राहुल के छात्रों की गूंज आयोजन से पहले कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां ! भद्द न पिट जाए ?
हम राहुल गांधी के कार्यक्रम में जाएंगे। ये कहना था उस ऑटो ड्राइवर का जिसने हमें हमारे होटल तक छोड़ा। 19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम करने आ रहे हैं। लेकिन क्या ये शहर और कार्यक्रम स्थल तैयार है ?
इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए बड़े बड़े होर्डिंग लगे हैं। राहुल गांधी के कट आउट भी सड़कों पर दिखाई देंगे। लेकिन पूरा शहर राहुल के होर्डिंग या कट आउट से पटा नहीं है। इंदौर के भंवरकुआ इलाके में गाड़ियों के जरिए, कार्यक्रम का प्रचार किया जा रहा है। लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट हो रहा है। बोला जा रहा है कि छात्र संघ चुनाव, परीक्षाओं में हो रहे घपले घोटाले और अव्यवस्था को लेकर, जो लड़ाई राहुल गांधी लड़ रहे हैं, उसके लिए छात्र उनका साथ दें।
मगर तैयारी का क्या ?
इंदौर के रीजनल पार्क में ये कार्यक्रम है। द सूत्र की टीम जब 18 सितंबर को ग्राउंड पहुंची तब हमें कई कमियां दिखीं। मैदान गीला है। गाड़ियों के टायर मिट्टी में फंस रहे हैं। कांग्रेस का दावा था कि कार्यक्रम में एक लाख लोग शामिल होंगे। लेकिन मैदान का क्षेत्रफल इतना बड़ा लगता नहीं। शायद कांग्रेस भी ये बात जानती है। इसलिए दस हजार लोगों के आने का दावा अब किया जा रहा है। हालांकि मैदान दस हजार लोगों के लिए भी पर्याप्त दिखाई नहीं देता।
IDA की शर्तों के साथ तैयारी
IDA ने जिन शर्तों के साथ राहुल के कार्यक्रम को मंजूरी दी है, उन शर्तों को पूरा करने में कांग्रेस लगी है। कहीं जेसीबी के जरिए पाइपलाइन डाली जा रही है, तो कहीं टॉयलेट की व्यवस्था हो रही है। बड़े और विशेष मेहमानों के लिए कुर्सियां लगाई जा रही हैं। लेकिन जिन छात्रों के लिए कार्यक्रम होना है, उन छात्रों को एक घंटा खड़े रहकर राहुल को सुनना पड़ सकता है। ऊपर से जमीन गीली है। कहीं कहीं पानी और कीचड़ भी है। लेकिन कांग्रेस का दावा है कि वो IDA की 31 शर्तों को पूरा करेगी।
क्या वोट में तब्दील होगी भीड़ ?
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं के साथ को वोट में बदलना है। कांग्रेस के कार्यक्रम में भीड़ तो आ रही है, लेकिन वोट उतने नहीं आ रहे। अब इंदौर में राहुल गांधी का ये कार्यक्रम क्या कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगा ये बड़ा सवाल है। इंदौर में कांग्रेस का कार्यक्रम साफ इशारा करता है कि वो जेन जी को ही साधना चाहती है। यहां कोचिंग का हब है। MPPSC, पुलिस, SSC जैसे एग्जाम की तैयारी करने वाले लाखों छात्र यहां हैं। अब ये छात्र कांग्रेस के वोटर बनते हैं या नहीं, यही यक्ष प्रश्न है।
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