मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का दावा- नटराजन का नामांकन रद्द कराने में कांग्रेस का ही हाथ

Aman Vaishnav | Jun 10, 2026, 09:06 IST
मीनाक्षी नटराजन
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से सियासी भूचाल आ गया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि तेलंगाना में कांग्रेस से ही उन्हें मीनाक्षी नटराजन के केस से जुड़े दस्तावेज मिले थे।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है।



इसी बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान खूब चर्चा में है। विजयवर्गीय ने कहा कि हमें ये सारे दस्तावेज तेलंगाना से मिले हैं जहां कांग्रेस की ही सरकार है। ऐसे में साफ है कि कांग्रेस के ही कुछ लोगों ने ये कागजात हमें पहुंचाए होंगे।



उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों और खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।



CM मोहन यादव का पलटवार

वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पर हमला बोल है। उन्होंने कहा है कि हलफनामे में जानबूझकर जानकारी छिपाना आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने के दायरे में आता है।



मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम बेहद साफ हैं। किसी भी अदालत में लंबित मामले को उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथ पत्र में बताना अनिवार्य है। इससे मतदाता को उम्मीदवार की पूरी जानकारी मिलती है।



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क्या था हैदराबाद कोर्ट का मामला?

नटराजन पर तेलंगाना की एक अदालत में एक पुराना आपराधिक केस लंबित था। यह केस हैदराबाद की अदालत में चल रहा था। नटराजन ने इस मामले का जिक्र नामांकन के साथ जमा किए गए शपथ पत्र में नहीं किया।



भाजपा ने इसी बिंदु पर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिटर्निंग ऑफिसर ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया।



राज्यसभा चुनाव: नियम क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक हर उम्मीदवार को नामांकन के साथ शपथ पत्र देना होता है। इस शपथ पत्र में किसी भी अदालत में चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी है। जानकारी छिपाने पर नामांकन रद्द किया जा सकता है।



रिटर्निंग ऑफिसर के पास यह अधिकार होता है कि वह स्क्रूटनी के दौरान नामांकन पत्रों की जांच करे। किसी भी आपत्ति पर वह सुनवाई कर फैसला सुना सकता है। इस मामले में यही प्रक्रिया अपनाई गई।



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