कागजों में एमपी के किसानों का कल्याण! 19 साल पुरानी गाड़ियों से ढोए किसान, काजू-बादाम में उड़ाया बजट

Sanjay Dhiman | May 04, 2026, 18:20 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 'आत्मा' योजना के तहत आयोजित किसान कार्यशालाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। दस्तावेजों के खुलासे से पता चला है कि किसानों को तकनीक सिखाने के बजाय भारी-भरकम राशि काजू-बादाम और मिठाइयों पर खर्च कर दी गई।

News in Short

  • काजू-कतली घोटाला: किसान ट्रेनिंग के नाम पर बजट महंगे ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों पर उड़ाया गया।
  • अवैध परिवहन: नियमों के विरुद्ध एंबुलेंस और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से किसानों को ढोया गया।
  • कंडम गाड़ियां: भुगतान के लिए ऐसी गाड़ियों का उपयोग हुआ, जिनका फिटनेस सालों पहले खत्म था।
  • दस्तावेजों में हेरफेर: RTI में मिले बिल और जमीनी हकीकत में भारी वित्तीय गड़बड़ी मिली है।
  • जांच का आश्वासन: कृषि विभाग ने मामले की गंभीरता देख जांच और कड़ी कार्रवाई की बात कही।

News in Detail

मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष-2026' के रूप में मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रायसेन जिले में कृषि विस्तार की अहम योजना 'सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन' (आत्मा) के नाम पर भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, किसानों को आधुनिक खेती और प्रबंधन सिखाने के लिए आयोजित पांच दिवसीय कार्यशालाओं में लाखों का खर्च दिखाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस बजट का बड़ा हिस्सा किसानों के कौशल विकास के बजाय महंगे ड्राई फ्रूट्स और लग्जरी खाने-पीने की चीजों पर उड़ाया गया।



Bill00


काजू-बादाम और कतली के बिलों का खेल

कार्यशालाओं के दौरान हुए खर्च के जो बिल सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। बीकानेर मिष्ठान भंडार जैसे प्रतिष्ठानों के बिल बताते हैं कि प्रशिक्षण के दौरान काजू, किशमिश, बादाम और काजू कतली जैसी महंगी मिठाइयां परोसी गईं। भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि जहां एक ओर किसान केंद्रों पर पानी और छांव जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग उनके नाम पर काजू कतली के फर्जी बिल भुना रहा है। किसानों का आरोप है कि उन्हें सिर्फ 'इंतजार' मिला, जबकि विभाग ने उनके हिस्से के बजट से मौज मनाई।



bill01


bill.02


नियमों की धज्जियां: एंबुलेंस से ढोए गए किसान

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू परिवहन से जुड़ा है। दस्तावेजों के मुताबिक, 25 मार्च 2025 को गैरतगंज, बेगमगंज और बरेली जैसे केंद्रों पर किसानों को लाने-ले जाने के लिए उन वाहनों का इस्तेमाल किया गया जो पूरी तरह अनफिट थे।



एंबुलेंस का इस्तेमाल: नियमों के खिलाफ जाकर मरीजों के लिए आरक्षित एंबुलेंस (वाहन नंबर CG 04 H 7348) का उपयोग किसानों को ढोने के लिए किया गया।



फिटनेस फेल वाहन: कई ऐसे वाहनों का भुगतान किया गया जिनका फिटनेस मार्च 2023 में ही खत्म हो चुका था (जैसे 19 साल पुरानी कंडम गाड़ी)।



अवैध वाहन: कुछ वाहनों (जैसे MP 04 ZT 2558) का रिकॉर्ड तो परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध नहीं है। यह न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय अपराध भी है।



प्रशासन का रुख और जांच का आश्वासन

इस पूरे मामले पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और वास्तविक गतिविधियों के बीच कोई मेल नहीं दिख रहा है। भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए कई वाउचर संदिग्ध हैं और उनमें पारदर्शिता का अभाव साफ नजर आता है।



इस विषय पर केपी भगत (उप संचालक कृषि, रायसेन) ने कहा है कि जो भी जानकारी और शिकायतें सामने आई हैं, उनकी गहनता से जांच की जाएगी। जांच के उपरांत जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, किसानों और स्थानीय संगठनों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह सरकारी खजाने की खुली लूट का मामला बना रहेगा।



यह खबरें भी पढ़ें...



ममता के गढ़ में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, अब बंगाली मुख्यमंत्री के चेहरे पर सस्पेंस



पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: जहां एमपी सीएम मोहन यादव ने किया प्रचार, जानें उन सीटों के हाल



एमपी के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, रिजल्ट के बाद भी शिक्षक वर्ग टू के हजारों चयनित जॉइनिंग इंतजार में



आंदोलन से पहले ही एमपी पुलिस ने किसान नेताओं को किया हाउस अरेस्ट, 15 सूत्रीय मांगों पर मचा घमासान



Tags:
  • मध्य प्रदेश सरकार
  • कृषि विभाग
  • रायसेन
  • RTI
  • कृषक कल्याण वर्ष-2026