राम मंदिर विवाद पर भड़के पंडित प्रदीप मिश्रा, बोले यह सनातन के खिलाफ षड्यंत्र
समझें क्या है पूरा मामला...
- रविंद्र भवन भोपाल में रविवार को सनातन संवाद कार्यक्रम हुआ था।
- कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव की उपासना पर बात की थी।
- साथ ही उन्होंने राम मंदिर चंदा चोरी विवाद को सनातन विरोधी साजिश बताया।
- इसी दिन एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की।
- कोर्ट आज 20 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई करेगा।
भोपाल में हुआ सनातन संवाद
रविवार, 19 जुलाई को श्री दिशा भक्ति ने रविंद्र भवन में सनातन संवाद कार्यक्रम रखा गया था। इसमें विश्वविख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शामिल हुए थे। उन्होंने भगवान शिव की उपासना से जुड़े सरल उपायों पर विस्तार से बात की।
साथ ही पंडित मिश्रा ने कहा कि सच्ची श्रद्धा से किया गया छोटा प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने भगवान शिव के प्रति आस्था को सबसे बड़ी साधना बताया। श्रोताओं ने उनकी बातों को ध्यान से सुना।
चंदा चोरी विवाद पर बड़ा बयान
कार्यक्रम के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे सनातन धर्म के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया। साथ ही उन्होंने पूरे सनातन समाज से संगठित रहने की अपील की।
मंच पर श्रीमद् जगद्गुरु विष्णु स्वामी भैयाजी महाराज और महंत अनिलानंद महाराज भी मौजूद रहे। संत-महात्माओं और विद्वानों ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और युवाओं की भूमिका पर भी विचार रखे। कार्यक्रम में युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर खास जोर दिया गया।
एसआईटी ने कोर्ट में दी रिपोर्ट
इसी बीच राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा अपडेट आया है। उत्तर प्रदेश सरकार की SIT ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की है। यह रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदे और चढ़ावे से जुड़ी है।
कुछ याचिकाओं में ट्रस्ट के प्रबंधन में अनियमितता की बात कही गई है। इन याचिकाओं में अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट आज इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
कौन करेगा सुनवाई
20 जुलाई की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ करेगी। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। इससे पहले 13 जुलाई को सीजेआई की पीठ ने एसआईटी को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि कुछ रिट याचिकाओं में एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई है। मामले की जांच के लिए पहले ही एसआईटी बनाई जा चुकी है। इसीलिए कोर्ट ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में एसआईटी के गठन की पूरी जानकारी भी देने को कहा गया था।
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