राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची मीनाक्षी नटराजन, दायर की पिटिशन

Neel Tiwari | Jul 21, 2026, 18:29 IST
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कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। उनका दावा है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत आधार पर नामांकन खारिज किया। इससे पहले वह चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचीं थी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला

• कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव का नामांकन रद्द हुआ।


• रिटर्निंग ऑफिसर ने जानकारी छिपाने का आधार बताते हुए नामांकन खारिज किया।


• मीनाक्षी नटराजन ने इस फैसले को गलत और पक्षपातपूर्ण बताया।


• पहले चुनाव आयोग और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।


• अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर हुई है।



राज्यसभा चुनाव से जुड़ा एक अहम मामला अब जबलपुर हाई कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन रद्द होने के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उनका नामांकन गलत आधार पर खारिज किया गया। अब वह अदालत से न्याय की उम्मीद लेकर पहुंची हैं।



उन्होंने बताया कि राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 तारीख को होना था। उन्होंने 8 तारीख को अपना नामांकन दाखिल किया था। अगले दिन स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी हुई। इसी दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन खारिज कर दिया।



नामांकन रद्द करने का आधार क्यों बना विवाद

मीनाक्षी नटराजन के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि उन्होंने एक अदालती मामले की जानकारी छिपाई। इसी वजह से उनका नामांकन रद्द किया गया।



उन्होंने दावा किया कि बाद में अदालत के आदेश से साफ हो गया कि उस मामले का न्यायालय ने संज्ञान ही नहीं लिया था। उनके मुताबिक 12 तारीख के आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित अदालत के पास उस मामले में संज्ञान लेने का अधिकार ही नहीं था।



उनका कहना है कि जब अदालत ने संज्ञान ही नहीं लिया था, तब जानकारी छिपाने का सवाल भी नहीं उठता। इसी कारण उन्होंने नामांकन रद्द करने के फैसले को गलत बताया।



चुनाव आयोग में भी उठाया था मामला

नामांकन रद्द होने के अगले दिन उन्होंने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने उनका पक्ष रखा।



उन्होंने आयोग के सामने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने तथ्यों की गलत व्याख्या की। उनका कहना था कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। इसलिए फैसले की समीक्षा जरूरी थी।



सुप्रीम कोर्ट से मिला चुनाव याचिका का रास्ता

चुनाव आयोग में राहत नहीं मिलने के बाद मीनाक्षी नटराजन सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। वहां उन्होंने नामांकन रद्द करने के फैसले को चुनौती दी।



उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाने का निर्देश दिया। इसी निर्देश के बाद उन्होंने तय समय सीमा के भीतर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की।



उन्होंने कहा कि चुनाव याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया के तहत उन्हें स्वयं रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होना पड़ा। इसलिए वह खुद अदालत पहुंचीं।



अदालत में विचाराधीन मामले पर संयम बरता

मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से कहा कि वह इस मामले पर अधिक टिप्पणी नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि वह कानून का सम्मान करती हैं।



उन्होंने कहा कि जब कोई मामला अदालत के सामने विचाराधीन हो, तब सार्वजनिक बयान सीमित रखना ही उचित होता है। इसलिए वह न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करेंगी।



याचिका में कौन कर रहा है पैरवी

इस मामले में मीनाक्षी नटराजन की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमालिया पैरवी कर रहे हैं। अब आगे की सुनवाई में अदालत नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।



यह मामला राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए इसका असर चुनावी कानून की व्याख्या पर भी पड़ सकता है। अदालत के आगामी आदेश पर सभी की नजर रहेगी।



आगे क्या होगा

हाई कोर्ट में दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत तय करेगी कि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है। इसलिए अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।



मीडिया से बोलीं मीनाक्षी: सरकार सवालों से भाग रही है

राज्यसभा नामांकन विवाद के बीच कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने केंद्र और राज्य सरकार पर कई अहम मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। बातचीत के दौरान उन्होंने NEET पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), किसानों, आदिवासियों और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे विषयों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर नया राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास कर रही है। सरकार सवालों से भाग रही है।



NEET पेपर लीक देश के भविष्य के साथ विश्वासघात

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि किसी भी सरकारी नीति का विरोध करना देशद्रोह नहीं है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा NEET पेपर लीक जैसा मामला देश के भविष्य के साथ विश्वासघात है। उनके मुताबिक, परीक्षा घोटालों के लिए जिम्मेदार लोगों की नैतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए और इसे केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि देश के भविष्य का सवाल माना जाना चाहिए।



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