बैंक FD घोटाला: राजेंद्र भारती की याचिका खारिज, सजा बरकरार
समझें क्या है पूरा मामला...
- राजेंद्र भारती की याचिका खारिज, सजा पर रोक नहीं लगी।
- बैंक FD घोटाला केस में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
- दतिया उपचुनाव लड़ने की राह अब हुई और मुश्किल।
- 3 साल की सजा बरकरार, विधायकी पहले ही जा चुकी।
- पी. चिदंबरम की दलील भी नहीं आई काम, याचिका खारिज।
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका बैंक FD घोटाला मामले से जुड़ी थी। उन्होंने अपनी 3 साल की सजा पर रोक मांगी थी। कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे दतिया उपचुनाव लड़ने का उनका रास्ता और मुश्किल हो गया है।
कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। यह मामला दतिया विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले सामने आया है, जिससे इसकी राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने राजेंद्र भारती की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि उनकी 3 साल की सजा फिलहाल बरकरार रहेगी।
हालांकि, सजा सुनाए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट से उन्हें जमानत पहले ही मिल चुकी है। इसलिए वे अभी जेल से बाहर हैं, लेकिन दोषसिद्धि का असर उनके चुनावी अधिकार पर बना रहेगा।
भारती ने क्या मांग की थी
राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट में दो मांगें रखी थीं। पहली मांग सजा पर रोक लगाने की थी। दूसरी मांग दतिया विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगाने की थी।
याचिका में उन्होंने तर्क दिया था कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगी, तो उनका चुनाव लड़ने का अधिकार प्रभावित होगा। यह तर्क कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सका।
अप्रैल को सुनाई गई थी सजा
इस मामले की जड़ बैंक FD घोटाले से जुड़ी है। दिल्ली की MP MLA (Member of Parliament – Member of Legislative Assembly) कोर्ट ने 2 अप्रैल को राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई थी।
सजा के तुरंत बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी। इसी सजा और सदस्यता समाप्ति के आदेश को चुनौती देने के लिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।
चिदंबरम ने दी थी यह दलील
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने राजेंद्र भारती की ओर से पैरवी की। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि यह मामला आपराधिक नहीं, बल्कि सिविल प्रकृति का है। उनके मुताबिक बैंक ने पहले इस विवाद को सिविल मामला मानते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। वहां दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ था।
चिदंबरम ने यह भी बताया कि समझौते की राशि अब तक भारती को नहीं मिली है। उनके अनुसार संबंधित FD (Fixed Deposit – सावधि जमा) राशि अभी भी बैंक में सुरक्षित रखी है। इन दलीलों के बावजूद कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
दतिया में अब भी प्रत्याशियों का इंतजार
दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। नामांकन प्रक्रिया पहले से जारी है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अब तक अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए हैं।
माना जा रहा है कि दोनों प्रमुख दल जल्द ही अपनी अंतिम रणनीति तय कर सकते हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस के लिए दतिया सीट को लेकर रणनीति बनाना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राजेंद्र भारती इस फैसले के खिलाफ आगे कोई कानूनी कदम उठाते हैं या नहीं। साथ ही दतिया सीट से प्रत्याशी चयन को लेकर भी स्थिति जल्द साफ हो सकती है।
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