सदस्यता गई, अब दोहरी कानूनी लड़ाई में फंसे राजेंद्र भारती, भाजपा जल्द कराएगी दतिया उपचुनाव
News in short
- 3 साल की सजा के बाद सदस्यता तत्काल समाप्त।
- धारा 8(3) के तहत अयोग्यता स्वतः लागू।
- हाईकोर्ट में पहले सजा/दोषसिद्धि पर स्टे जरूरी।
- यदि कोर्ट से राहत मिली तब भी लड़नी होगी कानूनी लड़ाई।
- उपचुनाव टालना मुश्किल, सरकार जल्द चुनाव चाहती है।
News in Detail
दिल्ली की MPMLA कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म होना तय कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के अनुसार 2 साल या उससे अधिक सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि स्वतः अयोग्य हो जाता है। इसलिए विधानसभा सचिवालय ने तुरंत उनकी सीट रिक्त घोषित कर दी। राजेंद्र भारती अब हाईकोर्ट में अपील कर रहे हैं, लेकिन उनकी कुर्सी बचती नहीं दिख रही है।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, विधायकी खतरे में
कानूनी विशेषज्ञों की राय
इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय बेहद अहम है। उनके अनुसार, अभी तक जो हुआ वह केवल पहला चरण है। अब राजेंद्र भारती को दिल्ली की निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करनी होगी। यह अपील उनकी सदस्यता के खिलाफ नहीं होगी। यह अपील सजा और दोषसिद्धि (conviction) के खिलाफ होगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह एक बड़ा कानूनी पेंच है। राजेंद्र भारती की सदस्यता किसी प्रशासनिक आदेश से नहीं बल्कि कानून के स्वतः प्रभाव से खत्म हुई है। वे सीधे सदस्यता रद्द को चुनौती नहीं दे सकते। पहले उन्हें कोर्ट की सजा को खत्म या 2 साल से कम कराना होगा। यह अयोग्यता उसी सजा पर टिकी है।
हाईकोर्ट से राहत भी तुरंत नहीं देगी कुर्सी
यहां सबसे बड़ा भ्रम यही है कि अगर हाईकोर्ट से राहत मिल जाए तो सदस्यता वापस मिल जाएगी। लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ऐसा नहीं होगा। सरकार जितनी तेजी से काम कर रही है, उपचुनावों से पहले राजेंद्र भारती को कोर्ट से राहत मिलने के आसार कम हैं।
अगर हाईकोर्ट सजा या दोषसिद्धि पर स्टे देता है या सजा दो साल से कम करता है, तो भी सदस्यता स्वचालित रूप से बहाल नहीं होगी। इसके लिए अलग से कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। हालांकि, सदस्यता बहाली का कारण कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक होगा।
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सीट खाली, विधानसभा सदस्यता रद्द
पहले भी HC जा चुके हैं भारती
राजेंद्र भारती ने एमपी एमएलए कोर्ट के प्रकरण SC/06/2025 में हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका CRL.REV.P. 19/2026 लगाई थी। यह याचिका मुख्य फैसले के खिलाफ नहीं थी। यह एमपी एमएलए कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश के खिलाफ थी। सुनवाई से पहले निचली अदालत का आदेश इन्फ्रक्चुअस हो गया था। इस कारण 28 मार्च को राजेंद्र भारती ने याचिका वापस ले ली।
डबल अपील का जाल, दो बार कोर्ट जाना होगा
राजेंद्र भारती को इस केस में दो स्तर पर लड़ाई लड़नी होगी। पहले निचली अदालत के फैसले को चुनौती देना और उस पर स्टे लेना या सजा को दो साल से कम कराना। फिर सदस्यता बहाली के लिए अलग से अपील करनी होगी।
राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने का नोटिफिकेशन जल्दी जारी हुआ था, लेकिन इसे उतनी तेजी से रद्द नहीं किया जाएगा। इसलिए उन्हें सदस्यता बहाली के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। यह प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों ने दिया साफ जवाब
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा स्थिति में दतिया सीट पर उपचुनाव टलना बेहद मुश्किल है। अगर राजेंद्र भारती को जल्दी राहत नहीं मिलती है, तो चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर देगा। और अगर चुनाव हो जाते हैं, तो बाद में राहत मिलना लगभग नामुमकिन होगा।
जल्द चुनाव कराने की तैयारी में भाजपा
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने सदस्यता खत्म करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया। पहले कानूनी सलाहकारों से विस्तृत चर्चा की गई थी। कानूनी सलाहकारों ने बताया कि राजेंद्र भारती सीधे सदस्यता रद्द होने के खिलाफ अपील नहीं कर सकते।
अब सरकार की प्राथमिकता उपचुनाव कराना है। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि सभी कदम कानून के तहत उठाए गए थे। सदस्यता समाप्त करने का नोटिफिकेशन जारी होने से उपचुनाव की घोषणा जल्द होने की संभावना है।
राजनीति बनाम कानून
कांग्रेस इसे जल्दबाजी और अलोकतांत्रिक कार्रवाई बता रही है। वहीं, सरकार और शासकीय अधिवक्ता इसे वैधानिक प्रक्रिया मान रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन चुका है।
उपचुनाव लगभग तय
विश्लेषण से साफ है कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के लिए रास्ता आसान नहीं है। हाईकोर्ट से तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है। राहत मिलने पर भी सदस्यता तुरंत वापस नहीं मिलेगी। ऐसे में दतिया में उपचुनाव होना लगभग तय है।
क्या था पूरा मामला
करीब 27 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित MP-MLA court ने बड़ा फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने राजेंद्र भारती और पूर्व बैंक कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी पाया।
यह मामला ग्रामीण बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में हेराफेरी और दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ा था, जिसमें IPC की गंभीर धाराएं लागू थीं। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 3 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले लिली थॉमस बनाम भारत संघ के आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। 2 अप्रैल की रात को ही विधानसभा सचिवालय ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर सीट रिक्त घोषित कर दी।