Indian Railway ने कर्मचारियों को दिया बड़ा झटका, रिटायरमेंट के बाद यह फायदा अब नहीं मिलेगा!

Aman Vaishnav | Jan 29, 2026, 09:41 IST
railway retirement gift gold plated coin removed
रेलवे ने रिटायर होने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों को दिए जाने वाले चांदी के पदक की परंपरा खत्म करने का फैसला लिया है। अब सेवानिवृत्ति के मौके पर ऐसे पदक नहीं दिए जाएंगे!

Indian Railway ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अफसरों को सम्मानित करने की पुरानी परंपरा में बड़ा बदलाव किया है। अब सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।



रेलवे ने कहा है कि ये प्रथा अब बंद की जा सकती है। इस बारे में रेलवे बोर्ड की प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रेनू शर्मा ने आदेश जारी कर दिया है। ये बदलाव कर्मचारियों और अफसरों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है।





ये परंपरा क्यों बंद की गई

इसका कोई सीधा कारण आदेश में नहीं बताया गया है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक, इसके पीछे कुछ कारण हैं। एक तो यह कि आउटसोर्स विक्रेताओं द्वारा दिए गए पदकों की गुणवत्ता खराब हो रही थी। कई बार चांदी की गुणवत्ता भी घटिया या नकली पाई गई। इसके अलावा, चांदी भी काफी महंगी हो गई है। इन वजहों से यह प्रथा बंद करने का फैसला लिया जा सकता है।



एक और अधिकारी ने बताया कि पिछले 20 सालों में चांदी की कीमत कई गुना बढ़ गई है, तो हो सकता है कि अब अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए भी यह फैसला लिया गया हो।



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20 साल पहले शुरू हुई थी प्रथा

यह परंपरा साल 2006 में शुरू हुई थी। रेलवे मंत्रालय ने करीब 20 साल पहले, मार्च 2006 में, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले या सामान्य तरीके से रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों को लगभग 20 ग्राम वजन वाला सोने की परत चढ़ा चांदी का पदक देने का फैसला लिया था।



शुरुआत में ये पदक इस तरह से डिजाइन किए गए थे कि एक तरफ भारतीय रेलवे का लोगो और दूसरी तरफ संबंधित रेलवे जोन या उत्पादन इकाई (पीयू) का नाम या लोगो अंकित होता था। इन पदकों पर होने वाले खर्च को 'अवर्गीकृत विविध' मद के तहत रखा गया था। मंत्रालय ने साफ किया था कि पदक में इस्तेमाल होने वाली चांदी का वजन 20 ग्राम होगा और उसकी शुद्धता 99.9 प्रतिशत होगी।



परंपरा बंद होने का असर

अब यह परंपरा पूरी तरह से बंद हो सकती है। इसका असर उन अधिकारियों पर भी पड़ सकता है जो 31 जनवरी को रिटायर होने वाले हैं। इसका एक कारण भोपाल मंडल में हुए 'मेडल घोटाले' को मुख्य कारण माना जा रहा है। भोपाल में रिटायर्ड कर्मचारियों को दिए गए सिक्के जांच में नकली पाए गए थे। इसके बाद रेलवे ने सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।



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क्या था पुराना मामला...

कुछ दिनों पहले ही पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। रिटायरमेंट के समय रेल कर्मचारियों को सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड चांदी के सिक्के जांच में नकली पाए गए थे। रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हुआ था कि चांदी के नाम पर तांबे के सिक्के बांटे गए थे।



सम्मान के सिक्कों में बड़ा घोटाला

रेलवे अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को चांदी का सिक्का देता है। यह सिक्का सम्मान के तौर पर दिया जाता है। भोपाल के सामान्य भंडार डिपो में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। इसमें रिटायर कर्मचारियों को मिले सिक्के असल में नकली निकले थे।



तांबे के निकले चांदी के सिक्के

सिक्कों की क्वालिटी पर शक हुआ तो उनकी लैब में जांच कराई गई थी। जांच में पता चला कि जिन्हें चांदी के ऊपर सोने की परत वाले सिक्के बताया जा रहा था, वे असल में तांबे के निकले थे।



चांदी की मात्रा न के बराबर

लैब रिपोर्ट के अनुसार सिक्के में चांदी की मात्रा हैरान कर देने वाली थी। 20 ग्राम के सिक्के में सिर्फ 0.23% चांदी मिली। जबकि रेलवे से प्रति सिक्का 2 हजार 200 रुपए वसूले गए थे।



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