PWD के बजट में सड़कों की गारंटी की साजिश, अब ठेकेदार ही करेंगे मरम्मत
News in Short
- लोक निर्माण विभाग ने गारंटी अवधि वाली सड़कों पर व्हाईट टॉपिंग की स्वीकृति दी।
- कार्यपालन यंत्री और अधीक्षण यंत्री ठेकेदारों के साथ मिलकर स्वीकृति दे रहे थे।
- अफसरों पर कार्यवाही की जा रही है, अनुमतियों को निरस्त किया जा रहा है।
- चीफ इंजीनियर पूरे प्रदेश में स्वीकृत व्हाईट टॉपिंग की जांच करेंगे।
- संबंधित अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव तैयार होगा।
News in Detail
मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए व्हाइट टॉपिंग के कामों को स्वीकृति जारी की थी। इनमें से ज्यादातर सड़कें ऐसी हैं, जिनकी परफॉर्मेंस अवधि अभी भी शेष है। इन सड़कों की मरम्मत निर्माण एजेंसियों के जरिए ही कराई जानी है। इसके बावजूद ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों द्वारा गारंटी पीरियड को अनदेखा किया गया।
ठेकेदारों से मरम्मत कराने की जगह अधिकारियों ने इन सड़कों पर अलग से व्हाइट टॉपिंग कराने की मंजूरी जारी कर दी। इन कामों के जरिए ठेकेदारों को लाखों रुपए का मुनाफा कराने की तैयारी थी। मामला उजागर होने के बाद चीफ इंजीनियर स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
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जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अनुशंसा
PWD उप सचिव एआर सिंह ने चीफ इंजीनियर स्तर पर जांच के निर्देश जारी किए हैं। जिसके बाद परफॉर्मेंस अवधि वाली सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के कामों का परीक्षण कराया जाना है। वहीं, दूसरी ओर गारंटी पीरियड को अनदेखा करने वाले इंजीनियर और अन्य अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
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ठेकेदारों को लाभ, विभाग को बट्टा
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए व्हाइट टॉपिंग कराई जाती है। इस पर हर साल भारी भरकम राशि लोक निर्माण विभाग खर्च करता है। तकनीकी अधिकारियों द्वारा प्रदेशभर में इसी काम को मंजूरी दी गई थी। इससे विभाग पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार आ रहा था। जबकि गारंटी पीरियड होने से सड़कों के मेंटेनेंस की जवाबदारी निर्माण एजेंसी की है।
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मरम्मत की आड़ में घोटाले की साजिश
लोक निर्माण विभाग में सड़कों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की तैयारी कर ली गई थी। अब विभाग इस मामले में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से लेकर संभाग और जिला स्तर तक सड़कों की मरम्मत की जांच करा रहा है। बीते सालों में बनी ऐसी सभी सड़कों की जानकारी जुटाई जा रही है जिन पर पिछले महीनों में व्हाइट टॉपिंग कराई गई है। गारंटी पीरियड वाली सड़कों पर अलग से टॉपिंग कराने वाले अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।