प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अब पोस्टिंग विवाद, मेरिट वालों को दे दी दूर पोस्टिंग

Atul Dwivedi | Aug 19, 2026, 18:29 IST
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मध्यप्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पोस्टिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मेरिट वालों को दूर जिला मिला, कम नंबर वालों को मनचाहा जिला। शिक्षकों ने हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया है

मध्यप्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा पूरी हो चुकी है। लेकिन पोस्टिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। करीब 1500 नव नियुक्त शिक्षकों को पसंद का जिला नहीं मिला। आरोप है कि कम मेरिट वालों को पास का जिला दिया गया, जबकि ज्यादा मेरिट वालों को दूर भेजा गया। शिक्षकों का कहना है कि यह हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ है।



क्या है पूरा विवाद

स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग ने मिलकर 13 हजार से ज्यादा पदों पर प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती निकाली थी। इसमें करीब 10 हजार पद अकेले स्कूल शिक्षा विभाग के थे। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा कराई और रिजल्ट भी जारी कर दिया।



लेकिन अब नियुक्ति के दौरान नई मुश्किल सामने आई है। द सूत्र को मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 1500 नव नियुक्त शिक्षकों को चॉइस फिलिंग के बावजूद मनचाहा जिला नहीं मिला। इन शिक्षकों का आरोप है कि उनसे कम मेरिट वालों को डीपीआई (DPI – Directorate of Public Instruction) ने नजदीकी जिले दे दिए। जबकि ज्यादा मेरिट वालों को विभाग ने अनदेखा कर दिया।



कैसे हुई गड़बड़ी

शिक्षकों का कहना है कि जो अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग से थे, लेकिन मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चुने गए। उन्हें दूर के जिले मिले। वहीं जो अभ्यर्थी कम नंबर लाने के बावजूद अपनी आरक्षित श्रेणी में ही रह गए। उन्हें पास या पसंद का जिला मिल गया।



यानी अगर किसी की रैंक 500 है, तो उसे दूर पोस्टिंग मिली। जबकि 1800 रैंक वाले को पास के जिले में जगह मिल गई। इसी वजह से मेरिट वाले शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।



हाईकोर्ट का निर्देश क्या था

नव नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि डीपीआई ने ऐसा करके हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी की है। दरअसल 12 नवंबर 2024 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने WA No. 1333/2023, रिचा ताम्रराकर बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले में एक अहम निर्देश दिया था।



कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी का चयन सामान्य वर्ग की मेरिट में हुआ है, तो सिर्फ इस वजह से उसे कम लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज्यादा नंबर लाने वाले को कम नंबर वाले से बदतर स्थिति में रखना, संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को मेरिट और चॉइस फिलिंग के मुताबिक फिर से जिला आवंटन का निर्देश दिया था।



विदिशा का मामला

द सूत्र की पड़ताल में एक मामला विदिशा से सामने आया। एक नव नियुक्त शिक्षिका ओबीसी (OBC – Other Backward Class) वर्ग से हैं, लेकिन मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चुनी गईं। उन्हें खंडवा में जॉइनिंग चाहिए थी। लेकिन उन्हें विदिशा भेज दिया गया।



शिक्षिका का आरोप है कि यह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ है। ऐसे कई और मामले सामने आ रहे हैं, जहां मेरिट वालों को पसंद का जिला नहीं मिला।



शिक्षकों की मांग

नव नियुक्त शिक्षकों की मांग है कि मेरिट और चॉइस फिलिंग के आधार पर दोबारा जिला आवंटन किया जाए। उनका कहना है कि वर्ग 2 भर्ती में यही नियम सही तरीके से लागू हुआ था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में डीपीआई ने वही नियम क्यों नहीं अपनाया। फिलहाल विभाग की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



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