प्रमोशन में आरक्षण: OBC पक्ष ने नियम लागू करने और प्रोविजनल प्रमोशन की मांग उठाई
समझें क्या है पूरा मामला
- 17 फरवरी 2026 से प्रमोशन में आरक्षण मामला जबलपुर हाईकोर्ट में सुरक्षित।
- OBC वर्ग की ओर से RPS लॉ एसोसिएशन ने दायर किया आवेदन।
- 2025 के पदोन्नति नियमों को तुरंत लागू करने की मांग।
- प्रोविजनल आधार पर DPC और प्रमोशन शुरू करने का अनुरोध।
- हजारों कर्मचारियों के करियर पर असर का हवाला देते हुए जल्द निर्णय की अपील।
आवेदन के जरिए प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की मांग
मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण मामला जारी है। 17 फरवरी 2026 से फैसला सुरक्षित है। नब्बे दिन की समयसीमा पार हो चुकी है। अब नई कानूनी पहल हुई है. RPS लॉ एसोसिएशन ने इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दायर किया है। अधिवक्ता पुष्पेंद्र कुमार शाह ने आवेदन दिया है। आवेदन में 2025 पदोन्नति नियम लागू करने की मांग है। एमपी सरकार को तुरंत निर्देश देने का आग्रह है। प्रोविजनल पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग है। उद्देश्य प्रशासनिक काम पर असर कम करना है।
नियम रुके तो सिस्टम ठप - OBC अधिवक्ता
RPS लॉ एसोसिएशन के अधिवक्ता पुष्पेंद्र कुमार शाह ने आवेदन दायर कर कहा है कि मामला सुरक्षित रखे जाने के बाद से राज्य में पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें नहीं हो पा रही हैं जिससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में गतिरोध की स्थिति बन गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे हैं लेकिन पदोन्नति न मिलने से वे अपने अधिकार से वंचित हो रहे हैं। इसी आधार पर राज्य सरकार से अंतरिम व्यवस्था के तहत नियम लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
अंतिम फैसले से पहले अंतरिम व्यवस्था की मांग
आवेदन में यह भी कहा गया है कि वर्तमान मामले में नियमों पर कोई स्पष्ट और पूर्ण स्थगन आदेश नहीं है। इसलिए राज्य सरकार को यह अनुमति दी जानी चाहिए कि वह अंतिम फैसले के अधीन रहते हुए 2025 के पदोन्नति नियमों को अस्थायी रूप से लागू कर सके। इसमें स्पष्ट किया गया है कि यह कदम केवल प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रखने के लिए आवश्यक है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इससे किसी भी पक्ष के अधिकारों पर अंतिम निर्णय से पहले कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ेगा। बल्कि केवल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लंबे इंतजार के बीच बढ़ी हलचल
यह पूरा मामला पहले से ही प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों से जुड़ा हुआ है। जो लंबे समय से प्रमोशन में आरक्षण से संबंधित अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अब इस नई याचिका के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। क्योंकि इसमें सीधे तौर पर पदोन्नति प्रक्रिया को शुरू करने और नियमों के क्रियान्वयन की मांग की गई है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या यह नई कानूनी पहल फैसले की दिशा या प्रक्रिया को किसी तरह प्रभावित करेगी।
अब नजरें हाईकोर्ट के अगले कदम पर
फिलहाल प्रमोशन में आरक्षण मामला कई महीनों से सुरक्षित रखा हुआ है। अब इस नए आवेदन ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है। कानूनी हलकों में भी इस पर चर्चा तेज है कि क्या अदालत इस आवेदन पर अलग से कोई अंतरिम आदेश पारित करेगी या इसे मुख्य फैसले के साथ ही देखा जाएगा। हालांकि यहां पर एक उम्मीद यह भी जाग रही है कि इस आवेदन के जरिए कोर्ट के संज्ञान में यह जरूर आ जाएगा कि इस मामले को सुरक्षित रखे हुए 90 दिन से अधिक का समय हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना है। इससे यह भी उम्मीद लगाई जा रही है कि जल्द से जल्द मामले में अंतिम आदेश जारी हो जाएगा। फिलहाल प्रदेश के लाखों कर्मचारी एक बार फिर इस उम्मीद के साथ हाईकोर्ट की ओर देख रहे हैं कि उनके लंबे इंतजार का समाधान जल्द सामने आएगा।
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