प्रमोशन में आरक्षण मामला: आज हाईकोर्ट में सुनवाई, बेंच में लौटे जस्टिस विनय सराफ

Neel Tiwari | Jul 13, 2026, 08:30 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आज प्रमोशन आरक्षण मामले पर अहम सुनवाई होगी। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की बेंच सात याचिकाओं पर विचार करेगी। पिछली बार महाधिवक्ता की अनुपलब्धता से सरकार का पक्ष अधूरा रहा था। आज उनके जवाब पर सबकी नजर रहेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में प्रमोशन नियम 2025 को सात याचिकाओं में चुनौती दी गई है।
  • पहले इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया था।
  • बेंच में हुआ बदलाव , डिविजनल बेंच में जस्टिस विनय सराफ भी शामिल
  • सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
  • आज की सुनवाई में सरकार और याचिकाकर्ताओं के तर्क अहम रहेंगे।

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित प्रमोशन में आरक्षण मामले में आज 13 जुलाई को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। सात याचिकाओं पर एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई में सरकार ने समय मांगा था। अब महाधिवक्ता के पक्ष और प्रमोशन प्रक्रिया पर सबकी नजर है।



प्रमोशन में आरक्षण मामले पर आज फिर होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल प्रमोशन में आरक्षण मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई तय है। पिछली सुनवाई के बाद 13 जुलाई को इस मामले की सुनवाई तय हुई है। प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों की नजर इसी सुनवाई पर टिकी हुई है। यह मामला केवल प्रमोशन का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे से जुड़ा माना जा रहा है।



आज की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच करेगी। कॉज लिस्ट में यह मामला क्रमांक 24 पर सूचीबद्ध है। इस बेंच के सामने एक साथ कुल सात याचिकाओं पर सुनवाई होगी।



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पिछली सुनवाई में सरकार ने मांगा था समय

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की अनुपलब्धता का हवाला दिया गया था। अदालत को बताया गया था कि महाधिवक्ता यात्रा में हैं। इसलिए सरकार का पक्ष नहीं रखा जा सका। इसके बाद हाईकोर्ट ने 13 जुलाई की तारीख तय की थी।



उसी सुनवाई में सामान्य वर्ग की ओर से सरकार के प्रमोशन कदमों पर सवाल उठाए गए थे। दूसरी ओर अजाक्स की ओर से कहा गया था कि प्रमोशन पर कोई लिखित रोक नहीं है। इसी दौरान महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन को लेकर भी लंबी बहस हुई थी।



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आज महाधिवक्ता के पक्ष पर रहेगी सबसे बड़ी नजर

आज की सुनवाई का सबसे अहम पहलू सरकार का पक्ष रहेगा। पिछली तारीख पर सरकार ने कोई विस्तृत दलील नहीं रखी थी। अब उम्मीद है कि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्वयं अदालत के सामने अपनी बात रखेंगे।



सरकारी सूत्र पहले से संकेत दे चुके हैं कि सरकार यह बताएगी कि सभी प्रमोशन लंबित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन किए जा रहे हैं। यदि अदालत में यही पक्ष रखा जाता है, तो हाल के दिनों में सरकार द्वारा जारी कानूनी निर्देशों की भी चर्चा हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय और कानूनी निष्कर्ष अदालत के समक्ष रखी जाने वाली दलीलों पर निर्भर करेंगे।



जस्टिस सराफ की वापसी क्यों मानी जा रही अहम

इस सुनवाई की एक और बड़ी बात बेंच का गठन है। पहले इस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच में हो रही थी। अब जस्टिस विनय सराफ इस डिवीजन बेंच का हिस्सा हैं।



यही जस्टिस विनय सराफ पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच में इस मामले की विस्तृत सुनवाई कर चुके हैं। उसी बेंच ने 17 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रखा था। बाद में बेंच में बदलाव होने से मामला दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ। इसलिए कई कानूनी जानकार मानते हैं कि जस्टिस विनय सराफ का फिर से इस बेंच में होना सुनवाई की निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



लंच से पहले हो सकती है सुनवाई

कॉज लिस्ट के अनुसार प्रमोशन में आरक्षण का मामला 24वें क्रम पर सूचीबद्ध है। इससे पहले एक मेडिकल ऑफिसर से जुड़े मामले की सुनवाई होनी है। उस प्रकरण में एक साथ 78 याचिकाएं क्लब की गई हैं।



हालांकि एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की स्पेशल डिविजनल बेंच गठित की गई है। इसके कारण यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई लंच के पहले ही होगी। हालांकि अंतिम समय अदालत की कार्यवाही और अन्य मामलों की अवधि पर भी निर्भर करेगी।



लाखों कर्मचारियों की उम्मीद जुड़ी

यह मामला बीते पूरे साल से चर्चा में है। प्रदेश में प्रमोशन लंबे समय तक प्रभावित रहे हैं। इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और रिक्त पदों पर भी पड़ा है। सरकार ने हाल में प्रमोशन प्रक्रिया शुरू की है। दूसरी ओर यह मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।



ऐसे में आज की सुनवाई केवल अदालत की कार्यवाही नहीं होगी। इससे आगे की कानूनी दिशा भी तय हो सकती है। कर्मचारी संगठन, सरकारी विभाग और अधिवक्ता सभी की नजर आज की बहस पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत के सामने कौन से कानूनी तर्क रखे जाते हैं और सुनवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है।



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