रेलवे ने जमीन ली तो नौकरी जरूरी नहीं, हाईकोर्ट का फैसला, पुरानी पॉलिसी खत्म तो दावा भी खत्म
News in Short
- हाईकोर्ट ने रेलवे लैंड लूजर्स की नौकरी की मांग खारिज की।
- हाईकोर्ट ने कहा, नौकरी देना सरकार/रेलवे का विवेकाधीन फैसला।
- आवेदन के समय योग्यता जरूरी, बाद में पास होने का लाभ नहीं।
- 2019 में रेलवे ने जमीन के बदले नौकरी की पॉलिसी खत्म कर दी थी।
- CAT जबलपुर के फैसले को हाईकोर्ट ने सही ठहराया।
News In Detail
जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी पाना कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह केवल सरकारी नीति पर निर्भर करता है, न कि किसी व्यक्ति का हक। पॉलिसी खत्म होने के बाद नौकरी की मांग करना कानूनन मान्य नहीं होगा।
क्या था पूरा मामला?
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई लोगों ने याचिका लगाई थी, जिनकी जमीन रेलवे प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी। इन लोगों का कहना था कि जमीन देने के बदले उन्हें रेलवे में नौकरी दी जाए।
इन याचिकाओं में कमलेश कुशवाहा समेत कुल छह लोगों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फैसले को चुनौती दी थी, जिसने उनकी मांग पहले ही खारिज कर दी थी।
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इसलिए नहीं मिली रेलवे की नौकरी
कोर्ट में सामने आया कि जब इन लोगों ने पहली बार नौकरी के लिए आवेदन किया, तब वे केवल 8वीं पास थे, जबकि रेलवे की नीति के अनुसार 10वीं पास या ITI जरूरी था। इसी वजह से उनके आवेदन 2017 से 2020 के बीच खारिज कर दिए गए थे।
10वीं पास करने से भी नहीं मिला फायदा
याचिकाकर्ताओं ने बाद में 10वीं पास कर दोबारा आवेदन किया, लेकिन तब तक 11 नवंबर 2019 को रेलवे ने जमीन के बदले नौकरी देने वाली पूरी पॉलिसी ही खत्म कर दी थी। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि जब पॉलिसी ही खत्म हो चुकी है, तो उसके आधार पर नौकरी नहीं मांगी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि नौकरी देना कोई अधिकार नहीं, बल्कि विभाग का निर्णय है। योग्यता उसी समय देखी जाएगी जब आवेदन किया गया था। बाद में योग्यता हासिल करने का कोई लाभ नहीं मिलेगा। पहले आवेदन खारिज होने पर उसे चुनौती नहीं देना भी याचिकाकर्ताओं की गलती रही
भेदभाव का तर्क भी खारिज
याचिकाकर्ताओं ने कुछ पुराने मामलों का हवाला देकर छूट की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कहा कि हर केस अलग होता है। अगर किसी को पहले छूट मिली है, तो इसका मतलब यह नहीं कि सभी को मिलेगी।
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हाईकोर्ट ने अंतिम फैसले में कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि अब रेलवे में ऐसी कोई नीति लागू नहीं है, जो जमीन के बदले नौकरी की गारंटी देती हो। साथ ही, CAT जबलपुर के फैसले को सही ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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क्या है आदेश का मतलब
यह फैसला साफ करता है कि अगर सरकार आपकी जमीन लेती है, तो बदले में मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन नौकरी मिलना जरूरी नहीं है।
और अगर कोई योजना बंद हो जाती है, तो उसके आधार पर बाद में दावा नहीं किया जा सकता। अब इस आदेश के आधार पए सीधी बात यह कि जमीन देने का मतलब नौकरी पक्की होना नहीं है। नियम और समय दोनों मायने रखते हैं।