MP में परीक्षा सिस्टम बदला! पेपर लीक रोकने अब जिला स्तर पर बनेंगे क्वेश्चन पेपर
समझें क्या है पूरा मामला
एमपी में तिमाही परीक्षा प्रणाली बदली गई है।
प्रश्नपत्र अब जिला स्तर पर तैयार होंगे।
पेपर लीक का असर सीमित करने की तैयारी है।
प्रश्नपत्रों पर स्कूल डाइस कोड वाटरमार्क होगा।
परीक्षा सुरक्षा के लिए नया कदम उठाया गया।
मध्यप्रदेश में स्कूल परीक्षाओं की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं की तिमाही परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रश्नपत्र राज्य स्तर पर तैयार नहीं होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के अपर संचालक रविंद्र सिंह ने कहा है कि इस बार प्रश्नपत्र जिले स्तर पर तैयार होंगे।
दोबारा परीक्षा के खर्च से डर
स्कूल शिक्षा विभाग पेपर लीक से ज्यादा दोबारा परीक्षा कराने के खर्च से चिंतित है। पिछले अनुभवों में पेपर लीक के बाद पूरे प्रदेश में दोबारा परीक्षा करानी पड़ी थी। इसी वजह से नौवीं से 12वीं तक की तिमाही परीक्षाओं की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।
नौवीं में ब्रिज कोर्स पर खास फोकस
नौवीं की परीक्षा में करीब 50 प्रतिशत सवाल ब्रिज कोर्स से पूछे जाएंगे। अंग्रेजी में बेसिक और स्टैंडर्ड, दो अलग प्रश्नपत्र होंगे। नौवीं और 10वीं में गणित के भी दो पेपर तैयार होंगे। हर बंडल पर डाइस कोड, वाटरमार्क और सील रहेगी।
परीक्षा की तारीखें और समय सारिणी
कक्षा 9वीं और 11वीं की तिमाही परीक्षा सात सितंबर से शुरू होगी। यह 17 सितंबर तक चलेगी। परीक्षाएं दो पालियों में होंगी। नौवीं-10वीं की परीक्षा सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक होगी। 11वीं-12वीं की परीक्षा दोपहर दो से शाम पांच बजे तक होगी। करीब 30 लाख विद्यार्थी इसमें शामिल होंगे। परिणाम 25 सितंबर तक जारी होंगे।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
वही स्कूल शिक्षा विभाग के अपर संचालक रविंद्र सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस बार जिले स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी की गई है।
अब जिला स्तर पर बनेंगे प्रश्नपत्र
पहले प्रश्नपत्र राज्य स्तर पर तैयार होते थे। अब यह जिम्मेदारी जिला स्तर को दी गई है। इससे फायदा यह होगा कि पेपर लीक होने पर सिर्फ संबंधित जिले की परीक्षा प्रभावित होगी। कार्रवाई का दायरा भी जिले और स्कूल तक सीमित रहेगा।
ब्लूप्रिंट और मास्टर ट्रेनर की भूमिका
प्रश्नपत्र विमर्श पोर्टल पर मौजूद ब्लूप्रिंट के आधार पर बनेंगे। यह ब्लूप्रिंट जिला शिक्षा अधिकारी के लॉगिन पर उपलब्ध रहेगा। उत्कृष्ट विद्यालयों के प्राचार्य इसके आधार पर प्रश्नपत्र तैयार कराएंगे। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर शिक्षकों को इस काम में प्राथमिकता दी जाएगी। यह प्रक्रिया दो सितंबर तक पूरी करनी होगी। तीन सितंबर तक प्रश्नपत्र स्कूलों तक पहुंचाए जाएंगे।
फोटोकॉपी और सुरक्षा के सख्त नियम
प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी परीक्षा वाले दिन ही कराई जाएगी। इससे पेपर लीक होने का खतरा कम होगा। अगर किसी स्कूल को निजी दुकान से फोटोकॉपी करानी पड़े, तो शिक्षक की मौजूदगी अनिवार्य होगी। प्रिंटिंग के बाद सॉफ्ट कॉपी तुरंत डिलीट करनी होगी।
हर पेपर पर डाइस कोड का वाटरमार्क
इस बार सुरक्षा के नए उपाय भी अपनाए जा रहे हैं। हर प्रश्नपत्र पेज पर स्कूल का डाइस कोड (DISE – District Information System for Education), सील या बोर्ड कोड का वाटरमार्क होगा।
अगर परीक्षा से पहले किसी प्रश्नपत्र की फोटो बाहर आती है, तो वाटरमार्क से पता चल जाएगा कि लीक किस स्कूल से हुआ। इससे जांच एजेंसियों को स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
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