राहुल गांधी का अगला पड़ाव भोपाल होगा? वेटिंग शिक्षक के आंदोलन पर चिट्ठी लिखने के बाद दौरे की चर्चा तेज
राहुल आना चाहते हैं तो आएं
हम तो किसी को नहीं बुला रहे। हमने जिनको बुलाया वो आए नहीं, जिनको नहीं बुलाया वो आना चाहते हैं। हम शिक्षक हैं, हम किसी को क्यों मना करेंगे। सरकार की तरफ से तो कोई पार्षद तक आकर हमसे नहीं मिला। राहुल गांधी आना चाहते हैं तो आएं।
ये कहना है इशांत श्रीवास्तव का। इशांत भी उन वेटिंग शिक्षकों में शामिल हैं, जो लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर पिछले 46 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक चिट्ठी लिखी, जिसके बाद ये कयास लगने लगे हैं कि क्या राहुल गांधी का अगला पड़ाव भोपाल होने वाला है?
क्या राहुल गांधी के भोपाल आने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है? हाल ही में राहुल गांधी बालाघाट के दौरे पर आए थे। वेटिंग शिक्षकों को उम्मीद थी कि शायद राहुल उनसे भी मुलाकात करने आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
'द सूत्र' ने लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर आंदोलन कर रहे वोटिंग शिक्षकों से बात भी की थी। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टीम से बातचीत जारी है, जल्द ही कोई अपडेट आएगा। और लीजिए राहुल गांधी ने पहला कदम तो बढ़ा दिया है। वेटिंग शिक्षकों के समर्थन में चिट्ठी लिख दी है।
पहले इंदौर, फिर बालाघाट
19 सितंबर को राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम किया। इसी कार्यक्रम में राहुल गांधी के सामने वर्ग 2 की एक वेटिंग अभ्यर्थी ने पदवृद्धि का मुद्दा उठाया। इसी दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें भी शिक्षकों के आंदोलन में शामिल होना है। इसके बाद महिला अभ्यर्थी ने कहा कि राहुल गांधी जब चाहें आ सकते हैं। इसी के बाद सारा सिलसिला शुरु हुआ और भोपाल से राहुल गांधी के नाम ज्ञापन लिखा गया।
राहुल गांधी का शेड्यूल जल्द तय
'द सूत्र' ने जब डीपीआई के बाहर आंदोलन कर रहे शिक्षकों से पूछा कि राहुल गांधी कब तक आ सकते हैं। तब हमें बताया गया कि राहुल गांधी की टीम से बातचीत जारी है। उनकी टीम ने कहा कि राहुल गांधी का शेड्यूल जल्द तय किया जाएगा।
इसके बाद बालाघाट में हुई आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में राहुल गांधी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, लेकिन भोपाल नहीं आए। वेटिंग अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि शायद उनका इंतजार खत्म होने वाला है, पर राहुल बालाघाट से ही लौट गए।
उज्जैन आ सकते हैं राहुल
दूसरी तरफ ऐसी भी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि राहुल जल्द उज्जैन आ सकते हैं। दावे किए जा रहे हैं कि राहुल गांधी 100 रुपए चंदा अभियान की शुरुआत उज्जैन से करेंगे। ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में भी शामिल होंगे। दावा है कि कांग्रेस उज्जैन की हर विधानसभा में 30 हजार परिवारों से संपर्क जुटा रही है। यानी एक महीने के अंदर अंदर राहुल गांधी का तीसरा मध्यप्रदेश दौरा हो सकता है।
राहुल के आने से मिलेगी नौकरी?
सबसे बड़ा सवाल राहुल के आने या न आने का नहीं है। सवाल ये है कि राहुल से इन वेटिंग शिक्षकों को इतनी उम्मीद क्यों है? क्या राहुल गांधी के आने से इन वेटिंग शिक्षकों को नौकरी मिल जाएगी? राहुल गांधी सत्ता में नहीं हैं, लेकिन उनसे इतनी उम्मीद इन युवाओं को क्यों है? इसका भी आंदोलन में शामिल शिक्षक इशांत श्रीवास्तव ने जवाब दिया।
इशांत का कहना है कि राहुल गांधी भले सत्ता में नहीं हैं, लेकिन वो युवाओं की और बेरोजगारों की आवाज उठा रहे हैं। हमने कभी उन्हें नहीं बुलाया, उन्होंने खुद हमारे आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई। सरकार के मंत्री तो हमसे मिलने नहीं आ रहे, राहुल आना चाहते हैं तो आएं। हम सबका स्वागत करेंगे।
दीप्ति सिंह पर विभाग का दावा
दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा विभाग ने राहुल गांधी से इंदौर में मुलाकात करने वाली दीप्ति सिंह को लेकर बड़ा दावा किया है। विभाग का कहना है कि कर्मचारी चयन मंडल ने जो लिस्ट जारी की थी उसमें दीप्ति सिंह का नाम न चयन सूची में था न ही वेटिंग लिस्ट में। विभाग का कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को नौकरी दी चुकी है।
राहुल पर टेटवाल का निशाना
तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल भी अब राहुल गांधी के खिलाफ मुखर हो गए हैं। टेटवाल ने कहा कि राहुल अनगाइडेड मिसाइल हैं। उनको पता ही नहीं लगता कहां दागना है ? उनका निशाना भी बेकार जाता है। मंत्री का कहना है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने का काम कर रही है। लाखों युवाओं को रोजगार भी दिया है।
- राहुल गांधी का भोपाल आने का क्या कारण है?
राहुल गांधी का भोपाल आने का कारण वेटिंग शिक्षकों के आंदोलन में शामिल होना और उनके समर्थन में चिट्ठी लिखना है। शिक्षक इशांत श्रीवास्तव ने कहा कि अगर राहुल आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। - वेटिंग शिक्षकों का आंदोलन क्यों हो रहा है?
वेटिंग शिक्षकों का आंदोलन पिछले 46 दिनों से चल रहा है, जिसमें वे नौकरी की मांग कर रहे हैं। इन शिक्षकों को सरकार के मंत्री या पार्षद ने नहीं मिलने की स्थिति में, वे राहुल गांधी से उम्मीद लगाए बैठे हैं। - क्या राहुल गांधी के आने से वेटिंग शिक्षकों को नौकरी मिलेगी?
इस बाबत सपना और उम्मीदें तो हैं, लेकिन राहुल गांधी स्वयं सत्ता में नहीं हैं। फिर भी वेटिंग शिक्षकों को उम्मीद है कि उनकी आवाज उठाने से किसी तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है।