकार किया। फैसले का सीधा असर संशोधित मेरिट पर पड़ेगा। अब भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज जांच की भूमिका बढ़ेगी।
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