कौड़ियों के भाव बिक रही नितिन गडकरी से लेकर सीएम मोहन यादव तक की निजी जानकारी

Neel Tiwari | Aug 14, 2026, 15:15 IST
गडकरी से सीएम मोहन तक की निजी जानकारी लीक
समग्र पोर्टल के बाद परिवहन डेटा की सुरक्षा पर नया सवाल उठा है। निजी वेबसाइट पर बिना ऑथेंटिकेशन RC डाउनलोड हो रही है। पड़ताल में कई नेताओं की गाड़ियों की जानकारी सामने आई हैं। इसमें चेसिस और इंजन नंबर जैसी जानकारी शामिल है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • निजी वेबसाइट पर बिना ऑथेंटिकेशन RC डाउनलोड हो रही है।
  • पड़ताल में कई मंत्रियों की गाड़ियों की RC सामने आई हैं।
  • RC में चेसिस और इंजन नंबर जैसी जानकारी दिखी है।
  • वेबसाइट पर अलग-अलग राज्यों की गाड़ियों की जानकारी मौजूद है।
  • मामला परिवहन डेटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकारी परिवहन डेटा की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

समग्र पोर्टल से जुड़े खुलासों के बाद द सूत्र की पड़ताल में एक नया खुलासा सामने आया है। इस बार सवाल परिवहन विभाग के डेटा पर उठे हैं।



द सूत्र की पड़ताल में निजी वेबसाइट मिली। इस वेबसाइट पर RC डाउनलोड की सुविधा दिखी। इस वेबसाइट में निजी जानकारी डाउनलोड करने के लिए ऑथेंटिकेशन नहीं मांगा जाता। इससे RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सीधे डाउनलोड हो रहा था।



वेबसाइट पर वॉलेट की तरह पैसे जमा होते हैं। अलग-अलग सेवाओं के लिए यही बैलेंस इस्तेमाल होता है। इनमें व्हीकल सर्विस भी शामिल है। इस सर्विस से कई RC निकाल कर देखी गई। एक RC के लिए 30 रुपए लिए गए।



मंत्रियों की गाड़ियों से शुरू की गई पड़ताल

पड़ताल को जांचने के लिए सार्वजनिक जानकारी इस्तेमाल की गई। नेताओं के चुनावी एफिडेविट से वाहन नंबर लिए गए। इन नंबरों को वेबसाइट पर डालकर जांच की गई। इसके बाद कई RC स्क्रीन पर सामने आईं। इस प्रक्रिया में ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं दिखी।



जांच में मध्य प्रदेश के मंत्रियों की जानकारी मिली। इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की निजी कार क्रमांक MP04CW5151 भी इसमें शामिल है। इसकी RC एक क्लिक पर डाउनलोड हो गई। RC में कई संवेदनशील निजी वाहन जानकारी भी दिखी।



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RC में चेसिस और इंजन नंबर भी दिखे

डाउनलोड हुई RC में सामान्य पूरी जानकारी मौजूद थी। इसमें चेसिस नंबर भी दिखाई दे रहे है। इंजन नंबर भी दस्तावेज में मौजूद था। फाइनेंस करने वाले बैंक की जानकारी भी दिखी। इससे डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है।



मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री की RC भी मिली

मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का मामला भी सामने आया। उनकी दो गाड़ियों की जानकारी जांची गई। इनमें MP04CX5022 और DL1CAD5022 शामिल हैं। दोनों की RC वेबसाइट पर उपलब्ध दिखी। इससे वेबसाइट की पहुंच पर सवाल खड़े हुए।



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इंदर सिंह परमार की RC भी डाउनलोड हुई

तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार की जानकारी भी जांची गई। उनकी कार का नंबर MP04ZF8745 है। इसकी RC भी वेबसाइट पर उपलब्ध दिखी। इसे मात्र 30 रुपए में डाउनलोड किया गया। इस जांच से मामला और गंभीर हो गया।



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नितिन गडकरी की गाड़ियों तक पहुंच

इसके बाद जांच मध्य प्रदेश से आगे बढ़ाई गई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की गाड़ियां जांची गईं। उनकी सभी निजी गाड़ियों की RC सामने आने आ गई।



इनमें MH49AE2700, MH49AT9927, MH49T0081, MH49BZ2727 की RC भी डाउनलोड हुई। पड़ताल में एक पुरानी कार भी सामने आई।



इसका नंबर MZV7088 है। इसकी खरीद साल 1988 की बताई गई है। इसका रजिस्ट्रेशन 2023 में खत्म हुआ था।



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मामला सिर्फ RC डाउनलोड तक सीमित नहीं

बता दें कि RC में वाहन की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है। इसका गलत इस्तेमाल कई तरह से हो सकता है। फर्जी दस्तावेज बनाना आसान हो सकता है। वाहन की पहचान बदलने में इसका इस्तेमाल संभव है। इससे अपराधियों को फायदा मिल सकता है।



फर्जी नंबर वाली गाड़ी का खतरा भी बढ़ता है। कोई समान मॉडल की गाड़ी इस्तेमाल कर सकता है। उस पर किसी दूसरे वाहन का नंबर लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल पैदा करेगी। इसलिए ऐसे डेटा की सुरक्षा बेहद जरूरी है।



ट्रांसपोर्ट डिपार्मेंट की सरकारी प्रक्रिया अलग है

परिवहन विभाग से जुड़े जानकारों ने प्रक्रिया समझाई। सरकारी वेबसाइट पर RC डाउनलोड के लिए कई चरण हैं। पहले वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होता है। इसके बाद इंजन नंबर की जानकारी देनी होती है। फिर वाहन मालिक के पास OTP पहुंचता है।



OTP के सत्यापन के बाद RC डाउनलोड होती है। जानकारों के अनुसार यह सुरक्षा प्रक्रिया जरूरी है। यहां तक कि अधिकारी भी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। यही कारण है कि निजी वेबसाइट का दावा गंभीर है।





जबलपुर RTO से नहीं मिल सका जवाब

मामले में जबलपुर RTO से संपर्क करने की कोशिश हुई। RTO नीलू शर्मा का फोन बंद मिला। व्हाट्सएप संदेश का भी जवाब नहीं मिला।



इसलिए इस रिपोर्ट में उनका पक्ष शामिल नहीं हो सका। विभाग का आधिकारिक जवाब मिलना बाकी है।



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वेबसाइट का पता सार्वजनिक नहीं किया गया

द सूत्र ने समग्र फर्जीवाड़े से जुड़ी पिछली पड़ताल में वेबसाइट के पते बताए थे। खबरों के बाद वे वेबसाइट बंद होती गईं। इस बार वेबसाइट का पता साझा नहीं किया गया।



एक जिम्मेदार मीडिया हाउस होने के नाते इसका मकसद किसी गलत इस्तेमाल को रोकना है। हालांकि जांच एजेंसियों से किसी भी प्रकार का सहयोग मांगे जाने पर हम पूरी जानकारी साझा करेंगे।



सरकारी डेटा की सुरक्षा पर देशव्यापी सवाल

यह मामला सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं दिखता है। जांच में दिल्ली, महाराष्ट्र की गाड़ियों की जानकारी भी मिली। इससे पूरे देश के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के डेटा की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। परिवहन डेटा की सुरक्षा अब बड़ा मुद्दा बन गया है।



RC कई जगह पहचान के लिए इस्तेमाल होती है। इसका इस्तेमाल कुछ मामलों में पते के प्रमाण में होता है। अदालतों में भी दस्तावेज के रूप में इसका उपयोग हो सकता है। ऐसे दस्तावेज का गलत इस्तेमाल गंभीर खतरा बन सकता है।



साइबर सुरक्षा के दावों की भी होगी परीक्षा

सरकारें लगातार साइबर सुरक्षा मजबूत करने की बात कहती हैं। ऐसे मामलों से उन दावों की परीक्षा होती है। निजी वेबसाइट तक डेटा कैसे पहुंचा, इसकी जांच जरूरी है।



डेटा किस स्रोत से आया, यह भी पता लगाना होगा। जिम्मेदार एजेंसियों को पूरे सिस्टम की जांच करनी चाहिए।



इस पड़ताल का मकसद डेटा सुरक्षा की कमजोरी सामने लाना है। अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई अहम होगी।



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