फर्जी रेलवे भर्ती बोर्ड का खुलासा, भोपाल से इंजीनियरिंग छात्रा गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- MP STF ने रेलवे भर्ती ठगी गिरोह पकड़ा।
- 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा ऋचा गिरफ्तार हुई।
- गिरोह फर्जी रेलवे वेबसाइट चलाता था।
- युवाओं से नौकरी के नाम पर पैसे लिए गए।
- उम्मीदवारों को नकली दस्तावेज और सैलरी दी गई।
अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा
मध्य प्रदेश STF ने रेलवे नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बनाकर युवाओं को नौकरी का झांसा देता था। फर्जी मेडिकल, इंटरव्यू और सैलरी स्लिप के जरिए उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया जाता था। मामले में भोपाल की 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा ऋचा तिवारी उर्फ दिव्या का नाम भी सामने आया है।
गिरोह करता कैसे था ठगी
एसटीएफ के मुताबिक, इस रैकेट का मुख्य सरगना रांची का दिलीप कुमार पांडे था। वह खुद को रेलवे भर्ती बोर्ड का अधिकारी बताता था। गिरोह बेरोजगार युवाओं को ग्रुप C, ग्रुप D और टिकट कलेक्टर जैसे पदों का झांसा देता था।
गिरोह ने रेलवे बोर्ड की असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी। इस पर पीड़ितों के रोल नंबर भी अपलोड किए जाते थे। इससे पीड़ितों को अपनी चयन प्रक्रिया पर पूरा भरोसा हो जाता था।
असली स्टेशनों पर दी जाती थी ड्यूटी
इस गिरोह ने बिहार और कोलकाता के पास फर्जी रेलवे ट्रेनिंग सेंटर भी चला रखे थे। चुने गए उम्मीदवारों के मेडिकल चेकअप असली रेलवे अस्पतालों में कराए जाते थे।
कुछ उम्मीदवारों को बिहार के हिलसा सहित कुछ रेलवे स्टेशनों पर ड्यूटी पर भी रखा गया था। यहां उन्हें गिरोह की तरफ से नकली सैलरी स्लिप और वेतन बांटा जाता था। इस मामले में कुछ स्टेशन मास्टर भी जांच के दायरे में हैं। उन पर भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
अब तक की कानूनी कार्रवाई
इस मामले में एसटीएफ ने कुल 9 अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। इनमें 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। सागर और भोपाल के कई थानों से जांच अपने हाथ में लेने के बाद एसटीएफ ने इस नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं।
इस धोखाधड़ी का पहला मामला 9 सितंबर 2012 को सागर जिले में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता अरविंद यादव से 9.5 लाख रुपये ठगे गए थे। बताया जाता है कि पैसे डूबने के सदमे में पीड़ित और उनके पिता की मौत हो गई थी।
पुराने मामले में बरी होने का जिक्र
रेलवे नौकरी घोटाला:सागर की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अदालत ने 14 दिसंबर 2022 को एक फैसला सुनाया था। इसमें ऋचा उर्फ दिव्या तिवारी नाम की व्यक्ति को इसी तरह के आरोपों से बरी किया गया बताया गया है। शिकायतकर्ता से समझौते के बाद धोखाधड़ी के आरोप हटाए गए थे। सबूतों की कमी के चलते बाकी आरोपों से भी बरी किया गया था।
यह जानकारी और मौजूदा गिरफ्तारी की खबर एक साथ स्रोत में दी गई है। दोनों तथ्यों के बीच संबंध और समयक्रम स्पष्ट नहीं है। प्रकाशन से पहले इसे अलग से वैरीफाई करना जरूरी है।
FAQ
- ठग गिरोह का मुख्य सरगना कौन था?
गिरोह का मुख्य सरगना रांची का दिलीप कुमार पांडे बताया गया है। वह खुद को रेलवे भर्ती बोर्ड का अधिकारी बताता था। वह युवाओं को नौकरी का झांसा देता था। - इस मामले में अब तक कितनी FIR दर्ज हुई हैं?
इस मामले में कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच सागर और भोपाल के थानों से शुरू हुई थी।
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रेलवे नौकरी ठगी