राजा रघुवंशी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने सोनम को दिए दो विकल्प, रवैये पर उठाए सवाल

Aman Vaishnav | Jul 21, 2026, 14:47 IST
राजा रघुवंशी हत्याकांड
राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी को दो विकल्प दिए हैं। इस पूरे मामले को जनने के लिए खबर आखिरी तक पढ़िए...

सोनम के पास दो विकल्प

राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दो विकल्प दिए हैं। सोनम पर अपने पति राजा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।



बता दें कि यह निर्देश मेघालय सरकार की याचिका पर आया है। सरकार ने निचली अदालत और हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी है।



कोर्ट ने या तो गुण-दोष पर फैसला करने, या आत्मसमर्पण कराने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय हुई है।



मेघालय सरकार की याचिका

बता दें कि निचली अदालत ने सोनम को जमानत दी थी। मेघालय हाईकोर्ट ने भी यह फैसला बरकरार रखा। वहीं इसके खिलाफ मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।



सरकार का कहना है कि जमानत का आधार सही नहीं था। इसी याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।



कोर्ट ने क्या कहा

इस मामले में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने सोनम के वकील से साफ कहा कि आपके पास दो विकल्प हैं।



या तो कोर्ट अपील पर दलीलें सुनकर फैसला करेगा। या सोनम को फिलहाल आत्मसमर्पण करना होगा। इस दौरान पूछताछ होगी और जमानत के मुद्दे पर भी विचार होगा।



सोनम के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि गुरुवार (23 जुलाई) तक जवाब दाखिल किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोनम के आचरण पर भी सवाल उठाए। घटना के बाद उसके व्यवहार को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया।



गिरफ्तारी के आधार पर सवाल

कोर्ट ने पूछा कि सोनम ने पहले यह तर्क क्यों नहीं दिया था। उसका दावा है कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे। यह मुद्दा पूरे मामले में अहम बन गया है। जमानत का पूरा आधार इसी तर्क पर टिका हुआ था।



सॉलिसिटर जनरल की दलील

मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी।



मेहता के मुताबिक सोनम ने पुलिस के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया था। इसलिए वह गिरफ्तारी के कारण न बताए जाने का तर्क नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी मेमो में चूक सिर्फ एक लिपिकीय गलती थी।



मेहता ने आगे तर्क दिया कि रंगे हाथों पकड़े जाने पर कारण बताने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई खुद आत्मसमर्पण करता है, तो भी यह आधार लागू नहीं होता। उनका कहना था कि पुलिस के पास आने वाले आरोपी को अलग से गिरफ्तार करने का कोई कारण नहीं बनता। यह दलील मामले की दिशा तय कर सकती है।



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