PWD का नया फरमान, सड़क किनारे पेड़ सूखे तो सस्पेंड होंगे SDO और इंजीनियर
समझें क्या है पूरा मामला
- लोक निर्माण विभाग ने सड़क किनारे लगे पेड़ों पर सख्ती का फैसला किया है।
- अब पेड़ सूखने या देखभाल में कमी पर एसडीओ और सब इंजीनियर सस्पेंड होंगे।
- अभी तक सिर्फ घटिया सड़क निर्माण पर ही ऐसी कार्रवाई होती थी।
- पौधों के तने के चारों ओर 45 सेंटीमीटर मल्चिंग अनिवार्य की गई है।
- भोपाल में एक सब इंजीनियर को इसी वजह से पहले सस्पेंड किया जा चुका है।
लोक निर्माण विभाग ने सड़क किनारे लगे पेड़ों को लेकर सख्त कदम उठाया है। अब तक घटिया सड़क निर्माण पर इंजीनियरों को सस्पेंड किया जाता था। अब पेड़ सूखने या उनकी देखभाल में कमी पर भी कार्रवाई होगी। विभाग ने एसडीओ और सब इंजीनियर को सीधे जिम्मेदार माना है। प्रमुख अभियंता को सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में एक सब इंजीनियर को इसी वजह से पहले सस्पेंड किया गया है।
क्या है नया आदेश
राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग मंत्रालय ने यह ताजा निर्देश जारी किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि पौधों की देखभाल में लापरवाही नहीं चलेगी। हर पौधे के तने के चारों ओर मल्चिंग जरूरी बताई गई है। यह मिट्टी और मुरम से तय मानक अनुसार 45 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान कई जगह इन निर्देशों का पालन नहीं मिला।
मल्चिंग के नए मानक
मंत्रालय ने सभी वरिष्ठ अभियंताओं को सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। भोपाल में इसी मुद्दे पर एक उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है। बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए थे।
अफसरों पर सीधी जिम्मेदारी
विभाग ने साफ चेतावनी दी है। निर्देशों के पालन में लापरवाही या उदासीनता मिलने पर कार्रवाई तय है। संबंधित अधिकारी, एजेंसी और ठेकेदार तीनों पर नियमों के तहत दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसकी सीधी जिम्मेदारी एसडीओ (Sub Divisional Officer) को दी गई है।
निर्देशों की पूरी सूची
आदेश में अधिकारियों के लिए साफ बिंदु भी दिए गए हैं। हर पौधे के तने के चारों ओर तय मानक अनुसार मल्चिंग होनी चाहिए। पौधों की सुरक्षा और रखरखाव की निगरानी लगातार होनी चाहिए। संबंधित अधिकारी को खुद निरीक्षण करना होगा। एजेंसी या ठेकेदार निर्देशों की अनदेखी न करें, यह भी उन्हीं को देखना होगा। पौधों के संरक्षण में लापरवाही मिलते ही तुरंत कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
यह पहला मामला नहीं है। विभाग पहले भी ऐसी लापरवाही पर कदम उठा चुका है। भोपाल में एक सब इंजीनियर को इसी वजह से पहले सस्पेंड किया गया है। इससे साफ है, विभाग अब पौधों की देखभाल भी गंभीरता से ले रहा है। पहले सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता पर फोकस रहता था। अब हरियाली बचाना भी जिम्मेदारी में शामिल हो गया है।
सड़क निर्माण में भी सख्ती
विभाग पहले से ही घटिया सड़क निर्माण पर सख्त कार्रवाई करता रहा है। कई मामलों में इंजीनियरों को निलंबित किया जा चुका है। सड़क धंसने या गुणवत्ता में कमी मिलने पर तुरंत सस्पेंशन होता रहा है। अब उसी तरह की सख्ती पेड़ों की देखभाल में भी लागू होगी। इससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग अपनी जवाबदेही का दायरा बढ़ा रहा है। सिर्फ निर्माण पूरा करना अब काफी नहीं माना जाएगा। निर्माण के बाद की देखभाल भी उतनी ही अहम मानी जाएगी।
पौधरोपण पर भी सवाल
सरकार हर साल सड़क किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करती है। इस पर सरकारी खजाने से बड़ी राशि भी खर्च होती है। लेकिन देखभाल की कमी से कई पौधे कुछ महीनों में ही सूख जाते हैं। इससे पौधरोपण अभियान का मकसद अधूरा रह जाता है। नए निर्देश इसी कमी को दूर करने की कोशिश हैं। विभाग चाहता है कि हर पौधा सुरक्षित रहे और पेड़ बन सके। इसके लिए मैदानी अधिकारियों को सीधे जवाबदेह बनाया गया है।
आगे क्या बदलेगा
इंजीनियरों के लिए अब जिम्मेदारी सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क किनारे लगे हर पौधे की सेहत का हिसाब भी उन्हें रखना होगा। मॉनिटरिंग में किसी तरह की ढिलाई अब सीधे सस्पेंशन तक ले जा सकती है। विभाग के इस कदम से मैदानी अधिकारियों में हलचल है।
जरूरी FAQ
PWD का नया आदेश क्या कहता है?
लोक निर्माण विभाग ने आदेश दिया है कि सड़क किनारे लगे पेड़ सूखने या उनकी देखभाल में कमी पाए जाने पर संबंधित एसडीओ और सब इंजीनियर को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा और सस्पेंड किया जा सकता है।
मल्चिंग को लेकर क्या मानक तय किया गया है?
हर पौधे के तने के चारों ओर मिट्टी और मुरम से 45 सेंटीमीटर तक मल्चिंग करना अनिवार्य किया गया है, ताकि पौधे की जड़ों को नमी और सुरक्षा मिल सके।
क्या इस तरह की कार्रवाई पहले भी हुई है?
हां, भोपाल में एक सब इंजीनियर को पेड़ों की देखभाल में लापरवाही पाए जाने पर पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। विभाग ने अब इसे व्यापक नीति बना दिया है।
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