सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राजेंद्र भारती, अब फैसले पर टिकी है विधायकी की वापसी की उम्मीद
News in short
- 4 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट में CRL.A. 328/2026 दायर
- 3 साल की सजा के खिलाफ अपील, सुनवाई की तारीख तय नहीं
- सदस्यता पहले ही खत्म, बहाली सजा पर स्टे पर निर्भर
- बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी का 27 साल पुराना मामला
- उपचुनाव पर भी हाईकोर्ट के फैसले का असर संभव
News in Detail
दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने हाईकोर्ट की शरण ले ली है। जैसा कि द सूत्र ने पहले ही बताया था कि वह सीधे अपनी विधानसभा सदस्यता रद्द होने को चुनौती नहीं दे सकते, पहले उन्हें अपने खिलाफ सुनाई गई सजा को चुनौती देनी होगी। हुआ भी वैसा ही। राजेंद्र भारती ने अपनी सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा है। 4 अप्रैल को उन्होंने क्रिमिनल रिवीजन अपील दायर की, जिस पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। अब इस केस का फैसला ही तय करेगा कि उनकी राजनीतिक वापसी संभव है या नहीं।
News in detail
हाईकोर्ट पहुंचे भारती, अब यहीं से तय होगी आगे की राह
दतिया विधानसभा सीट से सदस्यता गंवा चुके राजेंद्र भारती ने अब कानूनी लड़ाई का अगला चरण शुरू कर दिया है। उन्होंने 4 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन अपील (CRL.A. 328/2026) दायर कर MP-MLA कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। मामला कोर्ट में लिस्ट हो चुका है, हालांकि अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। माना जा रहा है कि इस पर जल्द सुनवाई हो सकती है।
क्यों अहम है हाईकोर्ट का फैसला?
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले यानी सजा या दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाता, तब तक राजेंद्र भारती की सदस्यता बहाल नहीं हो सकती। यानी उनकी राजनीतिक वापसी पूरी तरह इस अपील के नतीजे पर निर्भर है।
यह खबरें भी पढ़ें...
सदस्यता गई, अब दोहरी कानूनी लड़ाई में फंसे राजेंद्र भारती, भाजपा जल्द कराएगी दतिया उपचुनाव
Datia से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सीट खाली, विधानसभा सदस्यता रद्द, उपचुनाव होंगे ?
27 साल पुराना है पूरा मामला
यह मामला जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में हुए वित्तीय घोटाले से जुड़ा है। अदालत में यह साबित हुआ कि बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र भारती और अकाउंटेंट रघुवीर शरण प्रजापति ने मिलकर जाली दस्तावेज तैयार किए और बैंक के फंड में हेराफेरी की। इस साजिश के चलते बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ और बैंकिंग व्यवस्था में जनता का भरोसा भी प्रभावित हुआ।
कैसे रची गई साजिश?
कोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में सुनियोजित आपराधिक साजिश रची गई थी। अकाउंटेंट ने बैंक के दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी कागजात तैयार किए, जबकि अध्यक्ष होने के नाते राजेंद्र भारती इस साजिश का हिस्सा बने। इस मामले में उनकी मां सावित्री राजेंद्र भारती भी आरोपी थी जिनकी मृत्यु होने के बाद उन्हें मामले से अलग कर दिया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप सिद्ध हुए।
कोर्ट का फैसला: सजा, जुर्माना और अपील की राहत
2 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को 3-3 साल की सजा सुनाई। राजेंद्र भारती पर 1 लाख रुपये और सह-आरोपी पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
हालांकि उनकी ओर से अधिवक्ताओं ने सह आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य का हवाला दिया था। जिसे देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 60 दिनों की जमानत दी, ताकि वे हाईकोर्ट में अपील कर सकें।
सदस्यता खत्म, लेकिन बहाली का रास्ता कठिन
सजा के तुरंत बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने 10 घंटों के भीतर इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी। द सूत्र ने पहले ही बताया था कि भारती सीधे सदस्यता रद्द होने को चुनौती नहीं दे सकते उन्हें पहले सजा या दोषसिद्धि पर स्टे लेना होगा, और उसके बाद ही बहाली की प्रक्रिया शुरू होगी।
हालांकि कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी अनुमान है कि राजनीतिक कारणों के चलते जितनी तेजी से उनकी सदस्यता गई थी उतनी तेजी से वापस नहीं मिलेगी।
उपचुनाव पर टिकी नजर, क्या मिलेगा स्टे?
अब सबसे बड़ा सवाल दतिया उपचुनाव को लेकर है। अगर हाईकोर्ट से जल्द राहत नहीं मिलती है, तो चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। वहीं, अगर समय रहते स्टे मिल जाता है, तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
यह खबरें भी पढ़ें...
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सीट खाली, विधानसभा सदस्यता रद्द
दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जेल: भूमि विकास बैंक घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला
अदालत का फैसला तय करेगा राजनीतिक भविष्य-
राजेंद्र भारती के लिए यह मामला अब पूरी तरह अदालत के फैसले पर निर्भर हो गया है। हाईकोर्ट से मिलने वाली राहत ही तय करेगी कि वे दोबारा विधानसभा में लौट पाएंगे या दतिया में उपचुनाव के बाद नया जनादेश देखने को मिलेगा।