अब्दुल्ला खान करेंगे हिंदू बेटी का कन्यादान, बिना धर्म बदले दी परवरिश

Anjali Dwivedi | Apr 04, 2026, 10:52 IST
rajgarh muslim father abdullah khan
मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है। चार अप्रैल को अब्दुल्ला खान अपनी हिंदू बेटी नंदिनी परमार का कन्यादान करने जा रहे हैं। इस शादी ने सबका ध्यान खींच लिया है।

पांच प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक ऐसी शादी हो रही है जो पूरे देश को एक संदेश दे रही है।
  • हिंदू लड़की नंदिनी परमार का कन्यादान एक मुस्लिम परिवार के मुखिया अब्दुल्ला खान करेंगे।
  • 2010 में सड़क हादसे और बीमारी में माता-पिता गंवाने वाली नंदिनी को अब्दुल्ला खान के परिवार ने अपनाया था।
  • परिवार ने उसका धर्म नहीं बदला, हिंदू परंपराओं में ही उसे पाला और पढ़ाया।
  • 4 अप्रैल को यह शादी पूरी हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न होगी।

Rajgarh News. नंदिनी परमार की कहानी दर्द से शुरू होती है। साल 2010 में एक सड़क हादसे और बीमारी ने उससे उसके माता-पिता दोनों को छीन लिया। तब नंदिनी बहुत छोटी थी।



नंदिनी की बड़ी बहन प्रीति ने माता-पिता के जीवित रहते ही अब्दुल्ला खान से प्रेम विवाह किया था। वह पहले से इस परिवार की बहू थी। माता-पिता के जाने के बाद नंदिनी की जिम्मेदारी भी इसी परिवार ने उठाई। उसे अपनी सगी बेटी की तरह पाला।



धर्म नहीं बदला, संस्कार बचाए

इस पूरी कहानी में सबसे अहम बात यह है कि अब्दुल्ला खान के परिवार ने कभी नंदिनी पर धर्म परिवर्तन का कोई दबाव नहीं बनाया। उसे हिंदू परंपराओं, त्योहारों और संस्कारों के साथ जीने की पूरी आजादी दी।



परिवार ने सिर्फ छत और खाना नहीं दिया, बल्कि नंदिनी को उच्च शिक्षा भी दिलाई। उसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाया। यह परिवार की सोच और इंसानियत की मिसाल है।



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पढ़ाई में मिला प्यार, तय हुआ रिश्ता

पढ़ाई के दौरान ही नंदिनी की मुलाकात ग्वालियर के अंश परमार से हुई। दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। दोनों परिवारों की आपसी सहमति से यह रिश्ता तय हुआ। शादी का कार्ड छपा तो उसमें पिता की जगह अब्दुल्ला खान (हिंदू मुस्लिम) का नाम दर्ज हुआ। यह कार्ड देखकर लोगों की आंखें भर आईं।



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4 अप्रैल को हिंदू रीति-रिवाज से शादी

राजगढ़ के ओल्ड कलेक्ट्रेट रोड स्थित निवास पर 4 अप्रैल को शाम 8 बजे से विवाह कार्यक्रम शुरू होगा। पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच सभी हिंदू परंपराएं निभाई जाएंगी। शहनाई गूंजेगी और विदाई की पूरी रस्में होंगी।



खास बात यह है कि मुस्लिम परिवार के सभी सदस्य इस हिंदू विवाह में पूरे उत्साह से शामिल होंगे। वे बेटी को यादगार विदाई देने की तैयारी में जुटे हैं।



इंसानियत का असली चेहरा

राजगढ़ का यह परिवार आज पूरे देश के लिए एक जीती-जागती मिसाल बन गया है। जब समाज में धर्म के नाम पर तनाव की खबरें आती रहती हैं, ऐसे में अब्दुल्ला खान का परिवार यह साबित करता है कि इंसानियत किसी भी धर्म से बड़ी होती है। नंदिनी की यह शादी सर्वधर्म समभाव की ऐसी कहानी है जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।



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