PTS सागर की मैस के टेंडर में फर्जीवाड़ा : दस्तावेजों में की गई हेराफेरी!, EOW पहुंचा मामला
News in Short :
- सागर पीटीएस की मैस के लिए एक करोड़ का टेंडर किया ऑफलाइन
- नियम विरुद्ध 12 साल से पीटीएस में जमे इंस्पेक्टर पर गड़बड़ी के आरोप
- नगर निगम पार्षद ने ईओडब्ल्यू में की मैस टेंडर में फर्जीवाड़े की शिकायत
- टेंडर में चार अपात्र फर्मों को गाइडलाइन से बाहर जाकर किया शामिल
- एक करोड़ के मैस टेंडर की प्रक्रिया में सामने आए कई लूप होल
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश पुलिस की सागर स्थित प्रशिक्षण शाला की मैस के टेंडर में फर्जीवाड़ा सामने आया है। चहेती फर्म को काम दिलाने टेंडर की शर्तों को नजरअंदाज किया गया। अब इस हेराफेरी की शिकायत स्पेशल डीजी (ट्रेनिंग) और ईओडब्ल्यू तक पहुंची है। टेंडर को नियम विरुद्ध चहेती फर्म को दिलाने के लिए प्रक्रिया के बीच से ही कई फर्मों को बाहर किया गया।
पीटीएस प्रबंधन की अनदेखी और टेंडर प्रक्रिया में छेड़छाड़ से विभागों को लाखों का नुकसान पहुंचाया गया है। जबकि प्रशिक्षण में शामिल आरक्षकों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हुई। शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण इकाई ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पीटीएस एसपी लवली सोनी से विस्तार से जानकारी तलब की गई है।
पीटीएस के टेंडर से कमाई
पुलिस प्रशिक्षण शाला सागर में जून 2025 को ट्रेनिंग के लिए आने वाले आरक्षकों के लिए मैस का टेंडर जारी किया गया था। करीब एक करोड़ रुपए के इस टेंडर को ऑनलाइन आमंत्रित किया गया लेकिन बाद में पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई। टेंडर में पांच से ज्यादा फर्मों में प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन चहेती कंपनी को काम देने के लिए शर्तों में छेड़छाड़ की गई।
पीटीएस के ही एक अधिकारी के इशारे पर कुछ फर्मों के दस्तावेज गायब कर दिए गए। वहीं निर्धारित मानकों पर खरे न उतरने वाली फर्मों को पात्रता दे दी गई। इसके जरिए पीटीएस के अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने का काम किया है। इन आरोपों के साथ सागर नगर निगम के पार्षद ताहिर खान ने स्पेशल डीजी रवि कुमार गुप्ता से शिकायत की है।
अपात्र फर्मों को माना पात्र
टेंडर शर्तों की अनदेखी के जरिए पीटीएस के जिम्मेदारों ने अपात्र फर्मों की भागीदारी तय की। इसके लिए भंडार क्रय नियमों को भी ताक पर रखा गया। एक करोड़ का टेंडर होने के बावजूद प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई। फर्म शिवाय एसोसिएट को 19 जून को टेंडर फॉर्म जारी किया गया जबकि फीस 20 जून को जमा हुई है। बिना फीस टेंडर फॉर्म की बिक्री भी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। इसके अलावा टेंडर में शामिल 4 अन्य फर्मों की टेंडर शुल्क सरकारी खाते में जमा ही नहीं कराई गई।
दस्तावेजों की कमी नजरअंदाज
आरक्षकों की मैस के टेंडर देने में हर स्तर पर लापरवाही और हेराफेरी की गई। टेंडर प्रक्रिया में शामिल फर्मों के कर्मचारियों का चिकित्सकीय परीक्षण और पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी था। इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया के दौरान इन दस्तावेजों को अनदेखा किया गया।
पंकज को टेंडर के साढ़े 6 माह बाद सतना से वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया था। इसका सीधा मतलब है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान पंकज द्वारा सर्टिफिकेट नहीं लगाया गया। जरूरी होने के बाद भी इसकी कमी को नजरअंदाज किया गया।
टर्नओवर और अनुभव भी नहीं
टेंडर प्रक्रिया में जिन फर्मों को पात्र माना गया उसे से चार जरूरी शर्तों को पूरा ही नहीं करती थी। टेडर के लिए फर्म को वार्षिक टेंडर 50 लाख रुपए और तीन साल का केटरिंग अनुभव जरूरी था। पीटीएस की टेंडर कमेटी ने इसकी भी परवाह नहीं की।
किसी के पास तीन साल केटरिंग का अनुभव और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का पंजीयन नहीं था, तो कोई फर्म टर्नओवर के मामले में अपात्र थी। टेंडर कमेटी ने चहेती फर्म को इन सब बाध्यताओं को अनदेखा कर उपकृत कर गलत तरीके से अनुबंध किया।
आरक्षकों की सेहत भगवान भरोसे
पीटीएस सागर में 400 आरक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं। टेंडर हासिल करने वाली फर्म द्वारा आरक्षकों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना था। फर्म ने दिन में चाय, नाश्ते से लेकर दो समय के भोजन के लिए केवल 115 रुपए की दर पर टेंडर उठाया है। इसका असर आरक्षकों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर नजर आ रहा है। अच्छा भोजन न मिलने की शिकायतें भी उठती रही हैं लेकिन इन्हें प्रशिक्षण प्रभावित होने का भय दिखाकर दबा दिया गया।
डीपी और ईओडब्ल्यू के पास जांच
पुलिस प्रशिक्षण केंद्र की मैस के टेंडर के खेल की शिकायत पर ईओडब्ल्यू द्वारा जांच की जा रही है। वहीं स्पेशल डीजी प्रशिक्षण रवि कुमार गुप्ता के आदेश पर पीटीएस प्रबंधन से जवाब तलब किया गया है। इसकी जांच डीआईजी प्रशिक्षण को सौंपी गई है।
पीटीएस एसपी लवली सोनी का कहना है कि मैस के टेंडर की शिकायत पर जांच की जा रही है। उन्होंने मुख्यालय के आदेश के आधार पर कई बिंदुओं की जांच की है। इसके आधार पर जल्द रिपोर्ट तैयार कर प्रशिक्षण शाखा को भेजी जाएगी।
FAQ
- PTS सागर मैस टेंडर में क्या फर्जीवाड़ा हुआ है?
1 करोड़ के मैस टेंडर को नियम विरुद्ध ऑफलाइन रखा गया। चहेती फर्म शिवाय एसोसिएट को 19 जून को बिना फीस टेंडर फार्म दिया, फीस 20 जून को ली गई। 4 अन्य फर्मों की फीस सरकारी खाते में जमा नहीं हुई। अपात्र फर्मों को पात्र माना गया। - इस मामले में शिकायत किसने की और कार्रवाई क्या हुई?
सागर नगर निगम के पार्षद ताहिर खान ने स्पेशल डीजी ट्रेनिंग रवि कुमार गुप्ता और EOW से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया कि PTS के अधिकारियों ने जेब भरने के लिए नियम तोड़े। PHQ की प्रशिक्षण इकाई ने जांच शुरू कर दी है और PTS एसपी लवली सोनी से विस्तार से जानकारी मांगी है।
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